सरोगेसी टूरिज्म के लिए भारत विदेशियों
के लिए पसंदीदा जगह बन चुका है और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताई है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने
की सलाह देते हुए मानव भ्रूण के आयात की अनुमति देने संबंधी नीति की दोबारा जांच
करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस रंजन गोगोई व एनवी वर्मा के बेंच
ने कहा कि सरोगेसी से संबेधित कई मुद्दे किसी कानून के अंतर्गत नहीं आते और सरकार
को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ एक कानून लाना होगा। 2013 में केंद्र ने एक
अधिसूचना दायर की थी जिसमें विदेशी जोड़ों के लिए कृत्रिम प्रजनन के जरिये मानव
भ्रूणों के आयात को मंजूरी दी थी।
बेंच ने कहा, 'भारत
में व्यावसायिक सरोगेसी को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन
फिर भी ऐसा हो रहा है। आप मानव भ्रूण के व्यापार को अनुमति दे रहे हैं। यह वास्तव
में एक बिजनेस है। भारत में सरोगेसी टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है।' हालांकि, सरकार द्वारा यह कहने पर कि वह इस मसले को
नियंत्रित करने के लिए जल्द ही सरोगेसी बिल लाने पर काम कर रही है, अदालत ने अधिसूचना पर कोई स्टे नहीं दिया।
सरकार की तरफ से
सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहाकि मसले पर सलाह-मशविरा चालू है और कुछ माह में
ही संसद में बिल को पेश किया जाएगा।

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