Thursday, July 23, 2015

जरा इधर भी नजर कीजिए

एक लड़की ने चुपचाप एक स्कूल टीचर को पिछले हफ्ते चिट्ठी दी थी। यह कोई साधारण खत नहीं था। इस खत के जरिए लड़की ने छुट्टी नहीं मांगी थी। इस हताश लड़की ने परेशान होकर टीचर को खत लिख मदद मांगी थी। लड़की ने चिट्ठी में लिखा था कि पिता उसके साथ रेप करता है। उसकी मां चुपचाप देखती है लेकिन कुछ करती नहीं।
टीचर ने खत पाने के बाद वाशी में एक लोकल एनजीओ से संपर्क साधा। एनजीओ ने उस विकृत माता-पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पिछले हफ्ते आठवीं क्लास में पढ़ने वाली 13 साल की इस स्टूडेंट ने अपने टीचर को खत लिखा तो डराने वाला वाकया सामने आया। उसने लिखा था, मेरा पिता मुझसे रेप करता है और मां चुप रहती है।'
लड़की के खत को पढ़ने के बाद बुरी तरह से टूट चुके टीचर इस मामले में एक भी शब्द कहने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं। उन्होंने चिट्ठी को पढ़कर तत्काल फेंक दिया। उन्हें डर था कि उसकी चिट्ठी कोई और पढ़ सकता है। टीचर ने लोकल एनजीओ से संपर्क साधा था। एनजीओ की मदद से ही एफआईआर दर्ज की गई थी। सोमवार की रात पिता और लड़की की मां दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
पुलिस ने कहा, '45 साल के लड़की का पिता फल बेचता है। पुलिस को दिए बयान में लड़की ने कहा है, 'मां के सामने मुझसे मेरा पिता रेप करता है। रेप के बाद मेरी मां मुझे खाने के लिए कुछ दवाई देती थी। जब मैं सात साल की थी तब से ही मेरा बाप मेरे साथ रेप कर रहा है।'  शिकायत के बावजूद मेरी मां ने मदद करने से इनकार कर दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह प्रेगनेंसी से बचने के लिए मां की तरफ से दी जाने वाली दवाई की जांच कर रही है। रेप पीड़िता की एक बड़ी बहन और एक बड़ा भाई है। इसके साथ ही पीड़िता के दो और छोटे भाई हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि जब भाई-बहन घर पर नहीं होते थे तब पिता रेप करता था।  उसने पुलिस से कहा, 'जब मेरे भाई घर पर नहीं होते थे तब पिता रेप करता था। मेरे भाई का घर पर न होना पिता के लिए रेप करने का सुरक्षित मौका होता था। मेरी मां के सामने वह घर में रेप करता रहा लेकिन मां ने मेरी कभी मदद नहीं की।' लड़की ने पुलिस से कहा कि उसने अपनी 17 साल की बहन को भी इस वाकये के बारे में बताया था।
पुलिस ने बताया कि उसकी बड़ी बहन परिवार के साथ नहीं रहती थी। लड़की ने बताया कि उसकी बड़ी बहन पर भी पिता ने यौन हमले किए थे। लड़की ने यह भी बताया कि उसने इससे पहले रेप के बारे में अपने पड़ोसियों को बताया था लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। पड़ोसियों ने कहा था कि वह खुद ही पुलिस से संपर्क साधे।
वाशी पुलिस स्टेशन के एक पुलिस ऑफिसर ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया, 'कुछ एनजीओ नवी मुंबई के स्कूलों में यौन उत्पीड़न पर काउंसलिंग क्लास शुरू की थी। इसी क्लास के दौरान लड़की ने महसूस किया कि उसे अपने पैरंट्स के खिलाफ बोलना चाहिए।'
पुलिस ने इस मामले में रेप पीड़िता की मां से पूछताछ की है। मां ने अपनी बेटी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। महिला ने दावा किया कि उसे 15 दिन पहले पता चला कि उसका पति बेटी के साथ रेप करता है। महिला ने कहा कि उसने जानने के बाद अपने पति को डांटा और बेटी से अलग रहने को कहा है। फिलहाल लड़की को एनजीओं के संरक्षण में रखा गया है।
लड़की के माता-पिता के खिलाफ इंडियन पिनल कोड के सेक्शन 376(रेप), सेक्शन 5 और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रोम सेक्शुअल ऑफेंस ऐक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इस मामले अभी केवल पिता को अरेस्ट किया गया है। लड़की के पिता को थाणे कोर्ट में मंगलवार को पेश किया गया था। फिलहाल उसे गुरुवार तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस शाहजी उमा ने इस वाकये की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पिता को अरेस्ट कर लिया गया है। शाह ने कहा कि इस वारदात में मां की भूमिका की जांच की जा रही है। पीड़िता ने दावा किया है कि उसकी मां के सामने रेप होता था और वह चुप रहती थी। पीड़ित लड़की ने मां पर रेप के बाद दवाई देने का भी आरोप लगाया है।

Wednesday, July 22, 2015

45 मिलियन लोगों को हुनरमंद बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

'विश्व युवा कौशल दिवस' के मौके पर महाराष्ट्र ने 2022 तक 45 मिलियन लोगों को हुनरमंद बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री द्वारा स्किल इंडिया के लॉन्च के मौके पर मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) ने भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।भारत में 15-29 साल की उम्र की 3.47 करोड़ की जनसंख्या में केवल 10 प्रतिशत ही हुनरमंद हैं। ऐसे में, बड़ी संख्या में लोगों को हुनरमंद बनाने की जरूरत है। इंडस्ट्री के बड़े नामों के साथ ही कौशल विकास का महकमा इस मौके पर मौजूद था। 
महाराष्ट्र राज्य स्किल डिवेलपमेंट सोसायटी के सीईओ विजय कुमार गौतम ने कहा कि हम आने वाले समय में लोगों को हुनरमंद बनाने के साथ इंडस्ट्री की डिमांड के क्रम में उन्हें नौकरी दिलाने की राह दिखाएंगे। यह बेरोजगार युवकों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी सरल बनाएंगे, जिससे छोटे-छोटे गांवों से लोगों को जिले तक नहीं आना पड़ेगा। यदि हुनर को फिर से तराशने की जरूरत पड़ेगी तो हम वह भी करने के लिए तैयार हैं। 

Wednesday, July 8, 2015

सामने से रेल आ रही थी

ऑस्ट्रेलिया में 62 साल के एक भारतीय ने रेल के ट्रैक पर गिरी 18 महीने की पोती को बचाने के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की। सामने से रेल आ रही थी, मगर बुजुर्ग ट्रैक से बच्ची को उठाकर प्लैटफॉर्म पर ले आए। यह मामला स्थानीय मीडिया में छाया हुआ है।
डेली टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना सिडनी के वेंटवर्थविल स्टेशन की है। रविवार को बच्ची का प्राम ढलान की वजह से अपने आप चलता हुआ सीधे पटरी पर जा गिरा। बच्ची के दादा ने ट्रैक पर कूदकर बच्ची को उठाया और उसे अपनी पत्नी और बहू के हवाले कर दिया। मगर उनके पास इतना टाइम नहीं था कि खुद ऊपर चढ़ सकें।
ट्रेन तेजी से उनकी तरफ आ रही थी और वक्त बहुत कम बचा था। ऐसे में बुजुर्ग ने दौड़ लगाई और आगे एक तरफ को कूद गए। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। बच्ची के दादा कुछ दिन पहले ही ऑस्ट्रेलिया आए थे और परिवार गुरुद्वारे जा रहा था।
इस स्टेशन के प्लैटफॉर्म में मौसम के हिसाब से ढलान दी गई है, ताकि बारिश का पानी सीधा पटरियों में चला जाए। बच्ची के अंकल ने बाद में रिपोर्टर्स को बताया, 'उन्होंने कमाल कर दिया और अपनी जिंदगी की एक पल के लिए भी फिक्र नहीं की। वह उसकी जान बचाने के लिए सीधे कूद गए।'
बच्ची और उसके दादा थोड़े से जख्मी हुए हैं, मगर उन्हें छुट्टी मिल गई है। सिडनी ट्रेन्स के डायरेक्टकर ऑफ ऑपरेशंस टोनी एड का कहना है कि इस तरह की घटना फिर कभी न हो, इसके लिए स्टेशन को अपग्रेड किया जाएगा।

Monday, July 6, 2015

सर्वोच्च राजस्व की प्राप्ति

वेस्टर्न रेलवे के मुंबई डिविजन द्वारा बिना टिकट यात्रा के विरुद्ध सघन अभियान से अप्रैल एवं मई, 2015 में अब तक के सर्वोच्च राजस्व की प्राप्ति की गई है। अप्रैल, 2015 में की गई नियमित जांच का यह परिणाम रहा कि बिना टिकट/अनियमित यात्रा सहित बिना बुक किए गए सामान के 1.3 लाख मामले पकड़े गए। इस माल से 5.68 करोड़ रुपये जुर्माने स्वरूप प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की इसी माह तुलना में 27.04 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार मई, 2015 में किए गए बिना टिकट/अनियमित यात्रा सहित बिना बुक किए गए सामान के 1.2 लाख मामले पकड़े गए, जिनसे 5.41 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर मिले। अप्रैल तथा मई, 2015 के दौरान 6 फोर्ट्रेस जांच आयोजित की गईं, जिनसे बतौर जुर्माना 36.44 लाख रुपये प्राप्त हुए।

Thursday, July 2, 2015

भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू

शुक्रवार 3 जुलाई से भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू होने जा रही है।  पहले इस सेवा को 3 मई से लागू किया जाना था, लेकिन बाद में इसके लॉन्च की तारीख आगे बढ़ा दी गई।
एक वरिष्ठ टेलिकॉम अधिकारी ने बताया कि 3 जुलाई से यह सर्विस शुरू हो जाएगी। पूरे देश में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के लागू होने के बाद ग्राहकों को शहर या सर्कल बदलने पर अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलना होगा।
मौजूदा सिस्टम में अगर किसी व्यक्ति के पास दिल्ली का नंबर हो, तो उसे मुंबई, चेन्नै या किसी और सर्कल में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। उन सर्कल्स में मूव करने पर उसे अलग ही नंबर लेना होगा।
फुल नंबर पोर्टेबिलिटी को 3 मई को शुरू होना था। लेकिन सेल्युलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने टेलिकॉम ऑपरेटर्स से सर्विस लागू होने से रोकने की अपील की थी ताकि टेलिकॉम ऑपरेटर्स इसके लिए जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें। मंत्रालय ने इसके लिए दो महीने की मोहलत दी थी।
पिछले महीने, टेलिकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि यह सुविधा जुलाई तक तैयार हो जाएगी। COAI के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज़ ने कहा कि इंडस्ट्री अब इसके लागू होने के लिए तैयार है और अब इसमें देर होने की कोई संभावना नहीं है

Tuesday, June 23, 2015

स्वच्छता अभियान

साथियों,
वर्तमान एक महीना बहुत ही पवित्र है । चाहे हिंदु हो या मुसलमान , सभी के लिए ।
हिंदुओं के लिए यह माह मल-मास (अधिक मास) के रूप में और मुसलमानों के लिए पवित्र रमजान –
आइए इस पवित्र माह को स्वच्छता अभियान से जोड़ दें और अपने आस पास गंदगी न रहने दें ।

स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनें । 

Monday, June 15, 2015

नियामक प्राधिकरण बनाकर रेल बजट को खत्म करने की सिफारिश

भारतीय रेलवे में सुधार को लेकर बिबेक देबरॉय कमिटी की सिफारिशों पर विवाद की गुंजाइश तो है, लेकिन इनमें से भविष्य के लिए कई रास्ते भी निकल सकते हैं। सच कहा जाए तो इसने रेलवे पर लीक से हटकर विचार करने पर जोर दिया है। 
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे के हालात बदलने और संसाधन जुटाने के उपाय सुझाने के लिए इस कमिटी का गठन पिछले साल सितंबर में किया गया था। कमिटी ने 5 साल का एक रोडमैप पेश किया है, जिसके आधार पर रेलवे में व्यापक बदलाव की बात कही गई है। इसमें रेलवे की आर्थिक ग‌तिविधियों के संचालन के लिए नियामक प्राधिकरण बनाकर रेल बजट को खत्म करने की सिफारिश की गई है। 
रेलवे को मुख्य रूप से दो निकायों में बांटने का सुझाव दिया गया है। एक निकाय बुनियादी ढांचे की देखभाल के लिए होगा तो दूसरा संचालन संबंधी काम देखेगा। इसके अलावा ट्रेनों के संचालन को प्राइवेट हाथों में देने का प्रस्ताव रखा गया है और कहा गया है कि इसकी शुरुआत सवारी गाड़ियों से की जा सकती है। 
साथ ही रेलवे के लिए स्वतंत्र और अर्ध-न्यायिक रेलवे नियामक प्राधिकारण बनाने की अनुशंसा भी की गई है। कमिटी ने कहा है कि सरकार रेलवे के सामाजिक दायित्व का सारा दबाव रेलवे पर सब्सिडी के रूप में डाल देती है जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। कमिटी का बुनियादी सवाल है कि रेलवे एक आर्थिक सेवा है या सामाजिक सेवा करने वाली कोई संस्था? आखिर रेलवे को स्कूल, अस्पताल चलाने और सुरक्षा बल रखने की क्या जरूरत है? इसे एक आधुनिक परिवहन सेवा समझने और उसे उसी रूप में विकसित किए जाने की जरूरत है। 
रिपोर्ट में रेलवे में निजी कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है और प्रतिस्पर्धा का माहौल सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है। दरअसल कमिटी रेलवे को एक सरकारी विभाग से ज्यादा एक कंपनी के रूप में विकसित करने की पक्षधर है। मगर दिक्कत यह है कि हमारे देश में रेलवे सियासत का एक टूल बनी हुई है। गठबंधन राजनीति के दौर में सत्तारूढ़ दल हमेशा अपने गठजोड़ के सबसे बड़े सहयोगी दल को संतुष्ट करने के लिए उसे रेल मंत्री का पद देता आया है। 
रेल बजट के जरिए सरकार अपने पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश करती है। अपने वोटबैंक को एकजुट करती है। इसके लिए बिना किसी ठोस आधार के गाड़ियां चलाई जाती हैं। आज भी जिन सरकारी महकमों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है, उनमें रेलवे प्रमुख है। इसमें भर्तियों के घोटाले अक्सर सामने आते रहते हैं। यह लालफीताशाही की प्रतीक है। इसमें छोटे से छोटे फैसले लेने में वर्षों लग जाते हैं। 
नतीजा यह है कि स्वतंत्रता के समय भारत का रेलवे नेटवर्क चीन से दोगुना था। पर आज चीन हमसे मीलों आगे नजर आ रहा है। कमिटी की राय स्पष्ट है कि रेलवे को अगर प्रफेशनल ढंग से नहीं चलाया गया तो कभी यह फायदे में नहीं आएगी और इसके आधुनिकीकरण का सपना भी कभी पूरा नहीं हो पाएगा।