वैज्ञानिकों का दावा है कि 2020 तक पहली स्वचालित कार
सड़कों पर दिखने लगेगी। इसका मतलब यह कि कार चलाते समय चालक को उसे संभालना जरूरी
नहीं होगा। उस दौरान वह अपना ईमेल, फोन या कोई अन्य काम कर
सकेगा। हालांकि बीच में ऐसा समय भी आ सकता है जब कार का स्वचालित यंत्र चालक को
उसे संभालने का संदेश दे, जिसके बाद चालक को मुस्तैद होना
पड़ेगा।
बीएमडब्ल्यू की शुरुआत
जर्मनी की बीएमडब्ल्यू में चालक रहित कार के प्रोटोटाइप पर काम चल रहा है।
यह गाड़ी भारी ट्रैफिक में खुद ही लेन बदलती है और 120 किमी प्रति घंटा की
रफ्तार तक जा पहुंचती है। वैसे सड़क की जटिलताओं के लिए ड्राइवर को भी सक्रिय रहना
पड़ता है। यह कार रेडार सेंसरों से लैस है, जो सड़क पर इसकी
मदद करते हैं।
प्रोटोटाइप पर काम करने वाले माइकल एबरहर्ड के अनुसार इसकी बड़ी चुनौती
रफ्तार को 130 किमी प्रतिघंटा से शून्य पर लाने की है। इसके लिए 80
से 100 मीटर पर ही ब्रेक लगनी शुरू हो जानी
चाहिए, जिसका अंदाजा कार का सेंसर लगाएगा। हालांकि इतनी
रफ्तार पर सेंसरों के लिए यह चुनौती होगी। खास बात यह है कि चालकरहित कारों के अब
तक के परीक्षणों में कोई दुर्घटना नहीं हुई है।
अन्य कंपनियां भी दौड़ में
चालकरहित कारों के निर्माण में मर्सिडीज और गूगल भी दौड़ में हैं। एबरहर्ड
के अनुसार हमारी अधिकांश ड्राइविंग नीरस होती है। घर से दफ्तर के बीच कई धक्के
पड़ते हैं। इसलिए लोग इस बीच कुछ आराम भी चाहते हैं। उनके अनुसार लगातार बदलते
रास्तों से जूझने का काम सेंसर करते हैं। गूगल इस दिशा में खासा सक्रिय है।
गूगल द्वारा जिन विशेषताओं पर काम किया जा रहा है उनमें सड़कों पर चलने वाली
दूसरी गाड़ियों का पूर्वानुमान लगाना भी होगा। मसलन, किसी साइकिल सवार का
अपनी लेन से भटकना या आगे चल रही गाड़ी का अचानक यू-टर्न लेना।
यही नहीं, खड़ी गाड़ियों में बैठे लोगों द्वारा अचानक दरवाजा खोलने का
अंदाजा भी नए सेंसर लगाएंगे। चालकरहित कारों में यह विशेषताएं जोड़ने के लिए गूगल
के इंजीनियर प्रयास कर रहे हैं। गूगल की "बबल कार" का ऐसी ही अजीबोगरीब
परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है।
विशेषज्ञों के विचार
गूगल के सह-संस्थापक सर्जेइ ब्रिन के अनुसार वह इन तकनीकों की मदद से बड़ा
बदलाव लाना चाहते हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर इसे अमल में लाने में समय लगेगा।
बीएमडब्ल्यू, टोयोटा, मर्सिडीज और वोल्वो के
विशेषज्ञ भी यह भलीभांति जानते हैं। गूगल की सोच है कि ड्राइविंग में गलतियां करने
वाले लोगों को उससे छुटकारा मिलना चाहिए, जिसके लिए बड़े
परिवर्तन ही सफल होंगे।
गूगल के अनुसार अन्य चीजों की तरह अब कारों को भी डाटा आधारित होना चाहिए।
गूगल ने विशेषज्ञों की बजाय अपने कर्मचारियों को चालकरहित कारों के परीक्षण में
इस्तेमाल किया है, जिसके सकारात्मक नतीजे निकले। फिर भी चालकरहित कारों की
तकनीक पर आंखें मूंद कर यकीन करने पर गूगल आगाह करता है।
आगे की बात
चालकरहित कारों के विशेषज्ञ अब इसके तकनीकी पक्ष की बजाय, बिक्री
के पक्ष पर सोचने लगे हैं। एबरहर्ड के अनुसार ऑटोमोबाइल उद्योग के हर परिवर्तन को
कुछ झिझक के बाद ही सही, पर अपना लिया जाता है। तो क्या ऐसे
वाहनों में दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी क्या चालक की होगी ? एबरहर्ड के अनुसार अब वह दिन भी दूर नहीं जब कारों में भी हवाई जहाजों की
तरह ब्लैक बॉक्स होगा, जिसके डाटा से सब पता चलेगा।
एबरहर्ड के अनुसार, वह सिर्फ इतनी ही उम्मीद करते हैं कि स्वचालित गाड़ियों में
चालक इतना मसरूफ कभी न हो कि चलती गाड़ी से उसका ध्यान ही हट जाए।
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