Friday, October 30, 2015

कॉल रेट बढ़ने की आशंका

दूरसंचार नियामक ट्राई ने कॉल ड्रॉप की समस्या से निपटने के लिए नया तरीका निकाला है। ट्राई ने फैसला लिया है कि वह ऐसे मोबाइल ऑपरेटरों के नाम सार्वजनिक तौर पर उजागर करेगी, जिनकी सेवाओं में सुधार देखने को नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं, ट्राई ने सभी मोबाइल ऑपरेटरों से कॉल ड्रॉप पर हर्जाना चुकाने के लिए भी तैयार रहने को कहा है।
दूरसंचार नियामक ट्राई ने कंपनियों के दबाव को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि कॉल ड्रॉप पर ग्राहक को हर्जाना देने का घोषित नियम लागू होगा। मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनियों को हर्जाना देने की प्रणाली पहली जनवरी, 2016 तक तैयार रखने को कहा गया है। ट्राई ने दूरसंचार कंपनियों द्वारा उठाए गए मसलों पर गौर करने की बात कही है।
ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने कहा, 'मैंने यह बिल्कुल साफ कर दिया है। यह वैध नियमन है। सक्षम प्राधिकार द्वारा न तो इसे पलटा गया है, न ही संशोधित किया गया है या रद्द किया गया है। कंपनियों को इसे लागू करने के लिए खुद को तैयार करने को लेकर पक्के तौर पर कदम उठाना चाहिए।'
ट्राई कॉल ड्रॉप हर्जाना नियमों के क्रियान्वयन और सेवा सुधारने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर टेलिकॉम ऑपरेटर्स के साथ पहले ही बैठक कर चुका है। दिशानिर्देश के अनुसार दूरसंचार कंपनियों को उनके नेटवर्क में समस्या के कारण हरेक कॉल ड्रॉप के लिए एक रुपए का हर्जाना ग्राहकों को देना होगा। यह हर्जाना अधिकतम तीन रुपया रोजाना होगा।
ट्राई ने देश भर में कॉल ड्रॉप की बढ़ती समस्या को लेकर कई बार चिंता जताई थी। ट्राई ने फैसला लिया है कि अब वह खराब सेवा देने वाले मोबाइल ऑपरेटरों के नाम उजागर करेगी, इसके अलावा जिन इलाकों में यह समस्या सबसे अधिक है, उसके बारे में भी पूरी जानकारी दी जाएगी।
ट्राई के मुताबिक यह योजना अभी देश के कुछ ही हिस्सों में लागू होगी, बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से सभी शहरों में लागू किया जाएगा। यह जानकारी उपभोक्ताओं को एक नई वेबसाइट के जरिए दी जाएगी, इस साइट का लिंक ट्राई की वेबसाइट पर शेयर किया जाएगा।
कंपनियों ने उठाए सवाल
दूरसंचार कंपनियों ने इस तरह के नियम बनाने को लेकर ट्राई के अधिकारक्षेत्र और इसे लागू करने में तकनीकी व्यवहारिकता को लेकर सवाल उठाए हैं। शर्मा ने कहा, 'ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि प्राधिकरण ने तकनीकी व्यवहार्यता पर विचार किए बिना यह नियम लागू कर दिया। नियमन जारी करने से पहले प्राधिकरण ने तकनीकी व्यवहार्यता समेत मामले से संबद्ध सभी पहलुओं पर गौर किया।
कॉल रेट बढ़ने की आशंका
मोबाइल ऑपरेटरों के संगठन सीओएआई और एयूएसपीआई जैसे उद्योग संगठनों ने ट्राई को पत्र लिखकर कहा है कि ये नियम लागू होने से मोबाइल कॉल की दरें बढ़ेंगी। शर्मा ने कहा, 'उद्योग संगठन फैसले की समीक्षा चाहते हैं। पहले तो हमें इस बात का कानूनी रूप से जांच करना होगा कि क्या ट्राई निर्णय की समीक्षा कर सकता है या नहीं। उसके बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसले से दो हफ्ते के भीतर दूरसंचार कंपनियों को अवगत करा दिया जाएगा।
दिग्गजों के साथ बैठक
बैठक में भारती एयरटेल के प्रबंध निदेशक व सीईओ गोपाल विट्टल, वोडाफोन इंडिया के प्रबंध निदेशक व सीईओ सुनील सूद, आइडिया सेल्यूलर के प्रबंध निदेशक व सीईओ हिमांशु कपानिया, रिलायंस जियो इंफोकॉम के प्रबंध निदेशक संजय मशरुवाला और एमटीएनएल के निदेशक सुनील कुमार शामिल हुए।

सीओएआई के महानिदेशक राजन एस. मैथ्यूज, एयूएसपीआई के महासचिव अशोक सूद और अन्य दूरसंचार कंपनियों के प्रतिनिधि भी बैठक में शरीक थे।

Wednesday, October 28, 2015

विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की शादी- अगले वर्ष की शुरुआत में

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की शादी की अटकलें पिछले वर्ष कम से कम दो बार सामने आई, लेकिन विश्वस्त सूत्रों के अनुसार ये दोनों अगले वर्ष की शुरुआत में शादी कर सकते हैं।
इन लवबर्ड्‍स ने पिछले दिनों यहां एक रेस्टॉरेंट में लंच किया था, उस वक्त अनुष्का के पिता भी इनके साथ थे। सोमवार रात को विराट को इस अभि‍नेत्री के वरसोवा स्थित घर से सफेद मर्सिडीज कार में निकलते हुए देखा गया।
सूत्रों के अनुसार विराट अनुष्का के परिजनों से लगातार मुलाकात कर रहे हैं, जो इस बात को दर्शाता है कि यह कपल अपने संबंधों को लेकर गंभीर है। विराट का इस अभिनेत्री के पिता से अच्छा तालमेल बन गया है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में विराट के परिजनों ने अनुष्का के ‍घरवालों से मुलाकात की थी, उस वक्त इनकी शादी की अटकलें चल पड़ी थी। वास्तव में देखा जाए तो इस वाकये के दो महीने जब टीम इंडिया के इंग्लैंड दौरे के वक्त बीसीसीआई ने अनुष्का को विराट के साथ टीम होटल में रूकने की अनुमति दे दी थी। उस वक्त यह कहा गया था कि ये दोनों शीघ्र ही शादी करने वाले हैं। वैसे उस वक्त अनुष्का के प्रतिनिधि ने शादी की खबरों से इंकार किया था।

वैसे कुछ दिनों पूर्व मीडिया में यह खबर आई थी कि शादी की बात को लेकर विराट और अनुष्का के संबंधों में दरार आ गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इनके परिजन कुछ दिनों में मुलाकात कर शादी की डेट फिक्स करने वाले है। पूरी संभावना है कि यह शादी अगले वर्ष की शुरुआत में हो जाएगी।

Thursday, October 15, 2015

व्यावसायिक सरोगेसी पर SC ने दी सरकार को बैन की सलाह

सरोगेसी टूरिज्म के लिए भारत विदेशियों के लिए पसंदीदा जगह बन चुका है और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने की सलाह देते हुए मानव भ्रूण के आयात की अनुमति देने संबंधी नीति की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस रंजन गोगोई व एनवी वर्मा के बेंच ने कहा कि सरोगेसी से संबेधित कई मुद्दे किसी कानून के अंतर्गत नहीं आते और सरकार को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ एक कानून लाना होगा। 2013 में केंद्र ने एक अधिसूचना दायर की थी जिसमें विदेशी जोड़ों के लिए कृत्रिम प्रजनन के जरिये मानव भ्रूणों के आयात को मंजूरी दी थी।
बेंच ने कहा, 'भारत में व्यावसायिक सरोगेसी को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन फिर भी ऐसा हो रहा है। आप मानव भ्रूण के व्यापार को अनुमति दे रहे हैं। यह वास्तव में एक बिजनेस है। भारत में सरोगेसी टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है।' हालांकि, सरकार द्वारा यह कहने पर कि वह इस मसले को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही सरोगेसी बिल लाने पर काम कर रही है, अदालत ने अधिसूचना पर कोई स्टे नहीं दिया।

सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहाकि मसले पर सलाह-मशविरा चालू है और कुछ माह में ही संसद में बिल को पेश किया जाएगा।

Friday, October 9, 2015

12 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा

बिहार व त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल देवानंद कोंवर की बेटी नंदिता कोंवर को असम पुलिस की विजिलेंस व भ्रष्टाचार रोधी विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा है। राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी नंदिता कोंवर को एक ठेकेदार से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है।
विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधी विभाग के एसपी बिनॉय कलिता ने बताया कि कामरूप जिले में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) की प्रोजेक्ट डायरेक्टर नंदिता कोंवर ने दुर्गा सरोवर क्षेत्र में बन रही एक सड़क का बिल पास करवाने के लिए ठेकेदार से बिल का 10 फीसद रिश्वत के तौर पर मांगा था।
हालांकि, विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधी विभाग द्वारा गिरफ्तार की गई नंदिता ने इसे अपने खिलाफ एक राजनीतिक साजिश बताया है। नंदिता का कहना है कि गुवाहाटी के सांसद ने उन्हें राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया है।

दूसरी तरफ, एसपी कलिता ने बताया कि ठेकेदार ने उनके पास नंदिता कोंवर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। गुरुवार की सुबह विभाग के अधिकारियों ने जाल बिछाया और नंदिता कोंवर को रिश्वत के पैसे लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया।

Tuesday, October 6, 2015

महिला को दो साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी

फ्लैट पर कब्जा पाने के लिए मुंबई की एक महिला को दो साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट में उसने अपनी लड़ाई जीती।
अचल संपत्ति सलाहकार आरती गुनजिकर ने ग्रेटर बंबई सहकारी बैंक द्वारा 22 अक्टूबर, 2013 को आयोजित की गई सार्वजनिक नीलामी में सबसे ज्यादा बोली लगाकर एक गार्डन वियू सोसाइटी, माहिम में 2बीएचके फ्लैट खरीदा था। इसके लिए उसने उप जिला रजिस्टार को स्टांप शुल्क पंजीकरण, रखरखाव और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के रूप में 1,15,62,500 रुपये का भुगतान किया था।

इसके बावजूद उसे फ्लैट पर कब्जा नहीं मिला तो उसने स्थानीय अदालत की शरण ली। बाद में वहां से यह मामला हाईकोर्ट में चला गया। आखिर में यह मसला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने आरती के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद आरती को फ्लैट पर कब्जा मिला।

Monday, September 21, 2015

हिंदी भाषा और उसकी लिपि में कोई अंतर नहीं

'हिंदी का महत्व बनाम अंग्रेजी' हमारे समाज की एक स्थायी बहस है। बड़े पैमाने पर देखें तो इसका विस्तार 'कोई भी देसी भाषा बनाम अंग्रेजी' की बहस तक किया जा सकता है, साथ में यह पुछल्ला भी जोड़ा जा सकता है कि किस तरह अंग्रेजी स्थानीय भाषाओं को खत्म करती जा रही है। यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मसला है। हर सरकार खुद को अन्य किसी भी सरकार से ज्यादा हिंदी हितैषी साबित करने पर आमादा है। इसी का नतीजा है कि बीच-बीच में आपको हिंदी उन्नयन अभियानों के दर्शन होते रहते हैं। इसके तहत सरकारी दफ्तर अनिवार्य रूप से अपने सारे सर्कुलर हिंदी में जारी करते हैं और ज्यादातर सरकारी स्कूल हिंदी मीडियम में ही डटे रहते हैं।

इस बीच अंग्रेजी बिना किसी उन्नयन अभियान के ही अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ती जा रही है। वजह यह कि अंग्रेजी लोगों को बेहतर करियर की उम्मीद बंधाती है। इससे समाज में उनका रुतबा बढ़ता है। सूचना और मनोरंजन की एक बिल्कुल नई दुनिया उनके सामने खुल जाती है, और टेक्नॉलजी तक पहुंच भी बढ़ती है। हकीकत यही है कि अंग्रेजी की सामान्य जानकारी के बिना आप आज एक मोबाइल फोन या बेसिक मेसेजिंग ऐप्स का भी इस्तेमाल नहीं कर सकते।
हिंदी प्रेमियों का दुख-
बहुत से हिंदी प्रेमी और शुद्धतावादी आज के नए समाज से दुखी हैं, जहां युवा अपनी मातृभाषा को दरकिनार कर जल्द से जल्द अंग्रेजी की दुनिया में जाने को आतुर हैं। लेकिन हिंदी थोपने की जितनी कोशिश वे करते हैं, युवा उससे कहीं ज्यादा विरोध करते हैं। ऐसे में एक हिंदी प्रेमी (इसमें मैं भी शामिल हूं) क्या करे? और बाकी तमाम लोग ऐसा क्या करें कि हिंदी एक बोझ या बाध्यता न लगे? इसका समाधान यह है कि रोमन हिंदी अपनाई जाए। रोमन हिंदी हिंगलिश नहीं है। यह देवनागरी की बजाय ऐंग्लो-सैक्सन लिपि में लिखी हुई हिंदी भाषा है। उदाहरण के लिए 'आप कैसे हैं' को इस तरह लिखा जाए: 'aap kaise hain?'
ऐसा करना जरूरी क्यों है? ऐंग्लो सैक्सन लिपि व्यापक प्रचलन में है। यह कंप्यूटर के कीबोर्ड और मोबाइल की टच स्क्रीन में इस्तेमाल की जाती है। यह काफी लोकप्रिय है, खासकर युवाओं में। आज करोड़ों भारतीय व्हाट्सऐप का प्रयोग करते हैं, जहां तकरीबन सारी बातचीत हिंदी में होती है, लेकिन इसकी लिपि रोमन हुआ करती है। जी हां, देवनागरी लिपि डाउनलोड करने की सुविधा भी है, पर शायद ही कोई उसे प्रयोग में लाता हो। कई देवनागरी कीबोर्ड फोन में लिप्यांतरण करते हैं। यानी आप पहले रोमन में हिंदी टाइप करते हैं, फिर एक सॉफ्टवेयर उसका हिंदी टेक्स्ट तैयार करता है। जाहिर है, यूजर मूल रूप से रोमन हिंदी का ही इस्तेमाल कर रहा है।
रोमन हिंदी बॉलिवुड के पोस्टरों और विज्ञापनों में पहले ही प्रचलित हो चुकी है। ज्यादातर हिंदी फिल्मों के स्क्रीनप्ले रोमन हिंदी में लिखे जा रहे हैं। किसी भी बड़े शहर में घूमने निकलिए, यह मुमकिन नहीं कि रोमन लिपि में लिखे हिंदी कैप्शनों वाली होर्डिंग्स न दिखें। मगर, हिंदी के विद्वान, परंपरावादी और इसे बचाने की मुहिम में लगे लोग या तो इन बातों से अनजान हैं या बिल्कुल उदासीन। वे हिंदी भाषा और उसकी लिपि में कोई अंतर नहीं समझते। लोग आज भी हिंदी से प्यार करते हैं। बस आज की टेक्नॉलजी-आधारित जिंदगी में उस लिपि को शामिल करना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
रोमन लिपि को अपनाकर हम हिंदी को बचा सकते हैं। देश की एकता के लिहाज से भी यह बड़ा कदम होगा क्योंकि इससे हिंदी और अंग्रेजी बोलने वाले एक-दूसरे के करीब आएंगे। तय है कि हिंदी के शुद्धतावादी यह सुझाव पसंद नहीं करेंगे। वे हिंदी को बिल्कुल उसी रूप में बनाए रखना चाहते हैं जैसी कि यह थी। मगर, वे भूल जाते हैं कि भाषा वक्त के साथ विकसित होती है। और आज वैश्वीकरण के दौर में अगर हिंदी एक ग्लोबल स्क्रिप्ट अपनाती है तो यह उसके लिए कई तरह से फायदेमंद होगा। इससे दुनिया भर में बहुत सारे लोग हिंदी सीखने को प्रोत्साहित होंगे। कई उर्दू शायर अपनी रचनाएं पारंपरिक उर्दू के बजाय देवनागरी में प्रकाशित कराते रहे हैं। ऐसा वे बड़े स्तर पर अपनी पहुंच बनाने के लिए किया करते हैं। लेकिन यह बीते वक्त की बात हो चुकी है। आज के समय की मांग यह है कि हिंदी को एक नए रूप में अपडेट किया जाए। इसकी शुरुआत हम सरकारी सूचनाओं और सार्वजनिक संकेतों को रोमन हिंदी में लाकर कर सकते हैं, ताकि लोगों में इसकी प्रतिक्रिया देखी जा सके।

किनारे पड़ने का खतरा-

संभावना यह भी है कि रोमन हिंदी प्रिंट मीडिया और किताबों के लिए एक नया उद्योग ही खड़ा कर दे। लाखों लोग इसका इस्तेमाल पहले से करते आ रहे हैं लेकिन अब तक किसी ने इसकी नई संभावनाओं के बारे में सोचा नहीं था। वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य लिपि हिंदी भाषा के लिए भी उम्दा साबित होगी। ऐसा न हुआ तो हिंदी के लिए, अंग्रेजी के हमले के चलते किनारे पड़ जाने का खतरा बना हुआ है। दरअसल, एक भाषा को हमें शुद्धता के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उसे समय के साथ चलना और विकसित होना होगा। waqt ke sath badalna zaroori hai. मतलब आप समझ ही गए होंगे।

Tuesday, September 15, 2015

2020 तक पहली स्वचालित कार सड़कों पर

वैज्ञानिकों का दावा है कि 2020 तक पहली स्वचालित कार सड़कों पर दिखने लगेगी। इसका मतलब यह कि कार चलाते समय चालक को उसे संभालना जरूरी नहीं होगा। उस दौरान वह अपना ईमेल, फोन या कोई अन्य काम कर सकेगा। हालांकि बीच में ऐसा समय भी आ सकता है जब कार का स्वचालित यंत्र चालक को उसे संभालने का संदेश दे, जिसके बाद चालक को मुस्तैद होना पड़ेगा।
बीएमडब्ल्यू की शुरुआत
जर्मनी की बीएमडब्ल्यू में चालक रहित कार के प्रोटोटाइप पर काम चल रहा है। यह गाड़ी भारी ट्रैफिक में खुद ही लेन बदलती है और 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक जा पहुंचती है। वैसे सड़क की जटिलताओं के लिए ड्राइवर को भी सक्रिय रहना पड़ता है। यह कार रेडार सेंसरों से लैस है, जो सड़क पर इसकी मदद करते हैं।
प्रोटोटाइप पर काम करने वाले माइकल एबरहर्ड के अनुसार इसकी बड़ी चुनौती रफ्तार को 130 किमी प्रतिघंटा से शून्य पर लाने की है। इसके लिए 80 से 100 मीटर पर ही ब्रेक लगनी शुरू हो जानी चाहिए, जिसका अंदाजा कार का सेंसर लगाएगा। हालांकि इतनी रफ्तार पर सेंसरों के लिए यह चुनौती होगी। खास बात यह है कि चालकरहित कारों के अब तक के परीक्षणों में कोई दुर्घटना नहीं हुई है।
अन्य कंपनियां भी दौड़ में
चालकरहित कारों के निर्माण में मर्सिडीज और गूगल भी दौड़ में हैं। एबरहर्ड के अनुसार हमारी अधिकांश ड्राइविंग नीरस होती है। घर से दफ्तर के बीच कई धक्के पड़ते हैं। इसलिए लोग इस बीच कुछ आराम भी चाहते हैं। उनके अनुसार लगातार बदलते रास्तों से जूझने का काम सेंसर करते हैं। गूगल इस दिशा में खासा सक्रिय है।
गूगल द्वारा जिन विशेषताओं पर काम किया जा रहा है उनमें सड़कों पर चलने वाली दूसरी गाड़ियों का पूर्वानुमान लगाना भी होगा। मसलन, किसी साइकिल सवार का अपनी लेन से भटकना या आगे चल रही गाड़ी का अचानक यू-टर्न लेना।
यही नहीं, खड़ी गाड़ियों में बैठे लोगों द्वारा अचानक दरवाजा खोलने का अंदाजा भी नए सेंसर लगाएंगे। चालकरहित कारों में यह विशेषताएं जोड़ने के लिए गूगल के इंजीनियर प्रयास कर रहे हैं। गूगल की "बबल कार" का ऐसी ही अजीबोगरीब परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है।
विशेषज्ञों के विचार
गूगल के सह-संस्थापक सर्जेइ ब्रिन के अनुसार वह इन तकनीकों की मदद से बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर इसे अमल में लाने में समय लगेगा। बीएमडब्ल्यू, टोयोटा, मर्सिडीज और वोल्वो के विशेषज्ञ भी यह भलीभांति जानते हैं। गूगल की सोच है कि ड्राइविंग में गलतियां करने वाले लोगों को उससे छुटकारा मिलना चाहिए, जिसके लिए बड़े परिवर्तन ही सफल होंगे।
गूगल के अनुसार अन्य चीजों की तरह अब कारों को भी डाटा आधारित होना चाहिए। गूगल ने विशेषज्ञों की बजाय अपने कर्मचारियों को चालकरहित कारों के परीक्षण में इस्तेमाल किया है, जिसके सकारात्मक नतीजे निकले। फिर भी चालकरहित कारों की तकनीक पर आंखें मूंद कर यकीन करने पर गूगल आगाह करता है।
आगे की बात
चालकरहित कारों के विशेषज्ञ अब इसके तकनीकी पक्ष की बजाय, बिक्री के पक्ष पर सोचने लगे हैं। एबरहर्ड के अनुसार ऑटोमोबाइल उद्योग के हर परिवर्तन को कुछ झिझक के बाद ही सही, पर अपना लिया जाता है। तो क्या ऐसे वाहनों में दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी क्या चालक की होगी ? एबरहर्ड के अनुसार अब वह दिन भी दूर नहीं जब कारों में भी हवाई जहाजों की तरह ब्लैक बॉक्स होगा, जिसके डाटा से सब पता चलेगा।

एबरहर्ड के अनुसार, वह सिर्फ इतनी ही उम्मीद करते हैं कि स्वचालित गाड़ियों में चालक इतना मसरूफ कभी न हो कि चलती गाड़ी से उसका ध्यान ही हट जाए।