Tuesday, December 29, 2015

बच्चों की कस्टडी (सौंपने) की मांग

फिल्म अभिनेत्री करिश्मा कपूर के पति संजय कपूर ने परिवार अदालत में अर्जी दायर कर अपने दोनों बच्चों की कस्टडी (सौंपने) की मांग की है। दोनों बच्चे अभी अपनी मां के साथ रहते हैं। संजय के वकील ने 15 दिनों पूर्व अर्जी दायर की थी। दोनों की शादी 2003 में हुई थी।
करिश्मा की वकील जालजा नांबियार ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। लेकिन संजय के वकील ने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि 15 दिन पहले ही अर्जी दायर की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बेटी समाइरा और बेटे किआन राज की कस्टडी के लिए अर्जी दायर की गई है। यह पूछने पर कि अर्जी में संजय ने कोई आरोप लगाया है या नहीं, वकील ने इसका जवाब देने से मना कर दिया।
उन्होंने हालांकि यह बताया कि संजय ने इससे पहले भी अर्जी दायर की थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया था। उन्होंने बताया कि दोनों ने आपसी सहमति से तलाक का मुकदमा दायर किया था जिसमें बच्चे किसके साथ रहेंगे इसके नियम व शर्तें भी शामिल थे।

लेकिन तलाक की अर्जी का निपटारा पिछले महीने हो गया। करिश्मा और संजय दोनों ने अर्जी पर आपसी सहमति वापस ले ली थी जिसके बाद निपटारा किया गया। करिश्मा के वकील क्रांति साठे ने संपर्क करने पर कहा कि परिवार अदालत से उन्हें कोई अभी तक कोई दस्तावेज नहीं मिला है।

Friday, December 11, 2015

मेरठ दिल्ली एक्सप्रेस-वे एक नजर में

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने भरोसा दिलाया है कि मेरठ से दिल्ली के बीच का 75 किमी का सफर दो वर्ष में महज 40 मिनट में तय होने लगेगा। दैनिक जागरण की ओर से गुरुवार को आयोजित जागरण फोरम में गडकरी ने कहा कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे की तैयारियां भी पूरी हो गई हैं। इस पर जनवरी से काम शुरू हो जाएगा। मौजूदा समय में मेरठ से दिल्ली के सफर में आमतौर पर ढाई से तीन घंटे का समय लग जाता है और जनता को जाम और भारी प्रदूषण आदि से जूझना पड़ता है।
जागरण फोरम के विशेष सत्र में सवालों के जवाब में गडकरी ने कहा कि दिल्ली के जाम में मैं पहली बार नहीं फंसा। रोज फंसता हूं। खासकर एयरपोर्ट जाते वक्त धौलाकुआं से गुड़गांव के बीच। इसलिए एनएचएआइ से डिजाइन देने को कहा है। दिल्ली के ट्रैफिक के अध्ययन के आदेश भी दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट मंगलवार को मिलेगी। भूरेलाल समिति की रिपोर्ट पर 13 हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भी तैयार कर दिया है। लेकिन वास्तविक समाधान ईस्टर्न व वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे बनने पर होगा। इन्हें 400 दिन में पूरा करेंगे। दिल्ली जयपुर हाईवे के बारे में गडकरी का कहना था कि 87 फीसद काम पूरा हो चुका है। 55 फ्लाईओवर में से 50 पूरे हो गए हैं। बाकी भी मार्च तक पूरे हो जाएंगे।
मेरठ दिल्ली एक्सप्रेस-वे एक नजर में
दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ब्रिज से डासना तक एक्सप्रेस वे और हाईवे को मिलाकर कुल 14 लेन की सड़क बनेगी। इसमें छह लेन का एक्सप्रेस-वे होगा जबकि आठ लेन का हाईवे। यह दूरी लगभग 30 किमी की होगी। इसके बाद एक्सप्रेस वे डासना से मेरठ परतापुर तिराहे तक छह लेन का आएगा। यहां से बच्चा पार्क के निकट एनएच-235 को कनेक्ट करेगा।
ये हैं चुनौतियां

प्रोजेक्ट के लिए मेरठ के 14 गांव की 108.36 हेक्टेयर भूमि जबकि गाजियाबाद के 19 गांव की 333 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। अधिग्रहण को लेकर पेच अब भी फंसा है। किसानों की मांग है कि उन्हें मुआवजा 10 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से दिया जाए, लेकिन जो सरकारी रेट है, वह एक तिहाई से भी कम बताई जा रही है, जो किसानों को मान्य नहीं है। वैसे भी मेरठ में अब तक 10 गांव की भूमि के अधिग्रहण की ही प्रक्रिया पूरी हुई है।

Tuesday, December 8, 2015

आजम खान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से ज्यादा खतरनाक

शिवसेना ने यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की तुलना अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से कर डाली है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए आजम खान पर निशाना साधा है। शिवसेना ने आरोप लगाया है कि आजम खान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से ज्यादा खतरनाक हैं।
शिवसेना ने भारत में अल्पसंख्यकों के मामले को लेकर आजम के संयुक्त राष्ट्र से दखल देने की अपील करने पर उनकी कड़ी आलोचना की है। 
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले उत्तरप्रदेश के मंत्री आजम खान ने यह मांग करते हुए नया विवाद छेड़ा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकी संगठन घोषित किया जाए।

उन्होंने संगठन पर दंगे की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आरोप लगाया जिसपर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। खान ने कहा था कि उन्होंने (आरएसएस) कई दंगों को अंजाम दिया और कई की साजिश रची है। आरएसएस को आतंकी संगठन घोषित किया जाना चाहिए।

Thursday, December 3, 2015

एक करोड़ 80 लाख के रुपए के सालाना पैकेज

पटना के छात्र आशुतोष अग्रवाल को गूगल की ओर से एक करोड़ 80 लाख के रुपए के सालाना पैकेज का ऑफर दिया गया है। मजेदार बात यह है कि आशुतोष कंप्यूटर साइंस के फाइनल ईयर के स्टूडेंट हैं और अभी उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हुई है।

लखनऊ के रहने वाले आशुतोष इससे पहले गूगल से इंटर्नशिप कर चुके हैं। उनका कहना है कि सेलेक्शन के लिए कई टेलीफोन राउंड से गुजरना पड़ा। गूगल में इंटर्नशिप की वजह से जॉब मिलने में आसानी हुई। आशुतोष का कहना है कि इसके लिए दो टेलीफोनिक राउंड हुए। उसके बाद कई स्तरों पर टेस्ट लिया गया।

Monday, November 30, 2015

संविधान की शपथ दिलाने अपील

शिवसेना ने आज अपने मुखपत्र सामना के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शपथ के लिए पवित्र धार्मिक गंथ्रों की जगह संविधान की शपथ दिलाने अपील की है कि ताकि देश को धर्म के आधार पर हो रही राजनीति से ऊपर उठाया जा सके।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा हैकि दिवंगत बाला साहेब ठाकरे का मानना था कि कानून में सभी धर्म समान हैं। इसलिए संविधान सभी धर्म के लोगों के लिए धार्मिक पुस्तक होनी चाहिए।
सामना ने अपने संपादकीय में लिखा है कि सभी लोगों के लिए कानून एक समान है लेकिन संविधान कानून से भी ऊपर है। इसलिए अदालतों में भी धार्मिक गंथ्रों की बजाय संविधान की शपथ दिलानी चाहिए।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को बदलना के बारे में सोचना आत्मघाती है। प्रधानमंत्री ने ये भी कहा था कि संविधान एक पवित्र किताब है।

प्रधानमंत्री के उसी बयान पर शिवसेना ने कहा कि प्रधानमंत्री को अब अपनी इस सोच को आगे बढ़ाते हुए देश को धर्म आधारित राजनीति से ऊपर लाने की कोशिश करनी चाहिए।

Friday, November 27, 2015

'संविधान दिवस

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से देश में पहली बार 26 नवंबर गुरुवार को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाया गया। देश की नई पीढ़ी को संविधान से रूबरू कराने के लिए इस दिन स्कूलों में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों की कड़ी में सबसे पहले प्रार्थना के समय ही छात्र-छात्राओं को संविधान की प्रस्तावना पढ़ाई गई। इसके साथ ही विभिन्न स्कूलों में छात्र संसद आयोजित की गई।

गार्गी ग‌र्ल्स स्कूल में प्रधानाचार्या अनुपमा सक्सेना ने छात्राओं को संविधान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। वेस्ट एड रोड स्थित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल में आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में प्रधानाचार्य कपिल सूद ने छात्रों को संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के संस्थापक डा. भीमराव अंबेडकर सहित अन्य लोगों के बारे में बताया। केंद्रीय विद्यालय सिख लाइंस में आयोजित युवा संसद में विपक्षी सांसदों ने महंगाई, सुरक्षा, आतंकवाद, विदेश नीति तथा शिक्षा नीति जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश की। सिटी वोकेशनल पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्य प्रेम मेहता ने जानकारी दी। राधा गोविंद पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्या विनीता गुप्ता ने बच्चों को संविधान की जानकारी दी। जसवंत मिल्स इंटर कालेज में आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में प्रधानाचार्य डा. राजेश अग्रवाल ने छात्रों को संविधान की उपयोगिता के बारे में बताया।

Monday, November 16, 2015

सभी लोग कानून का समान रूप से पालन करें

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' ने अपने संपादकीय में पेरिस में हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत सरकार को आतंकवाद के खिलाफ खुद से कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। संपादकीय में पश्चिमी देशों पर आतंकवाद को लेकर दोहरा नजरिया अपनाने पर सामना में तीखी टिप्‍पणी की गई है। इसमें लिखा है कि जबतक अपनी कुर्सी के नीचे धमाका नहीं होता है तब तक वह हिंदुस्‍तान की तड़प महसूस नहीं कर सकते हैं। सामना के मुताबिक पश्चिमी देश अपनी तरह से आतंकवाद से लड़ते हैं और यही भारत को भी सीखना होगा। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद की घटनाओं पर जब पाकिस्‍तान टिप्‍पणी करता है तो यह बेहद हास्‍यास्‍पद लगता है क्‍योंकि वह 'आतंकवाद की बहुराष्‍ट्रीय कंपनी' है।
सामना में कहा गया है कि फ्रांस ने जब अपने यहां पर बुर्का बैन किया था तभी उसको परिणाम भुगतने की धमकी मिलनी शुरू हो गई थी। लेकिन वह इसके आगे नहीं झुका। इसका मकसद साफ था कि वह चाहता है कि फ्रांस में रहने वाले सभी लोग कानून का समान रूप से पालन करें, फिर चाहे वह किसी भी धर्म से संबंध क्‍यों न रखता हो। लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। एक तरफ जहां फ्रांस वहां पर लगातार बढ़ रही म‍ुस्लिम आबादी से चिंतित दिखाई देता है वहीं भारत इससे कोई सबक नहीं लेता है। संपादकीय में कहा गया है कि भारत हमेशा से ही इस बढ़ती आबादी के सामने झुकने के लिए तैयार रहा है।
सामना में आईएस की उत्‍पत्ति के पीछे अमेरिका को बताया गया है। पत्र लिखता है कि अमेरिका ने अपने स्‍वार्थ की खातिर इराक को तबाह कर दिया और सद्दाम हुसैन को खत्‍म कर दिया। इसमें फ्रांस ने भी उसका साथ दिया। इसके फलस्‍वरूप वहां पर अराजकता का माहौल बना और आईएस का भूत पैदा हुआ जो आज यूरोप पर हमले कर रहा है। संपादकीय में लिखा है कि इस पाप में फ्रांस समान रूप से भागीदार है। क्‍योंकि सद्दाम के पतन के बाद ही उसके आसपास के देशों में अराजकता का माहौल पैदा हुआ। अब वही आतंकवाद यूरोपीय देशों के लिए संकट बन गया है।

पत्र में कहा गया है कि भारत के कश्‍मीर में भी आईएस दस्‍तक दे चुका है। पिछले दिनों वहां पर खुलेआम आईएस के झंडे दिखाए गए और प्रदर्शन किया गया। सामना में आईए को पूरी दुनिया के लिए खतरा बताया है। इसमें कहा गया है इन्‍होंने फ्रांस की जमीन को खून से लाल कर दिया है। अब इससे सबक सीखने की जरूरत है। संपादकीय में कहा गया है अब जरूरत है कि आतंकवाद की जड़ों को खत्‍म करने के लिए उनपर कड़ा प्रहार किया जाए।

Tuesday, November 10, 2015

शुभकामनायें

साथियों ,

आप सभी को तथा सभी के परिवार को  मेरी और मेरी पत्नी की ओर से दीपावली की  हार्दिक
शुभकामनायें

Friday, November 6, 2015

लूमिया एक्सएल अगले माह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटी कार्यक्रम को देखते हुए टेक्नोलॉजी कंपनियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। माइक्रोसॉफ्ट ने स्मार्ट सिटी की दिक्कतों के निदान को ध्यान में रखते हुए भारत में स्थानीय स्टार्ट अप्स को प्रोत्साहित करने की घोषणा की है।
देश में स्मार्ट शहरों की परिकल्पना को जमीन पर उतारने के लिए माइक्रोसॉफ्ट इन स्टार्ट अप्स को हर तरह की मदद देगी। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट ने ई-कॉमर्स से जुड़ी तीन कंपनियों के साथ भागीदारी के अलावा देश में सॉफ्टवेयर प्रो 4 लैपटॉप को जनवरी में भारत में उतारने का एलान भी किया।
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने यहां कहा, "कंप्यूटिंग ही भविष्य है और इसके लिए क्लाउिडंग और मोबिलिटी को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। माइक्रोसॉफ्ट में हम प्रत्येक भारतीय, प्रत्येक बिजनेस और सरकारी संगठनों को ज्यादा कुशलता पूर्वक काम करने का मंच उपलब्ध कराना चाहते हैं। माइक्रोसॉफ्ट क्लाउड और सरफेस प्रो 4 लोगों व सरकार के इन लक्ष्यों को पाने में मदद करेगा।"
ई-कॉमर्स कंपनियों से भी किया करार 
नडेला ने ई-कॉमर्स की तीन कंपनियों जस्ट डायल, पेटीएम और स्नैपडील के साथ भागीदारी की भी घोषणा की। तीनों ही कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट उत्पादों और क्लाउड सेवाओं का इस्तेमाल करेंगी। वर्ष 2020 तक देश में ई-कॉमर्सकारोबार 100 अरब डालर का हो जाएगा।
फ्यूचर अनलीश्ड के नाम से माइक्रोसॉफ्ट के एक कार्यक्रम में नडेला ने कहा छोटे बड़े सभी उद्यमी अपने कारोबार के विस्तार के लिए क्लाउड का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सरकार की स्मार्ट सिटी परिकल्पना को साकार करने में भी क्लाउडिंग अहम भूमिका निभाएगी। शहरों से जुड़ी समस्याओं के निदान तलाशने के लिए स्थानीय स्तर पर स्टार्ट अप्स को प्रोत्साहित करने का निर्णय भी इसीलिए लिया गया है। इसके लिए जो स्टार्ट अप माइक्रोसॉफ्ट के अजूर कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें कंपनी 80 लाख रुपये तक की मदद उपलब्ध कराएगी। इस कार्यक्रम में आनंद महिंद्रा, एक्सिस बैंक की शिखा शर्मा और टाटा स्टारबक्स केसीईओ अवनी दवडा समेत भारतीय उद्योग जगत की कई हस्तियां मौजूद थीं।
जनवरी में आएगा सरफेस प्रो
नडेला ने माइक्रोसॉफ्ट के दो फ्लैगशिप उत्पाद सरफेस प्रो 4 और माइक्रोसॉफ्ट लूमिया 950 एक्सएल को भी भारत में लांच करने का एलान किया। सरफेस प्रो 4 हाइब्रिड लैपटॉप है। इसे लैपटॉप के साथ साथ टैबलेट के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी इसे जनवरी में घरेलू बाजार में उतारेगी। सरफेस प्रो 4 इस सीरीज का पहला उत्पाद है, जो भारतीय बाजार में मिलेगा।
लूमिया एक्सएल अगले माह 
इसके अलावा 5.7 इंच की स्क्रीन वाला स्मार्टफोन माइक्रोसॉफ्ट 950 एक्सएल भी दिसंबर से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। लुमिया 950 भी मिलने लगेगा। दोनों ही विंडोज फोन हैं। इस सीरीज के कई उत्पाद बाजार में पहले से उपलब्ध हैं। दोनों ही में कैमरा 20 मेगापिक्सल का है और स्टोरेज क्षमता 32 जीबी है।
गांधी जी ने छोटे स्तर पर चीजों को करने को तवज्जो दी थी। वह टेक्नोलॉजी की दुनिया के लिए सही रोल मॉडल हैं। लेकिन माइक्रोसॉफ्ट जिस तरह के कदम उठा रही है, उससे नडेला के सामने मौका है कि वह डिजिटल दुनिया के नए गांधी बन सकते हैं।

"सरकार जनोपयगी सेवाओं को क्लाउड पर ले जाने के लिए तैयार है। इस बारे में बात हो रही है। इसमें डेटा सेफ्टी अहम बात रहेगी। उन्होंने सत्या नडेला को भरोसा दिलाया कि भारत में लोग किसी नई टेक्नोलॉजी को थोड़ा इंतजार कर परखते हैं, मगर इसके बाद इस्तेमाल में वे पीछे नहीं रहते।"

Wednesday, November 4, 2015

चेक लौटा दिया कि खाते में पर्याप्त राशि नहीं- 35,000 रुपए का हर्जाना

अपने कर्मचारी की लापरवाही की यहां के यूनियन बैंक को कीमत चुकाना पड़ी। बैंक ने खाते में फंड होने के बावजूद अपने एक ग्राहक का चेक लौटा दिया था। ग्राहक ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की, जहां ग्राहक को 35,000 रुपए का हर्जाना भरने का आदेश दिया गया।
लालबाग निवासी लालचंद जैन ने 26 मार्च 2014 को अपने एक लेनदार को 72,000 रुपए का चेक दिया था। 29 मार्च को बैंक ने यह कहते हुए चेक लौटा दिया कि खाते में पर्याप्त राशि नहीं है। जैन का कहना है कि उनके बचत खाते में चेक क्लियर होने जितनी राशि थी, फिर भी चेक बाउंस कर दिया गया और 150 रुपए वसूल लिए गए।
बकौल जैन, चेक बाउंस होने के बाद जिस शख्स को राशि देना थी, उसने मुझे परेशान किया, गालियां भी दीं। इस पर जैन ने बैंक को चिट्ठी लिखी और सफाई मांगी। 20 जून को लिखी गई चिट्ठी का 8 अगस्त को जवाब आया, जिसमें हास्यास्पद कारण बताए गए।

अपनी मानसिक परेशानी से एवज में उन्होंने मुआवजे की मांग करते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। जिस पर अब यह फैसला आया।

Friday, October 30, 2015

कॉल रेट बढ़ने की आशंका

दूरसंचार नियामक ट्राई ने कॉल ड्रॉप की समस्या से निपटने के लिए नया तरीका निकाला है। ट्राई ने फैसला लिया है कि वह ऐसे मोबाइल ऑपरेटरों के नाम सार्वजनिक तौर पर उजागर करेगी, जिनकी सेवाओं में सुधार देखने को नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं, ट्राई ने सभी मोबाइल ऑपरेटरों से कॉल ड्रॉप पर हर्जाना चुकाने के लिए भी तैयार रहने को कहा है।
दूरसंचार नियामक ट्राई ने कंपनियों के दबाव को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि कॉल ड्रॉप पर ग्राहक को हर्जाना देने का घोषित नियम लागू होगा। मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनियों को हर्जाना देने की प्रणाली पहली जनवरी, 2016 तक तैयार रखने को कहा गया है। ट्राई ने दूरसंचार कंपनियों द्वारा उठाए गए मसलों पर गौर करने की बात कही है।
ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने कहा, 'मैंने यह बिल्कुल साफ कर दिया है। यह वैध नियमन है। सक्षम प्राधिकार द्वारा न तो इसे पलटा गया है, न ही संशोधित किया गया है या रद्द किया गया है। कंपनियों को इसे लागू करने के लिए खुद को तैयार करने को लेकर पक्के तौर पर कदम उठाना चाहिए।'
ट्राई कॉल ड्रॉप हर्जाना नियमों के क्रियान्वयन और सेवा सुधारने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर टेलिकॉम ऑपरेटर्स के साथ पहले ही बैठक कर चुका है। दिशानिर्देश के अनुसार दूरसंचार कंपनियों को उनके नेटवर्क में समस्या के कारण हरेक कॉल ड्रॉप के लिए एक रुपए का हर्जाना ग्राहकों को देना होगा। यह हर्जाना अधिकतम तीन रुपया रोजाना होगा।
ट्राई ने देश भर में कॉल ड्रॉप की बढ़ती समस्या को लेकर कई बार चिंता जताई थी। ट्राई ने फैसला लिया है कि अब वह खराब सेवा देने वाले मोबाइल ऑपरेटरों के नाम उजागर करेगी, इसके अलावा जिन इलाकों में यह समस्या सबसे अधिक है, उसके बारे में भी पूरी जानकारी दी जाएगी।
ट्राई के मुताबिक यह योजना अभी देश के कुछ ही हिस्सों में लागू होगी, बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से सभी शहरों में लागू किया जाएगा। यह जानकारी उपभोक्ताओं को एक नई वेबसाइट के जरिए दी जाएगी, इस साइट का लिंक ट्राई की वेबसाइट पर शेयर किया जाएगा।
कंपनियों ने उठाए सवाल
दूरसंचार कंपनियों ने इस तरह के नियम बनाने को लेकर ट्राई के अधिकारक्षेत्र और इसे लागू करने में तकनीकी व्यवहारिकता को लेकर सवाल उठाए हैं। शर्मा ने कहा, 'ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि प्राधिकरण ने तकनीकी व्यवहार्यता पर विचार किए बिना यह नियम लागू कर दिया। नियमन जारी करने से पहले प्राधिकरण ने तकनीकी व्यवहार्यता समेत मामले से संबद्ध सभी पहलुओं पर गौर किया।
कॉल रेट बढ़ने की आशंका
मोबाइल ऑपरेटरों के संगठन सीओएआई और एयूएसपीआई जैसे उद्योग संगठनों ने ट्राई को पत्र लिखकर कहा है कि ये नियम लागू होने से मोबाइल कॉल की दरें बढ़ेंगी। शर्मा ने कहा, 'उद्योग संगठन फैसले की समीक्षा चाहते हैं। पहले तो हमें इस बात का कानूनी रूप से जांच करना होगा कि क्या ट्राई निर्णय की समीक्षा कर सकता है या नहीं। उसके बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसले से दो हफ्ते के भीतर दूरसंचार कंपनियों को अवगत करा दिया जाएगा।
दिग्गजों के साथ बैठक
बैठक में भारती एयरटेल के प्रबंध निदेशक व सीईओ गोपाल विट्टल, वोडाफोन इंडिया के प्रबंध निदेशक व सीईओ सुनील सूद, आइडिया सेल्यूलर के प्रबंध निदेशक व सीईओ हिमांशु कपानिया, रिलायंस जियो इंफोकॉम के प्रबंध निदेशक संजय मशरुवाला और एमटीएनएल के निदेशक सुनील कुमार शामिल हुए।

सीओएआई के महानिदेशक राजन एस. मैथ्यूज, एयूएसपीआई के महासचिव अशोक सूद और अन्य दूरसंचार कंपनियों के प्रतिनिधि भी बैठक में शरीक थे।

Wednesday, October 28, 2015

विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की शादी- अगले वर्ष की शुरुआत में

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की शादी की अटकलें पिछले वर्ष कम से कम दो बार सामने आई, लेकिन विश्वस्त सूत्रों के अनुसार ये दोनों अगले वर्ष की शुरुआत में शादी कर सकते हैं।
इन लवबर्ड्‍स ने पिछले दिनों यहां एक रेस्टॉरेंट में लंच किया था, उस वक्त अनुष्का के पिता भी इनके साथ थे। सोमवार रात को विराट को इस अभि‍नेत्री के वरसोवा स्थित घर से सफेद मर्सिडीज कार में निकलते हुए देखा गया।
सूत्रों के अनुसार विराट अनुष्का के परिजनों से लगातार मुलाकात कर रहे हैं, जो इस बात को दर्शाता है कि यह कपल अपने संबंधों को लेकर गंभीर है। विराट का इस अभिनेत्री के पिता से अच्छा तालमेल बन गया है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में विराट के परिजनों ने अनुष्का के ‍घरवालों से मुलाकात की थी, उस वक्त इनकी शादी की अटकलें चल पड़ी थी। वास्तव में देखा जाए तो इस वाकये के दो महीने जब टीम इंडिया के इंग्लैंड दौरे के वक्त बीसीसीआई ने अनुष्का को विराट के साथ टीम होटल में रूकने की अनुमति दे दी थी। उस वक्त यह कहा गया था कि ये दोनों शीघ्र ही शादी करने वाले हैं। वैसे उस वक्त अनुष्का के प्रतिनिधि ने शादी की खबरों से इंकार किया था।

वैसे कुछ दिनों पूर्व मीडिया में यह खबर आई थी कि शादी की बात को लेकर विराट और अनुष्का के संबंधों में दरार आ गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इनके परिजन कुछ दिनों में मुलाकात कर शादी की डेट फिक्स करने वाले है। पूरी संभावना है कि यह शादी अगले वर्ष की शुरुआत में हो जाएगी।

Thursday, October 15, 2015

व्यावसायिक सरोगेसी पर SC ने दी सरकार को बैन की सलाह

सरोगेसी टूरिज्म के लिए भारत विदेशियों के लिए पसंदीदा जगह बन चुका है और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने की सलाह देते हुए मानव भ्रूण के आयात की अनुमति देने संबंधी नीति की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस रंजन गोगोई व एनवी वर्मा के बेंच ने कहा कि सरोगेसी से संबेधित कई मुद्दे किसी कानून के अंतर्गत नहीं आते और सरकार को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ एक कानून लाना होगा। 2013 में केंद्र ने एक अधिसूचना दायर की थी जिसमें विदेशी जोड़ों के लिए कृत्रिम प्रजनन के जरिये मानव भ्रूणों के आयात को मंजूरी दी थी।
बेंच ने कहा, 'भारत में व्यावसायिक सरोगेसी को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन फिर भी ऐसा हो रहा है। आप मानव भ्रूण के व्यापार को अनुमति दे रहे हैं। यह वास्तव में एक बिजनेस है। भारत में सरोगेसी टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है।' हालांकि, सरकार द्वारा यह कहने पर कि वह इस मसले को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही सरोगेसी बिल लाने पर काम कर रही है, अदालत ने अधिसूचना पर कोई स्टे नहीं दिया।

सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहाकि मसले पर सलाह-मशविरा चालू है और कुछ माह में ही संसद में बिल को पेश किया जाएगा।

Friday, October 9, 2015

12 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा

बिहार व त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल देवानंद कोंवर की बेटी नंदिता कोंवर को असम पुलिस की विजिलेंस व भ्रष्टाचार रोधी विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा है। राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी नंदिता कोंवर को एक ठेकेदार से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है।
विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधी विभाग के एसपी बिनॉय कलिता ने बताया कि कामरूप जिले में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) की प्रोजेक्ट डायरेक्टर नंदिता कोंवर ने दुर्गा सरोवर क्षेत्र में बन रही एक सड़क का बिल पास करवाने के लिए ठेकेदार से बिल का 10 फीसद रिश्वत के तौर पर मांगा था।
हालांकि, विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधी विभाग द्वारा गिरफ्तार की गई नंदिता ने इसे अपने खिलाफ एक राजनीतिक साजिश बताया है। नंदिता का कहना है कि गुवाहाटी के सांसद ने उन्हें राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया है।

दूसरी तरफ, एसपी कलिता ने बताया कि ठेकेदार ने उनके पास नंदिता कोंवर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। गुरुवार की सुबह विभाग के अधिकारियों ने जाल बिछाया और नंदिता कोंवर को रिश्वत के पैसे लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया।

Tuesday, October 6, 2015

महिला को दो साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी

फ्लैट पर कब्जा पाने के लिए मुंबई की एक महिला को दो साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट में उसने अपनी लड़ाई जीती।
अचल संपत्ति सलाहकार आरती गुनजिकर ने ग्रेटर बंबई सहकारी बैंक द्वारा 22 अक्टूबर, 2013 को आयोजित की गई सार्वजनिक नीलामी में सबसे ज्यादा बोली लगाकर एक गार्डन वियू सोसाइटी, माहिम में 2बीएचके फ्लैट खरीदा था। इसके लिए उसने उप जिला रजिस्टार को स्टांप शुल्क पंजीकरण, रखरखाव और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के रूप में 1,15,62,500 रुपये का भुगतान किया था।

इसके बावजूद उसे फ्लैट पर कब्जा नहीं मिला तो उसने स्थानीय अदालत की शरण ली। बाद में वहां से यह मामला हाईकोर्ट में चला गया। आखिर में यह मसला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने आरती के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद आरती को फ्लैट पर कब्जा मिला।

Monday, September 21, 2015

हिंदी भाषा और उसकी लिपि में कोई अंतर नहीं

'हिंदी का महत्व बनाम अंग्रेजी' हमारे समाज की एक स्थायी बहस है। बड़े पैमाने पर देखें तो इसका विस्तार 'कोई भी देसी भाषा बनाम अंग्रेजी' की बहस तक किया जा सकता है, साथ में यह पुछल्ला भी जोड़ा जा सकता है कि किस तरह अंग्रेजी स्थानीय भाषाओं को खत्म करती जा रही है। यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मसला है। हर सरकार खुद को अन्य किसी भी सरकार से ज्यादा हिंदी हितैषी साबित करने पर आमादा है। इसी का नतीजा है कि बीच-बीच में आपको हिंदी उन्नयन अभियानों के दर्शन होते रहते हैं। इसके तहत सरकारी दफ्तर अनिवार्य रूप से अपने सारे सर्कुलर हिंदी में जारी करते हैं और ज्यादातर सरकारी स्कूल हिंदी मीडियम में ही डटे रहते हैं।

इस बीच अंग्रेजी बिना किसी उन्नयन अभियान के ही अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ती जा रही है। वजह यह कि अंग्रेजी लोगों को बेहतर करियर की उम्मीद बंधाती है। इससे समाज में उनका रुतबा बढ़ता है। सूचना और मनोरंजन की एक बिल्कुल नई दुनिया उनके सामने खुल जाती है, और टेक्नॉलजी तक पहुंच भी बढ़ती है। हकीकत यही है कि अंग्रेजी की सामान्य जानकारी के बिना आप आज एक मोबाइल फोन या बेसिक मेसेजिंग ऐप्स का भी इस्तेमाल नहीं कर सकते।
हिंदी प्रेमियों का दुख-
बहुत से हिंदी प्रेमी और शुद्धतावादी आज के नए समाज से दुखी हैं, जहां युवा अपनी मातृभाषा को दरकिनार कर जल्द से जल्द अंग्रेजी की दुनिया में जाने को आतुर हैं। लेकिन हिंदी थोपने की जितनी कोशिश वे करते हैं, युवा उससे कहीं ज्यादा विरोध करते हैं। ऐसे में एक हिंदी प्रेमी (इसमें मैं भी शामिल हूं) क्या करे? और बाकी तमाम लोग ऐसा क्या करें कि हिंदी एक बोझ या बाध्यता न लगे? इसका समाधान यह है कि रोमन हिंदी अपनाई जाए। रोमन हिंदी हिंगलिश नहीं है। यह देवनागरी की बजाय ऐंग्लो-सैक्सन लिपि में लिखी हुई हिंदी भाषा है। उदाहरण के लिए 'आप कैसे हैं' को इस तरह लिखा जाए: 'aap kaise hain?'
ऐसा करना जरूरी क्यों है? ऐंग्लो सैक्सन लिपि व्यापक प्रचलन में है। यह कंप्यूटर के कीबोर्ड और मोबाइल की टच स्क्रीन में इस्तेमाल की जाती है। यह काफी लोकप्रिय है, खासकर युवाओं में। आज करोड़ों भारतीय व्हाट्सऐप का प्रयोग करते हैं, जहां तकरीबन सारी बातचीत हिंदी में होती है, लेकिन इसकी लिपि रोमन हुआ करती है। जी हां, देवनागरी लिपि डाउनलोड करने की सुविधा भी है, पर शायद ही कोई उसे प्रयोग में लाता हो। कई देवनागरी कीबोर्ड फोन में लिप्यांतरण करते हैं। यानी आप पहले रोमन में हिंदी टाइप करते हैं, फिर एक सॉफ्टवेयर उसका हिंदी टेक्स्ट तैयार करता है। जाहिर है, यूजर मूल रूप से रोमन हिंदी का ही इस्तेमाल कर रहा है।
रोमन हिंदी बॉलिवुड के पोस्टरों और विज्ञापनों में पहले ही प्रचलित हो चुकी है। ज्यादातर हिंदी फिल्मों के स्क्रीनप्ले रोमन हिंदी में लिखे जा रहे हैं। किसी भी बड़े शहर में घूमने निकलिए, यह मुमकिन नहीं कि रोमन लिपि में लिखे हिंदी कैप्शनों वाली होर्डिंग्स न दिखें। मगर, हिंदी के विद्वान, परंपरावादी और इसे बचाने की मुहिम में लगे लोग या तो इन बातों से अनजान हैं या बिल्कुल उदासीन। वे हिंदी भाषा और उसकी लिपि में कोई अंतर नहीं समझते। लोग आज भी हिंदी से प्यार करते हैं। बस आज की टेक्नॉलजी-आधारित जिंदगी में उस लिपि को शामिल करना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
रोमन लिपि को अपनाकर हम हिंदी को बचा सकते हैं। देश की एकता के लिहाज से भी यह बड़ा कदम होगा क्योंकि इससे हिंदी और अंग्रेजी बोलने वाले एक-दूसरे के करीब आएंगे। तय है कि हिंदी के शुद्धतावादी यह सुझाव पसंद नहीं करेंगे। वे हिंदी को बिल्कुल उसी रूप में बनाए रखना चाहते हैं जैसी कि यह थी। मगर, वे भूल जाते हैं कि भाषा वक्त के साथ विकसित होती है। और आज वैश्वीकरण के दौर में अगर हिंदी एक ग्लोबल स्क्रिप्ट अपनाती है तो यह उसके लिए कई तरह से फायदेमंद होगा। इससे दुनिया भर में बहुत सारे लोग हिंदी सीखने को प्रोत्साहित होंगे। कई उर्दू शायर अपनी रचनाएं पारंपरिक उर्दू के बजाय देवनागरी में प्रकाशित कराते रहे हैं। ऐसा वे बड़े स्तर पर अपनी पहुंच बनाने के लिए किया करते हैं। लेकिन यह बीते वक्त की बात हो चुकी है। आज के समय की मांग यह है कि हिंदी को एक नए रूप में अपडेट किया जाए। इसकी शुरुआत हम सरकारी सूचनाओं और सार्वजनिक संकेतों को रोमन हिंदी में लाकर कर सकते हैं, ताकि लोगों में इसकी प्रतिक्रिया देखी जा सके।

किनारे पड़ने का खतरा-

संभावना यह भी है कि रोमन हिंदी प्रिंट मीडिया और किताबों के लिए एक नया उद्योग ही खड़ा कर दे। लाखों लोग इसका इस्तेमाल पहले से करते आ रहे हैं लेकिन अब तक किसी ने इसकी नई संभावनाओं के बारे में सोचा नहीं था। वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य लिपि हिंदी भाषा के लिए भी उम्दा साबित होगी। ऐसा न हुआ तो हिंदी के लिए, अंग्रेजी के हमले के चलते किनारे पड़ जाने का खतरा बना हुआ है। दरअसल, एक भाषा को हमें शुद्धता के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उसे समय के साथ चलना और विकसित होना होगा। waqt ke sath badalna zaroori hai. मतलब आप समझ ही गए होंगे।

Tuesday, September 15, 2015

2020 तक पहली स्वचालित कार सड़कों पर

वैज्ञानिकों का दावा है कि 2020 तक पहली स्वचालित कार सड़कों पर दिखने लगेगी। इसका मतलब यह कि कार चलाते समय चालक को उसे संभालना जरूरी नहीं होगा। उस दौरान वह अपना ईमेल, फोन या कोई अन्य काम कर सकेगा। हालांकि बीच में ऐसा समय भी आ सकता है जब कार का स्वचालित यंत्र चालक को उसे संभालने का संदेश दे, जिसके बाद चालक को मुस्तैद होना पड़ेगा।
बीएमडब्ल्यू की शुरुआत
जर्मनी की बीएमडब्ल्यू में चालक रहित कार के प्रोटोटाइप पर काम चल रहा है। यह गाड़ी भारी ट्रैफिक में खुद ही लेन बदलती है और 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक जा पहुंचती है। वैसे सड़क की जटिलताओं के लिए ड्राइवर को भी सक्रिय रहना पड़ता है। यह कार रेडार सेंसरों से लैस है, जो सड़क पर इसकी मदद करते हैं।
प्रोटोटाइप पर काम करने वाले माइकल एबरहर्ड के अनुसार इसकी बड़ी चुनौती रफ्तार को 130 किमी प्रतिघंटा से शून्य पर लाने की है। इसके लिए 80 से 100 मीटर पर ही ब्रेक लगनी शुरू हो जानी चाहिए, जिसका अंदाजा कार का सेंसर लगाएगा। हालांकि इतनी रफ्तार पर सेंसरों के लिए यह चुनौती होगी। खास बात यह है कि चालकरहित कारों के अब तक के परीक्षणों में कोई दुर्घटना नहीं हुई है।
अन्य कंपनियां भी दौड़ में
चालकरहित कारों के निर्माण में मर्सिडीज और गूगल भी दौड़ में हैं। एबरहर्ड के अनुसार हमारी अधिकांश ड्राइविंग नीरस होती है। घर से दफ्तर के बीच कई धक्के पड़ते हैं। इसलिए लोग इस बीच कुछ आराम भी चाहते हैं। उनके अनुसार लगातार बदलते रास्तों से जूझने का काम सेंसर करते हैं। गूगल इस दिशा में खासा सक्रिय है।
गूगल द्वारा जिन विशेषताओं पर काम किया जा रहा है उनमें सड़कों पर चलने वाली दूसरी गाड़ियों का पूर्वानुमान लगाना भी होगा। मसलन, किसी साइकिल सवार का अपनी लेन से भटकना या आगे चल रही गाड़ी का अचानक यू-टर्न लेना।
यही नहीं, खड़ी गाड़ियों में बैठे लोगों द्वारा अचानक दरवाजा खोलने का अंदाजा भी नए सेंसर लगाएंगे। चालकरहित कारों में यह विशेषताएं जोड़ने के लिए गूगल के इंजीनियर प्रयास कर रहे हैं। गूगल की "बबल कार" का ऐसी ही अजीबोगरीब परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है।
विशेषज्ञों के विचार
गूगल के सह-संस्थापक सर्जेइ ब्रिन के अनुसार वह इन तकनीकों की मदद से बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर इसे अमल में लाने में समय लगेगा। बीएमडब्ल्यू, टोयोटा, मर्सिडीज और वोल्वो के विशेषज्ञ भी यह भलीभांति जानते हैं। गूगल की सोच है कि ड्राइविंग में गलतियां करने वाले लोगों को उससे छुटकारा मिलना चाहिए, जिसके लिए बड़े परिवर्तन ही सफल होंगे।
गूगल के अनुसार अन्य चीजों की तरह अब कारों को भी डाटा आधारित होना चाहिए। गूगल ने विशेषज्ञों की बजाय अपने कर्मचारियों को चालकरहित कारों के परीक्षण में इस्तेमाल किया है, जिसके सकारात्मक नतीजे निकले। फिर भी चालकरहित कारों की तकनीक पर आंखें मूंद कर यकीन करने पर गूगल आगाह करता है।
आगे की बात
चालकरहित कारों के विशेषज्ञ अब इसके तकनीकी पक्ष की बजाय, बिक्री के पक्ष पर सोचने लगे हैं। एबरहर्ड के अनुसार ऑटोमोबाइल उद्योग के हर परिवर्तन को कुछ झिझक के बाद ही सही, पर अपना लिया जाता है। तो क्या ऐसे वाहनों में दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी क्या चालक की होगी ? एबरहर्ड के अनुसार अब वह दिन भी दूर नहीं जब कारों में भी हवाई जहाजों की तरह ब्लैक बॉक्स होगा, जिसके डाटा से सब पता चलेगा।

एबरहर्ड के अनुसार, वह सिर्फ इतनी ही उम्मीद करते हैं कि स्वचालित गाड़ियों में चालक इतना मसरूफ कभी न हो कि चलती गाड़ी से उसका ध्यान ही हट जाए।

Monday, September 7, 2015

दिल्‍ली की सड़कों के मौजूदा और पुराने नामों की जानकारी

देश के पूर्व राष्‍ट्रपति दिवंगत डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम के सम्‍मान में देश की राजधानी दिल्‍ली की एक सड़क का नाम बदल दिया गया है।
डॉ. कलाम के देहांत के बाद औरंगजेब रोड का नाम बदलकर डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम रोड रख दिया गया है। इस परिवर्तन को लेकर थोड़ी राजनीति भी हुई थी।
लेकिन पूर्वी दिल्‍ली से भाजपा सांसद महेश गिरी की मांग को लागू कर दिया गया है। गौरतलब है कि एक जमाने में इसी क्षेत्र में पाकिस्‍तान के संस्‍थापक मुहम्‍मद अली जिन्‍ना का घर भी था।
औरंगजेब रोड पहली ऐसी सड़क नहीं है, जिसका नाम बदला गया है। दिल्‍ली में ऐसी सड़कों की काफी लंबी लिस्‍ट है, जिनका नाम बदला जा चुका है।
आइए, आपको दिल्‍ली की ऐसी ही सड़कों के मौजूदा और पुराने नामों की जानकारी देते हैं:
मध्‍य दिल्‍ली
डॉ. बिशंभर दास मार्ग
पुराना नाम : एलेन्‍बी रोड
प्रथम विश्‍व युद्ध के दौरान ब्रिटिश फील्‍ड मार्शल रहे एडमंड एलेन्‍बी के नाम पर इस सड़क का नाम रखा गया था। लेकिन आजादी इस सड़क का नाम पंजाब के होम्‍योपैथ डॉक्‍टर बिशंभर दास के नाम पर कर दिया गया है। डॉ. दास ने होम्‍योपैथी को पूरे देश में पहुंचाया था।
तीन जनवरी मार्ग
पुराना नाम : अल्‍बुकर्क रोड
राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की हत्‍या इसी बंगले के परिसर में हुई थी। हत्‍या की तारीख के नाम पर इस सड़क का नामकरण किया गया था। पूर्व में इस सड़क का नाम गोवा में पुर्तगाली गवर्नर अफोन्‍सो दे अल्‍बुकर्क के नाम पर था।
बंगला साहिब मार्ग
पुराना नाम : बायर्ड रोड
मैसूर के शासक टीपू सुलतान को श्रीरंगपटनम की लड़ाई (4 मई 1799) में हराने के बाद जनरल डेविड बायर्ड ने ही उनका शव खोजा था। उनके नाम पर अंग्रेजों ने दिल्‍ली में एक सड़क का नाम रखा था। लेकिन विख्‍यात गुरुद्वारे की वजह से इसका नाम बदल दिया गया।
सुब्रमण्‍य भारती मार्ग
पुराना नाम : कॉर्नवालिस रोड
खान मार्केट के सामने की इस सड़क का नाम ब्रिटिश गवर्नर जनरल के नाम पर था। आजादी के इस इस सड़क का नाम 20वीं शताब्‍दी के सुविख्‍यात तमिल कवि के नाम पर रख दिया गया।
राजाजी मार्ग
पुराना नाम : किंग जॉर्ज एवेन्‍यू
ब्रिटिश शासक को खुश करने के लिए अंग्रेजों ने इस सड़क का नाम किंग जॉर्ज एवेन्‍यू रख दिया था। जिसे बाद में भारत के अंतिम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर राजाजी मार्ग कर दिया गया था।
अमृता शेरगिल मार्ग
पुराना नाम : रेटेन्‍डन रोड
लोधी गार्डन (पुराना नाम : लेडी विलिंग्‍डन पार्क) के बगल की इस सड़क का नाम लेडी विलिंग्‍डन के बेटे रेटेन्‍डन के नाम पर रखा गया था। बाद में इस सड़क का नाम अमृता शेरगिल मार्ग कर दिया गया था।
जवाहर लाल नेहरू मार्ग
पुराना नाम : सर्कुलर रोड
नई दिल्‍ली के कनॉट प्‍लेस और पुरानी दिल्‍ली के तुर्कमान गेट के पास की इस सड़क का नाम देश के पहले प्रधानमंत्री के नाम पर रखा गया है। रामलीला मैदान भी इसी के पास है।
त्‍यागराज मार्ग
पुराना नाम : क्‍लाइव रोड
बंगाल के प्रशासक रॉबर्ट क्‍लाइव के नाम पर इस सड़क को नाम दिया गया था। बाद में इसे 18वीं शती के ख्‍यात संगीतज्ञ त्‍यागराज के नाम कर दिया गया।
बलवंत राय मेहता लेन
पुराना नाम : कर्जन लेन
गुजरात के दूसरे मुख्‍यमंत्री के नाम पर इस सड़क का मौजूदा नाम रखा गया है। इससे पहले बंगाल विभाजन के जिम्‍मेदार ब्रिटिश वायसरॉय के नाम से इसे जाना जाता था।
कस्‍तूरबा गांधी मार्ग
पुराना नाम : कर्जन रोड
इस सड़क पर ब्रिटिश काउंसिल, अमेरिकन सेंटर और मैक्‍समूलर भवन हैं। अब इसे महात्‍मा गांधी की पत्‍नी के नाम से जाना जाता है।
बहादुरशाह जफर मार्ग
पुराना नाम : मथुरा रोड
आखिरी मुगल सम्राट के नाम से इस सड़क को जाना जाता है। जफर को उनके ही बेटे ने राज्‍य से निर्वासित कर दिया था। इस रोड पर देश के नामी अखबारों के दफ्तर हैं1
तिलक मार्ग
पुराना नाम : हार्डिंग एवेन्‍यू
आजादी के बाद देश के पहले कानून मंत्री और दलित नेता बीआर अंबेडकर यहां रहा करते थे। हालांकि सड़क का नाम स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी बाल गंगाधर तिलक के नाम पर रखा गया है।
काली बाड़ी मार्ग
पुराना नाम : हैवलॉक रोड
इस सड़क को ब्रिटिश जनरल हेनरी हैवलॉक का नाम दिया गया था। हैवलॉक ने 1857 के विद्रोह के बाद कानपुर को दोबारा ब्रिटिश शासन के अधीन किया था। 1930 में इस क्षेत्र में काली माता का मंदिर बनाया गया था, और उसी आधार पर मौजूदा नाम दिया गया है।
बाबा खड़गसिंह मार्ग
पुराना नाम : इरविन रोड
इरविन ब्रिटिश अधिकारी और वायसरॉय थे, वहीं खड़गसिंह, आजादी के सिपाही थे। इसी रोड पर स्‍टेट एम्‍पोरियम्‍स और हनुमान मंदिर भी है।
टॉलस्‍टॉय मार्ग
पुराना नाम : कीलिंग रोड
मौलाना आजाद रोड
पुराना नाम : किंग एडवर्ड रोड
राजपथ
पुराना नाम : किंग्‍स वे
सरदार पटेल मार्ग
पुराना नाम : किचेनर रोड
विवेकानंद मार्ग
पुराना नाम : मिंटो रोड
रफी मार्ग
पुराना नाम : ओल्‍ड मिल रोड
जनपथ
पुराना नाम : क्‍वींस वे
श्रीमंत माधवराव सिंधिया मार्ग
पुराना नाम : कैनिंग रोड
मंदिर मार्ग
पुराना नाम : रीडिंग रोड
तीन मूर्ति मार्ग
पुराना नाम : रॉबर्ट्स रोड
उत्‍तरी दिल्‍ली
शामनाथ मार्ग
पुराना नाम : अलीपुर रोड
रानी झांसी रोड
पुराना नाम : म्‍यूटिनी मेमोरियल रोड
विश्‍वविद्यालय मार्ग
पुराना नाम : सर्किट हाउस रोड
राजनिवास मार्ग
पुराना नाम : लड्लो कैसल रोड
पुरानी दिल्‍ली
अंसारी रोड
पुराना नाम : दरियागंज रोड
नेताजी सुभाष मार्ग
पुराना नाम : एल्गिन रोड
स्‍वामी श्रद्धानंद मार्ग
पुराना नाम : गार्सटिन बैसन रोड
जानी-पहचानी सड़कें
वो सड़कें जिनका नाम नहीं बदला गया है और आज भी पुराने नाम ही यहां की पहचान बने हुए हैं:
·         कनॉट लेन
·         रेस कोर्स रोड
·         डलहौजी रोड
·         चेम्‍सफोर्ड रोड

·         लोधी रोड