Thursday, December 18, 2014

सफलता की एक और छलांग

इसरो ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से देश के अब तक के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-III के सफल प्रक्षेपण के साथ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में सफलता की एक और छलांग लगा दी है। स्पेस सेंटर से सुबह करीब साढ़े नौ बजे लॉन्च किए इस रॉकेट की लंबाई 42.4 मीटर है और इस पर कुल लागत 155 करोड़ की आई है। नई जेनरेशन के 630 टन के इस रॉकेट के प्रक्षेपण के सफल रहने की घोषणा करते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के राधाकृष्णन ने कहा कि मार्क-III टेस्ट फ्लाइट मिशन कामयाब रहा है।

इसके सफल परीक्षण के साथ ही अब भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जो अंतरिक्ष में बड़े सैटलाइट भेजने की काबिलियत रखते हैं। जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट के साथ इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले यान ( क्रू मॉड्यूल) का भी सफल परीक्षण किया गया। यह यान दो से तीन लोगों को अंतरिक्ष में ले जा सकता है। यान 125 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया और उसके बाद फिर पैराशूट के सहारे बंगाल की खाड़ी में अंडमान-निकोबार में एक द्वीप पर लैंड करने में सफल रहा।
जीएसएलवी मार्क-III की परिकल्पना और उसकी डिजाइन इसरो को इनसैट- 4 श्रेणी के 4,500 से 5,000 किलोग्राम वजनी भारी कम्युनिकेशन सैटलाइट्स को लॉन्च करने की दिशा में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएगा। इसके दो फायदे होंगे जहां भारी सैटलाइट्स भेजने के मामले में हम आत्मनिर्भर हो जाएंगे, वहीं अरबों डॉलर के कमर्शल लॉन्चिंग मार्केट में भारत की क्षमता में इजाफा होगा। क्रू मॉड्यूल की टेस्टिंग की सफलता से भारत इंसान को अंतरिक्ष में भेजने की दिशा में आगे बढ़ गया है। अभी तक रूस, अमेरिका और चीन के पास इंसान को अंतरिक्ष में भेजने की काबिलियत है।
जीएसएलवी मार्क-III की लॉन्चिंग का वक्त 'मिशन रेडीनेस रिव्यू ऐंड लॉन्च ऑथराइजेशन बोर्ड' की मीटिंग में तय किया गया। इसरो के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि इसके लिए काउंटडाउन की कम अवधि 'डमी क्रायोजेनिक स्टेज' की वजह से है। इसरो ने बताया कि रॉकेट पर 140 करोड़ रुपये का खर्च और क्रू मॉड्यूल पर 15 करोड़ रुपये का खर्च आया है।श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने के तुरंत बाद इसरो एलवीएम-3 के पैराशूट के संचालन, एयरो ब्रेकिंग सिस्टम वगैरह के साथ क्रू मॉड्यूल के पृथ्वी के परिमंडल में फिर से प्रवेश करने की क्षमता का भी टेस्ट किया। समुद्र से 126.16 किमी की उंचाई से उड़ान के बाद क्रू मॉड्यूल रॉकेट से करीब 325.52 सेकंड में अलग हुआ। विशेष तरह से निर्मित पैराशूट मॉड्यूल ने अंडमान-निकोबार द्वीप में इंदिरा गांधी पॉइंट से करीब सौ किलोमीटर की दूरी पर बंगाल की खाड़ी में 'आसानी से गिरने' में मदद किया।

Saturday, November 29, 2014

उपभोक्ता स्कूल फीस से लेकर बिजली, पानी के बिलों का भुगतान एक ही स्थान पर

जल्द ही एक ऐसा सिस्टम आने वाला है जिसकी मदद हर कोई किसी भी वक्त और किसी भी तरह का बिल पेमेंट कर सकेगा। अभी कुछ हद तक इस सुविधा का फायदा वही लोग उठा रहे हैं जो नेटबैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत जल्द यह सुविधा सबके लिए होगी। 
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस तरह के सिस्टम शुरू करने के लिए अंतिम दिशा-निर्देश शुक्रवार की देर शाम जारी कर दिए। इस सिस्टम को 'भारत बिल पेमेंट सिस्टम' (बीबीपीएस) का नाम दिया गया है। इसके जरिए उपभोक्ता स्कूल फीस से लेकर बिजली, पानी के बिलों का भुगतान एक ही स्थान पर कर सकेंगे। 

आरबीआई के गाइडलाइंस में कहा गया है, 'बीबीपीएस एक सिंगल बिल पेमेंट सिस्टम होगा। इस सिस्टम में एजेंटों, विभिन्न पेमेंट सिस्टम और पेमेंट संबंधी जानकारी प्राप्त होने का एक व्यापक नेटवर्क होगा, जिसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा।' इस तरह का नेटवर्क स्थापित करने के लिए आरबीआई द्वारा प्रवर्तित नैशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) को शीर्ष एजेंसी बनाया गया है। 
ध्यान रहे कि एनपीसीआई ने ही रुपे कार्ड जारी किया है। आरबाआई ने बीबीपीएस के तहत अथॉराइज्ड पेमेंट कलेक्शन एजेंट बनने के लिए 100 करोड़ रुपये की नेटवर्थ और घरेलू रजिस्ट्रेशन को जरूरी शर्त रखी है। 
गौरतलब है कि रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने सबसे पहले पिछले साल दूसरी तिमाही मौद्रिक नीति में इस तरह की एकीकृत भुगतान प्रणाली स्थापित किए जाने की मंशा जाहिर की थी। इसके बाद इसके बारे में तौर-तरीके सुझाने के लिए एक समिति गठित की गई। समिति की सिफारिशों के आधार पर 7 अगस्त को दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया गया था। 
ये दिशा-निर्देश रिजर्व बैंक द्वारा भुगतान बैंकों और लघु वित्तीय बैंकों के बारे में अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाने के एक दिन बाद ही जारी किए गए।

Saturday, November 15, 2014

अभियान की बागडोर मेट्रोमैन ई. श्रीधरन को

नए रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेलवे में सुधार की एक अच्छी पहल की है। उन्होंने अपने अभियान की बागडोर मेट्रोमैन ई. श्रीधरन को सौंप दी है। उन्हें उस एक सदस्यीय समिति का प्रमुख बनाया गया है, जो रेलवे के कमर्शल मामलों में जिम्मेदारी और पारदर्शिता लाने के उपाय सुझाएगी।
श्रीधरन की योग्यता और क्षमता पर देश में शायद ही किसी को कोई संदेह होगा। दिल्ली मेट्रो से शुरू करके उन्होंने देश भर में मेट्रो की महत्वाकांक्षा जगा दी और महानगरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का स्वरूप ही बदल डाला। सिर्फ पंद्रह वर्षों में मेट्रो सटीक वक्त पर, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करने का पर्याय बन गई है। श्रीधरन का रेलवे से जुड़ना इसलिए भी उम्मीद जगा रहा है कि वह काम के मामले में कोई समझौता न करने के लिए जाने जाते हैं।
जहां तक भारतीय रेलवे का प्रश्न है तो फिलहाल उसकी ख्याति अपनी अकुशलता, लेट लतीफी और करप्शन के लिए ही है। तमाम सरकारी प्रतिष्ठानों में रेलवे का दर्जा भ्रष्टाचार के मामले में सबसे ऊंचा है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के अनुसार 2013 में उसे करप्शन की सबसे ज्यादा शिकायतें रेलवे से ही मिलीं।

पिछले साल तत्कालीन रेल मंत्री पवन कुमार बंसल को रेलवे के शीर्ष पदों की नियुक्ति में जारी भ्रष्टाचार के चलते ही अपने पद से हाथ धोना पड़ा था। बंसल पर आरोप था कि उन्होंने रिश्वत लेकर एक अधिकारी को रेलवे बोर्ड में रखा। अधिकारी बोर्ड में इसलिए आना चाहते हैं ताकि मोटी घूस के एवज में टेंडर के हेरफेर से मनमाने लोगों को मोटे फायदे पहुंचा सकें। दरअसल राजनेताओं, नौकरशाहों, ठेकेदारों और दलालों का एक गठजोड़ रेलवे को हर साल करोड़ों का चूना लगा रहा है। इसलिए इसमें सुधार के पहले कदम के रूप में सुरेश प्रभु टेंडरिंग प्रोसेस को ही बदलना चाहते हैं।
मौजूदा नियमों के तहत 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर रेलवे बोर्ड के तहत आते हैं और इन्हें मंत्री खुद क्लीयर करते हैं। प्रभु की योजना एक ऐसा पारदर्शी सिस्टम बनाने की है, जिसमें टेंडर और खरीद के मामलों का मंत्री की मेज तक पहुंचना गैरजरूरी हो जाए। वह रेलवे के विकेंद्रीकरण के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि रेलवे बोर्ड के कई अधिकार संबंधित जोन के हवाले कर दिए जाएं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि नौकरशाहों का रोल तब भी बना रहेगा क्योंकि मंत्री न सही, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और बोर्ड के सीनियर मेंबर्स टेंडरिंग प्रोसेस में जीएम पर दबाव डाल ही सकते हैं। देखना यह है कि श्रीधरन इसकी क्या काट ढूंढते हैं। एनडीए सरकार के बाकी मंत्री भी सुरेश प्रभु की तरह प्रयास करें तो अतिशय राजनीतिक होने का आरोप उन पर से हट जाएगा और सरकार की साख बेहतर होने लगेगी।

Sunday, November 9, 2014

कस्टमर्स को एटीएम के जरिए बैंक एग्जेक्यूटिव्स के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सहूलियत

मुंबई की ग्लोबल कंजयूमर ट्रांजैक्शन टेक्नॉलजीज कंपनी एनसीआर ने एक नया इनोवेशन -एप्ट्रा इंटरैक्टिव टेलर- पेश किया है, जो कस्टमर्स को एटीएम के जरिए बैंक एग्जेक्यूटिव्स के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सहूलियत देता है। एनसीआर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर नवरोज दस्तूर ने नई मशीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल बूम के बावजूद कई भारतीय कंजयूमर्स अडवांस्ड बैंकिंग सॉल्यूशंस का इस्तेमाल करने में संकोच करते हैं। 
नए सॉल्यूशंस इस्तेमाल करने को लेकर जागरूकता या जानकारी की कमी व्यक्ति को शंकित करती है। उन्होंने बताया कि मार्केट की जरूरत को समझते हुए हमने इंटरैक्टिव टेलर डिवेलप किया है, जो बैंक कस्टमर्स को सेल्फ सर्विस बैंकिंग और ब्रांच एक्सपीरियंस दोनों की सहूलियत देता है।
 

उन्होंने बताया कि यूनीक सॉल्यूशन होने के कारण यह 24X7 एटीएम पर ही 80 फीसदी से ज्यादा बैंकिंग ट्रांजैक्शन पूरा करने की सुविधा देता है। इंटरैक्ट्रिव टेलर को इंडस्ट्री से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। उन्होंने बताया कि अगस्त में दिल्ली में इंडसइंड बैंक के लिए हमने पहली मशीन लगाई है। हम दूसरे बैंकों के साथ भी इस बारे में बातचीत कर रहे हैं। दस्तूर ने बताया कि यह एटीएम आपको पर्सनलाइज्ड दो-तरफा विडियो-ऑडियो इंटरैक्शन के लिए लाइव और सेंट्रलाइज्ड टेलर से कनेक्ट करते हैं। सॉल्यूशन रेगुलर बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को सपोर्ट करता है। 
विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अलावा यह एटीएम आपको कैश डिपॉजिट, फंड ट्रांसफर, यूटिलिटी बिल पेमेंट्स, इनवेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स की इंक्वायरी की सहूलियत देता है। इसके अलावा, कस्टमर्स ट्रेडिशनल एटीएम कार्ड के बगैर भी अपने आइडेंटिटी कार्ड की स्कैनिंग के जरिए ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रांजैक्शंस के लिए यह पूरी तरह सुरक्षित माध्यम है, क्योंकि इसमें कई स्तर के सिक्योरिटी सॉल्यूशंस हैं। दस्तूर ने बताया कि एनसीआर इंटरैक्टिव टेलर कस्टमर्स को 24X7 सर्विसेज ऑफर करता है। इसमें कस्टमर्स बैंकिंग आवर्स के बाद भी ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।

Wednesday, October 29, 2014

मोबाइल सिम लेने के लिए 'आधार' नंबर को अनिवार्य


केंद्र सरकार मोबाइल सिम लेने के लिए 'आधार' नंबर को अनिवार्य करने की तैयारी में है। वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, 'आधार' परियोजना की समीक्षा के दौरान पाया गया है कि नए और पुराने मोबाइल कनेक्शन के साथ आधार संख्या अनिवार्य करना उचित होगा। इससे फर्जी उपभोक्ताओं को पहचानने और अपराध में मोबाइल के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इस बीच भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने कहा है कि अब तक देश में 70 करोड़ लोगों को आधार कार्ड जारी हो गए हैं। 
आधार प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने महसूस किया कि आधार नंबर को नए और पुराने मोबाइल फोन कनेक्शनों से जोड़ना सही कदम होगा। आधार नंबर को पहचान सत्यापन का एकमात्र जरिया बनाने पर आशंका जाहिर कर चुके गृह मंत्रलय ने हाल में यह कहते हुए इसका समर्थन किया है कि इससे व्यक्ति का किसी भी समय, कहीं भी, कैसे भी सत्यापन मुमकिन है। देश की बड़ी आबादी के पास अभी भी आधार कार्ड नहीं हैं, इसलिए सरकार सिम कार्डों को आधार नंबर से जोड़ने का काम धीमी रफ्तार से आगे बढ़ाएगी। 

इससे पहले यूपीए शासन के दौरान आधार लिंक्ड बैंक अकाउंट को कुकिंग गैस सब्सिडी लेने के लिए अनिवार्य बनाने की योजना अधर में लटक गई थी। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इस प्रोजेक्ट को लागू नहीं किया जा सका था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि सरकार किसी भी नागरिक को महज इस वजह से बेनेफिट देने से इनकार नहीं कर सकती है कि उसके पास आधार नंबर नहीं है।  यूनीक आइडेंटिटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने अभी तक देश में रह रहे 70 करोड़ लोगों को यूनीक आईडी नंबर वाले आधार कार्ड जारी किए हैं। यूआईडीएआई के मुताबिक आंध्र प्रदेश, केरल, दिल्ली, हिमाचल सहित 9 राज्यों में 90 फीसदी लोगों और 16 राज्यों में 70 फीसदी लोगों को आधार कार्ड हासिल हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में आधार के नॉमिनेशन का काम तेज रफ्तार से चल रहा है। दिसंबर तक 100 करोड़ लोगों को आधार नंबर जारी करने का लक्ष्य है। 

Wednesday, October 22, 2014

शुभेच्छा

सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभेच्छा ।


(डॉ. राजेन्द्र कुमार गुप्ता)

Monday, October 20, 2014

सबसे अधिक 6.96 लाख मतों के अंतर चुनाव जीतने का रेकॉर्ड

महाराष्ट्र में बीड सीट पर उपचुनाव में दिवंगत बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे ने इतिहास रचते हुए अब तक सबसे अधिक 6.96 लाख मतों के अंतर चुनाव जीतने का रेकॉर्ड बनाया। 
साल 2004 के चुनाव में सीपीएम के अनिल बसु ने 5.92 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज करके रेकॉर्ड बनाया था, जिसे अब प्रीतम मुंडे तोड़ने में कामयाब रहीं। इस साल के प्रारंभ में हुए लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने 5 लाख 70 हजार से अधिक मतों से गुजरात के वड़ोदरा सीट से जीत दर्ज की थी और वह बसु का रेकॉर्ड तोड़ने से करीब 22 हजार मतों से वंचित रह गए थे। अब उनकी ही पार्टी में प्रीतम मुंडे ने यह रेकॉर्ड तोड़ दिया। 
दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे के निधन के कारण बीड़ सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा, जिसका प्रतिनिधित्व मुंडे कर रहे थे। इस सीट पर 15 अक्टूबर को उपचुनाव कराया गया था। प्रीतम मुंडे ने इस सीट पर अपने निकटमत प्रतिद्वन्द्वी और कांग्रेस उम्मीदवार अशोकराव शंकरराव पाटिल को 6.96 लाख मतों से पराजित किया। प्रीतम को 9,22,416 वोट मिले वहीं पाटिल को 2,26,095 वोट मिले।

Wednesday, October 1, 2014

हर पखवाड़े रेडियो के जरिये लोगों से संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय किया है कि वह हर पखवाड़े रेडियो के जरिये लोगों से संवाद करेंगे। उनके इस फैसले से आकाशवाणी को अपनी रिब्रांडिंग होने की उम्मीद दिख रही है। आकाशवाणी के जरिये लोगों से पीएम की बातचीत की शुरुआत 3 अक्टूबर से होगी। 
जब देश में मास कम्युनिकेशन के साधनों की कमी थी, उस वक्त आकाशवाणी ही लोगों के लिए सूचना का बड़ा स्रोत हुआ करता था। हालांकि, पहले दूरदर्शन, फिर प्राइवेट टीवी चैनलों और बाद में प्राइवेट एफएम रेडियो ने इस सरकारी रेडियो ब्रॉडकास्टर को हाशिये पर धकेल दिया। राजनेता जहां टीवी के जरिये अपनी बात रखना पसंद करते हैं, वहीं रेडियो एंटरटेनमेंट के नाम पर लोगों ने प्राइवेट एफएम चैनलों से नाता जोड़ लिया है। 

पीएम ने केवल आकाशवाणी के जरिये लोगों से बात करने का जो फैसला किया है, उससे इस सरकारी रेडियो ब्रॉडकास्टर की ओर लोगों का ध्यान जरूर मुड़ेगा। आकाशवाणी ने भी इसके लिए पूरी तैयारी में है। इससे वाकिफ अधिकारियों ने बताया कि पीएम के सरकारी आवास 7 रेसकोर्स रोड में आकाशवाणी का एक स्टूडियो बनाया जा रहा है। यहां उसी तरह की सुविधाएं होंगी, जो अमेरिका के राष्ट्रपति के ओवल ऑफिस में हैं। 
एक अधिकारी ने बताया, 'ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जा चुका है।' पीएम की यह चैट तकरीबन पूरे देश में सुनी जाएगी। आकाशवाणी की ब्रैंड इमेज भले ही कमजोर हुई हो, यह अब भी देश में सबसे ज्यादा एरिया कवर करता है। ऑल इंडिया रेडियो की पहुंच देश की 99.20% आबादी तक है। देश के 92.6% भूभाग को यह कवर करता है। 
एआईआर के डायरेक्टर जनरल एफ शहरयार ने कहा, 'प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के मौके पर या कोई आपदा आने की स्थिति में ही रेडियो का उपयोग करते थे। इस बार मामला अलग है। हमें बताया गया है कि पीएम हर पखवाड़े एक बार आकाशवाणी के जरिये लोगों से बातचीत करेंगे।' इस काम में दूरदर्शन भी हाथ बंटाएगा। देश के 90% हिस्से तक पहुंच रखने वाला दूरदर्शन एआईआर की ऑडियो फीड प्रसारित करेगा। 
अधिकारियों ने बताया कि प्राइवेट एफएम चैनल भी एआईआर की फीड प्रसारित कर सकते हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। रेडियो के जरिये नियमित रूप से संवाद की शुरुआत अमेरिका के प्रेसिडेंट फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने की थी। तब रेडियो की वही हैसियत थी, जो आज टीवी की है। महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के असर से जूझ रहे अमेरिकियों से बातचीत में रूजवेल्ट ने रेडियो को जरिया बनाया था। अमेरिकी प्रेजिडेंट रोनाल्ड रीगन ने 1982 में इस परंपरा को दोबारा शुरू किया। मौजूदा अमेरिकी प्रेजिडेंट बराक ओबामा हर हफ्ते विडियो चैट करते हैं।

Monday, September 29, 2014

15 मिनट की भी छुट्टी नहीं ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को न्यू यॉर्क के मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में अपने अमेरिकी दौरे का मेगा शो किया। मोदी, मोदी, मोदी... के शोर के बीच दिए अपने भाषण से मोदी ने वहां मौजूद भारतीय-अमेरिकी समुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। मोदी के भाषण में भारत की तेजी से बदल रही छवि का जिक्र था, तो साथ ही अपनी सरकार द्वारा उठाए कदम भी उन्होंने गिनाए। मोदी ने भाषण के दौरान प्रवासी भारतीयों को तोहफा देते PIO कार्ड होल्डर्स को आजीवन वीज़ा देने का फैसला किया। मोदी ने लंबे समय तक भारत में रहने वालों को पुलिस थाने जाने जाने की की जरूरत को भी खत्म करने की घोषणा की।

खचाखच भरे मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में करीब 19 हजार लोगों की भीड़ के बीच मोदी ने जब अपना भाषण शुरू किया तो  मोदी ने अपने भाषण में भारतीयों के हुनर से बदलती देश की छवि का जिक्र किया।
मोदी ने भारतीय के कौशल के बलबूते देश की बदलती छवि का जिक्र करते हुए कहा, 'एक समय दुनिया हमें सांप-सपेरों का देश मानती थी, आपने सूचना-तकनीकी में जो क्रांति की है उससे देश की छवि बदली है। ताइवान में एक बार किसी ने मुझसे पूछा कि भारत काले जादू और सांप-संपेरों का ही देश है क्या? मैंने कहा- हमारे पूर्वज सांप के साथ खेलते थे, हम तो माउस के साथ खेलते हैं। आप सबने अपने व्यवहार, संस्कार और क्षमता के जरिए अमेरिका में बहुत इज्जत कमाई है, आपके माध्यम से अमेरिका ही नहीं दुनिया में हमारी सकारात्मक पहचान बनी है।
मोदी ने कहा कि उन्होंने चुनाव कुर्सी पाने के लिए नहीं जीता है। चुनाव जीतना जिम्मेदारी होती है। मैंने जब से पीएम पद का दायित्व संभाला है, 15 मिनट भी छुट्टी नहीं ली है। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि आपने जो मुझे दायित्व दिया है, हम कुछ भी ऐसा नहीं करेंगे जिससे आपको नीचा देखने की नौबत आए। मैं लोगों के सपनों का भारत बनाऊंगा।
मोदी ने कहा, 'आप लोगों (NRI) की कभी-कभी इच्छा होती होगी कि अपने माता-पिता को भारत ले जाकर गंगा स्नान करवाएं लेकिन यह इतनी मैली हो चुकी है कि ऐसा करने का आपका मन नहीं करता होगा।' पीएम ने कहा कि गंगा को शुद्ध होना चाहिए और इसके लिए आपकी मदद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गंगा सफाई सिर्फ आस्था नहीं है बल्कि यह जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से भी आवश्यक है।
पीएम मोदी ने भारत के सफल मंगल अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि अहमदाबाद में एक आटो में सफर करने का खर्च 10 रुपए प्रति किलोमीटर है लेकिन मंगल अभियान में इस लाल ग्रह तक का 65 करोड़ किलोमीटर का सफर तय करने में मात्र सात रुपए प्रति किलोमीटर का खर्च आया।
 मोदी ने कहा कि पूरे विश्व के लोग अमेरिका में रहने आते हैं जबकि भारतीय पूरी दुनिया में रहते हैं।मोदी ने प्रवासियों को भारत आने का न्योता दिया और हाल में शुरू अभियान 'मेक इन इंडिया' के तहत बिजनस शुरू करने का आह्वान कहा।

मोदी ने प्रवासी भारतीयों को तोहफा देते हुए कहा कि PIO कार्ड होल्डर्स की वीजा की कई समस्याएं हैं। हमने फैसला किया है कि उन्हें आजीवन वीज़ा दिया जाएगा। लंबे समय तक भारत में रहने वालों को पुलिस थाने जाना पड़ता है, अब ऐसा नहीं करना पड़ेगा। PIO और OCI स्कीम्स में अंतर से कई समस्याएं पैदा होती हैं। हम दोनों को मिला कर एक स्कीम बनाएंगे। जल्द ही वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा भी लॉन्च कर दी जाएगी। पर्यटन के लिए आने वाले यूएस सिटिजंस को लॉन्ग-टर्म वीज़ा मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जन-धन योजना के तहत बैंकों में अबतक करीब 1500 करोड़ रुपए जमा हुए हैं जबकि लोग शून्य धनराशि से भी नया खाता खुलवा सकते थे। पीएम ने कहा कि इस योजना में करीब चार करोड़ नए खाते खोले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में आधे से ज्यादा परिवारों के पास बैंक खाते नहीं है।
देश की विशाल आबादी की एक बड़ी बुनियादी समस्या 'शौचालय' के अभाव को दूर करने के लिए अपने दृष्टिकोण को मोदी ने छोटे आदमी की बड़ी सोच की संज्ञा दी। पीएम मोदी ने कहा कि मैं एक छोटा आदमी हूं और छोटे लोगों के लिए बड़े काम करने की इच्छा रखता हूं।
मोदी ने कहा कि पीएम बनने के बाद जब वह साफ-सफाई और शौचालय आदि बनाने की बात करते हैं तो लोगों को अजीब सा लगता है और वे कहते हैं, 'कोई बड़ा विजन बताओ।' उन्होंने कहा, 'ऐसा कहने पर मैं कहता हूं कि भाई देखिये, छोटा इंसान हूं, सामान्य इंसान हूं। मेरा बचपन ही ऐसा बीता है। छोटा हूं इसीलिए मेरा मन भी छोटे-छोटे काम में लगता है और छोटे-छोटे लोगों के लिए काम करने का मन करता है लेकिन छोटों के लिए बड़े-बड़े काम करने की इच्छा रखता हूं।
प्रधानमंत्री बनने के बाद शौचालय बनाने की बात करने पर लोग सवाल उठाते हैं कि क्या यह पीएम के काम हैं लेकिन मैं नहीं जानता और मैंने तय किया है कि मैं टॉइलेट बनाने के काम करूंगा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को दो बातें प्रिय थी। एक देश को आजादी दिलाना और देश को स्वच्छ बनाना। उन्होंने सवाल किया कि जब गांधीजी ने देश को आजादी दिला दी तो क्या हमारा यह दायित्व नहीं है कि हम भारत को गंदगी से मुक्त करें।
मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि वह नए-नए कानून बनाने के लिए अपनी पीठ थपथपाती थीं जबकि उनकी सरकार ने पुराने पड़ चुके कानूनों को खत्म करने का बीड़ा उठाया है। मोदी ने कहा, 'पहले की सरकारें इस बात पर गर्व किया करती थी कि उन्होंने कितने कानून बनाए लेकिन मैंने इसका उलटा शुरू किया है। मैंने जितने बेकार कानून हैं, सबको खत्म करने का फैसला किया है।
मोदी ने अपने भाषण में लोकसभा चुनाव में भारतीय के योगदान के लिए आभार जताया। मोदी ने कहा, 'आप में से कुछ को ही मतदान का मौका मिला होगा, लेकिन नतीजों के लिए आप में से कोई सोया नहीं होगा। जितना जश्न हिंदुस्तान मना रहा था, उससे भी कई गुना जश्न यहां भारतीय समाज मना रहा था। भारत के चुनाव अभियान में जुड़ने वाले लोगों को मैं थैंक्स कहता हूं। 30 साल के बाद भारत में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी है।'
पीएम ने लोकसभा चुनाव से पहले चुनावी नतीजों के अनुमानों पर तंज कसते हुए कहा,  मोदी ने कहा कि चुनाव जीतने के साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी आ गई है. जबसे मैंने काम संभाला है, 15 मिनट की भी छुट्टी नहीं ली है।

Thursday, September 25, 2014

कोल्ड ड्रिंक्स उत्पादों में 5 पर्सेंट फल का रस मिलाने की कोशिश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेप्सी जैसी सॉफ्ट ड्रिंक्स कंपनियों से कहा है कि वे अपने कोल्ड ड्रिंक्स उत्पादों में 5 पर्सेंट फल का रस मिलाने की कोशिश करें। इससे भारत में मुश्किल में पड़े किसानों को अपने उत्पादों के लिए एक नया बाजार मिल सकेगा।
मोदी ने बुधवार को देश के पहले यूनाइडेट फूड पार्क का उद्घाटन करते हुए कहा, 'हम पेप्सी, कोक पीते हैं और मुझे नहीं पता कि ऐसे कितने और पेय बाजार में उपलब्ध हैं। यह अरबों रुपए का कारोबार है। मैंने कंपनियों से कहा है कि क्या वे अपने ड्रिंक्स में 5 पर्सेंट फ्रूट जूस मिला सकती हैं।'
उन्होंने कहा, 'मैं ज्यादा के लिए नहीं कह रहा। अगर किसानों द्वारा उत्पादित फलों का पांच पर्सेंट रस मिलाया जाता है तो किसान बिक्री के लिए बाजार तलाशने को मजबूर नहीं होंगे। इस तरह के एक ही फैसले से अरबों रुपए का कारोबार सुनिश्चित हो सकता है।'
मोदी ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार के अनुसंधान संगठनों से पहले ही कहा है कि वे कोला ड्रिंक्स में फलों के रस के मिश्रण की संभावना पर काम करें। कोला ड्रिंक्स को आमतौर पर स्वास्थ्यकारी नहीं माना जाता।

Wednesday, September 24, 2014

20 फीसदी सर्कल रेट बढ़ने से लोगों के घर का सपना टूट जाएगा

कांग्रेस ने बढ़े हुए सर्कल रेट को फौरन वापस लेने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि 20 फीसदी सर्कल रेट बढ़ने से लोगों के घर का सपना टूट जाएगा। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार के इशारे पर दिल्ली में सर्कल रेट बढ़ाए गए हैं। दिल्ली वालों को अच्छे दिन दिखाने वाली बीजेपी ने राजधानी के मिडिल क्लास और गरीब लोगों का घर का सपना तोड़ दिया है। अब लोगों के बुरे दिन की शुरुआत हो गई है।
कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि सर्कल रेट बढ़ने से मकान खरीदना तो महंगा हो ही जाएगा, साथ ही किराये पर रहने वाले लोगों का किराया भी महंगा होगा। कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार एक्साइज और वैट में हो रहे रेवेन्यू घाटे की भरपाई सर्कल रेट बढ़ाकर करना चाहती है। सर्कल रेट बढ़ने का सबसे ज्यादा असर राजधानी की 70 फीसदी उस आबादी पर पड़ेगा जो निम्न वर्ग के तहत आती है।

मुकेश ने यह भी आरोप लगाया कि मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के हर इलाके के एक समान सर्कल रेट तय करके वसंत कुंज और उत्तम नगर को एक तराजू में तोला जा रहा है। जबकि दोनों के रेट और मार्केट रेट में जमीन आसमान का अंतर है। कांग्रेस इस फैसले का विरोध करेगी।

Wednesday, September 17, 2014

रेलवे भी पवन चक्कियां लगाने, बिजली बनाने और बांटने का काम नहीं करेगा।

पीएमओ (प्राइम मिनिस्टर ऑफिस) और इंडियन रेलवे इन दिनों गुजरात के एक बुजुर्ग शख्स के अजीबोगरीब आइडिए से जूझ रहे हैं। 81 साल के अहमादाबाद निवासी विपिन त्रिवेदी ने पीएमओ को सुझाव दिया है कि रेलवे ट्रैक पर पवन चक्कियां लगाकर बिजली पैदा की जा सकती है। इनका कहना है कि ट्रेन चलने पर पैदा होने वाली तेज हवा का इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जाना चाहिए।
विपिन त्रिवेदी बैंक ऑफ बड़ौदा की ऐग्रीकल्चर ऐंड रूरल डेवलपमेंट विंग में काम कर चुके हैं। उन्होंने पीएमओ को लिखे लेटर में यह आइडिया सुझाया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीएमओ ने यह मामला रेलवे मंत्रालय को भेजकर इस आइडिए को अमल में लाने की संभावना और इसकी संभावित लागत पर जवाब मांगा है। यही नहीं, रेलवे मंत्रालय से इसकी नियमितअपडेट देने को भी कहा गया है।

पीएमओ से लेटर मिलने के बाद से ही रेलवे मंत्रालय के अधिकारी विपिन त्रिवेदी के साथ बातचीत में लगे हैं। हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने उन्हें बता दिया है कि इस तरह की तकनीक विकसित करना संभव नहीं है लेकिन, उन्हें रेलवे की ओर से तकनीकी जानकारियां लेने को दिल्ली बुलाया जा सकता है। त्रिवेदी का कहना है, एक दिन रेलवे ट्रैक के किनारे टहलते हुए उन्हें यह आइडिया आया। उन्होंने ये आइडिया नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात पावर सेक्टर में काम कर चुके और इस समय पीएमओ में अडिशनल प्रिंसिपल सेक्रटरी के तौर पर तैनात अपने दोस्त के परिचित को भेजा।
त्रिवेदी का कहना है कि अब वह अपने दिल्ली बुलाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। रेलवे अधिकारियों की मानें तो मंत्रालय में किसी को भी त्रिवेदी के आइडिए का सच होना मुश्किल लग रहा है। उन्होंने त्रिवेदी के लेटर के जवाब में उन्हें लिखा, एक ट्रेन सिर्फ 20 सेकेंड में एक पवन चक्की को पार कर लेगी। पवन चक्की से हर 15 मिनट में भी एक ट्रेन गुजरगी तो दिन भर में पवन चक्की सिर्फ 25 मिनट के लिए चल सकेगी। इसमें जितनी बिजली पैदा होगी उससे कहीं ज्यादा लागत आएगी। हालांकि, इसके बाद मिले भेजे लेटर में मंत्रालय के अधिकारियों ने त्रिवेदी से उनके इस आइडिए के तकनीकी पहलुओं पर आगे भी चर्चा करने की बात कही है।
रेलवे अधिकारी इस बारे में पीएमओ को भी जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है, देश में किसी को भी बेहतरी के लिए आइडिया आ सकता है और वह इस बारे में पीएमओ को लिख सकता है। उनके अमल में आने की संभावनाओं की जांच करना हमारा काम है। आईआईएम इलाहाबाद में प्रफेसर और वैकल्पिक ऊर्जा के विशेषज्ञ अनिल गुप्ता का भी कहना है कि यह आइडिया अमल में लाने लायक नहीं है। रेलवे भी पवन चक्कियां लगाने, बिजली बनाने और बांटने का काम नहीं करेगा।

Wednesday, August 13, 2014

काफी समय से लुप्त सरस्वती नदी की खोज

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती काफी समय से लुप्त सरस्वती नदी की खोज में जुट गई हैं। उमा ने कहा कि वह विलुप्त सरस्वती नदी के भूजल प्रवाह का पता लगाने और उसे पुनर्जीवित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने इस विषय पर लोकसभा में पेश ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा, 'मैंने अधिकारियों से कहा है कि वह सरस्वती के मार्ग और उसके भूजल का पता लगा कर इस विलुप्त नदी को पुनर्जीवित करें।'उमा ने कहा, 'यह साबित हो चुका है कि सरस्वती नदी मिथक नहीं है, बल्कि अब ऐसे वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, जो उसके अस्तित्व को साबित करते हैं।'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरस्वती के मार्ग और उसके भूजल की खोज में काफी अनुसंधान हुआ है और खासकर गुजरात में इस दिशा में बड़ा काम हुआ है। उन्होंने सांसदों से विलुप्त सरस्वती नदी के बारे में सूचनाएं साझा करने का आग्रह किया।
उमा भारती ने कहा कि सरस्वती की खोज में कई स्थानों पर कुओं की खुदाई कराई गई है और इस खोज के लिए जगह-जगह खोदे जा रहे कुंओं में से अगर किसी कुएं के जल का 25 प्रतिशत गुण भी सरस्वती से मेल खा गया तो यह मान कर काम आगे बढ़ाया जा सकता है कि विलुप्त नदी का मार्ग वही रहा होगा। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में सरस्वती कूप के जल का भी अनुसंधान किया जा रहा है।
इससे पहले इस विषय पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को पेश करने वाले बीजेपी के रत्न सिंह कटारिया ने कहा कि सरस्वती भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सभ्यता इस ऐतिहासिक नदी से जुड़ी हैं। कटारिया ने कहा कि गुजरात में सरस्वती की खोज में की जा रही कुओं की गहरी खुदाई में मीठा जल मिला है, जिससे लगता है कि वहां सरस्वती का जल प्रवाह है। कटारिया ने मांग की कि सरस्वती की खोज के लिए एक विशेष प्राधिकरण की स्थापना की जाए।

Monday, July 28, 2014

सभी अहम मामलों में 10 अगस्त से पहले कदम

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले आम बजट से लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्हें इसमें कोई बड़ी घोषणा नहीं दिखी। अब मोदी प्रशासन बजट के प्रस्तावों पर तेजी से कदम बढ़ाना चाहता है ताकि अगले कुछ सप्ताहों में इनमें से कुछ को लागू कर दिया जाए। इस कोशिश की वजह यह है कि 15 अगस्त को जब प्रधानमंत्री लाल किले से देश को संबोधित करें तो उनके पास इन योजनाओं के बारे में ठोस रूप से कहने के लिए कुछ हो। 
कैबिनेट सचिव अजित सेठ ने सभी मंत्रालयों और विभागों को सभी अहम मामलों में 10 अगस्त से पहले कदम बढ़ाने को कहा है ताकि स्वतंत्रता दिवस पर पीएम के भाषण की तैयारी की जा सके। 26 मई को पीएम पद की शपथ लेने के बाद मोदी का यह देश के नाम पहला प्रमुख संबोधन होगा और नई सरकार इस मौके पर अपनी उपलब्धियां गिनाना चाहती है। प्रधानमंत्री कार्यालय बजट में की गई घोषणाओं के अमल पर सीधे नजर रख रहा है। वह दूसरे नीतिगत मुद्दों पर कदमों की निगरानी भी कर रहा है।
 

एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, 'इरादा यह है कि कदम जल्द से जल्द बढ़ाए जाएं। ज्यादातर बजट घोषणाओं को फाइनल टच दिया जा रहा है ताकि उन पर अमल 10 अगस्त से पहले शुरू हो जाए।' वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 10 जुलाई को बजट पेश किया था। बजट घोषणाओं को लागू करने के कदमों में आमतौर पर तब तेजी आती है, जब अगला बजट पेश करने का वक्त करीब आए और वित्त मंत्रालय का बजट डिवीजन हालात की समीक्षा करे। हालांकि, इस बार निर्देश बिल्कुल साफ हैं- फाइलें दबाकर न बैठें और निर्णय हो जाए तो उसे तुरंत लागू करें। 
इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर कर कैबिनेट ने इसकी शुरुआत कर दी है। रक्षा और रेलवे सेक्टर से जुड़े फैसले भी जल्द होने की उम्मीद है। बजट घोषणाओं पर काम कर रहे वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'सरकारी गलियारे में इस वक्त जल्द कदम उठाने पर जोर है।' उन्होंने उम्मीद जताई कि सब कुछ समय से कर लिया जाएगा। डिसइनवेस्टमेंट डिपार्टमेंट एसेट-सेल का कैलेंडर बना रहा है।
 
इस बीच, इसने ओएनजीसी और एनएचपीसी में सरकारी हिस्सा बेचने का ऐलान भी कर दिया है। सरकार ने सरकारी कंपनियों में अपना हिस्सा बेचकर 58,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने एक एक्सपेंडिचर मैनेजमेंट कमिशन बनाने का वादा भी किया है, जो सरकारी खर्च का ढर्रा बदलने के सुझाव देगा। वित्त मंत्रालय इस आयोग का ऐलान जल्द कर सकती है। पिछली तारीख से टैक्स लगाने से जुड़े मामलों से निपटने का सिस्टम अगले महीने सामने आ सकता है। साथ ही, इंडस्ट्री से नियमित तौर पर बातचीत के लिए एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई जा सकती है।
 

Friday, July 18, 2014

जाम से मुक्ति दिलाने के लिए मेट्रो चलाने की तैयारी

मेरठ महानगर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए मेट्रो चलाने की तैयारी की जा रही है। शासन ने मेरठ विकास प्रधिकरण को इसके लिए डिटेलड प्रोजेक्ट रिर्पोट( डीपीआर) तैयार करने के लिए कहा है। इसके लिए 50 प्रतिशत धन केंद्र सरकार से मिलेगा और बाकी की व्यवस्था एमडीए को करनी होगी। 
केन्द्र सरकार की इच्छा पर आगरा, कानपुर, वाराणसी और मेरठ में यातायात की बढ़ती समस्या से निबटने के लिए यूपी सरकार इन महानगरों में पब्लिक टांर्स्पोट सिस्टम के तहत मेट्रो रेल चलाने की संभावनाओं पर गहनता से विचार कर रही है। इसी कड़ी में आवास और शहरी नियोजन के विशेष सचिव हरिकांत त्रिपाठी ने एमडीए के वीसी को पत्र लिखकर मेरठ महानगर में मेट्रो चलाए जाने के लिए डीपीआर तैयार करने को कहा है। 10 जुलाई 2014 को जारी किए गए पत्र में लिखा गया है कि प्राधिकरण डीपीआर रिर्पोट तैयार करने के लिए टर्म्स ऑफ रिफरेंस तैयार करके उस पर केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय से अनुमोदन लेगा। गौरतलब है कि शहरी विकास मंत्रालय से अनुमोदन मिलने पर प्रोजेक्ट के लिए केन्द्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की ओर से तय मेट्रो नीति के अनुसार डीपीआर में आने वाले कुल खर्च की 50 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार की ओर से अनुदान में दी जाएगी। जबकि बाकी 50 प्रतिशत धनराशि प्रधिकरण को जुटानी होगी। पत्र में डीपीआर तैयार करते समय मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत आने वाली आवश्यक चीजों का ध्यान रखने के लिए भी कहा गया है। साथ ही शहर की आवशयकता, ट्रैफिक के महत्वपूर्ण पॉइंट्स आदि का घ्यान रखने की हिदायत भी दी गई है। एमडीए के अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हे इस संबंध में शासन से पत्र प्राप्त हो गया है। उनका कहना है कि डीपीआर केंद्र सरकार की एजेंसी से बनवाने पर विचार किया जा रहा है। 

Wednesday, July 16, 2014

ब्रिक्स डिवेलपमेंट बैंक (बीडीबी) की स्थापना पर मुहर

आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पांच सदस्यीय ब्रिक्स देशों के नेताओं से कहा कि वे अभी जो कुछ चुनेंगे वह अंतत: विश्व का भविष्य तय करेगा। 
ब्रिक्स की इस बैठक में ब्रिक्स डिवेलपमेंट बैंक (बीडीबी) की स्थापना पर मुहर लगा दी गई। ब्रिक्स विकास बैंक कई देशों और विकासशील राष्ट्रों में परियोजनाओं का वित्तपोषण करेगा। इस बैंक का मुख्यालय नई दिल्ली या शांघाई में बनाए जाने को लेकर भारत और चीन का अपना अपना दावा है।मोदी के सामने चुनौती है कि वह बीडीबी के गठन में भारत की अहम भूमिका निश्चित करें। इस बैंक का मुख्यालय कहां होगा, इस पर भी फैसला होगा। अगर मोदी इसका मुख्यालय (भारत) नई दिल्ली में रखवा सकें, तो पूरे एशिया में इसका रुतबा बढ़ जाएगा।
 
ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका वाले पांच देशों की शिखर बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि अफगानिस्तान से अफ्रीका तक का क्षेत्र अशांति और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है और जिन देशों को यह सब झेलना पड़ रहा है उनकी दशा पर मूक दर्शक बने रहने के गंभीर परिणाम होंगे।
पहली बार इस शिखर बैठक में भाग ले रहे मोदी ने कहा, 'मेरा दृढ़ विश्वास है कि आतंकवाद, किसी भी रूप और आकार में हो, मानवता के खिलाफ है। आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।'
उन्होंने कहा कि आज हम जो चुनेंगे वह न केवल हमारे देश का भविष्य तय करेगा, बल्कि कुल मिलाकर पूरे विश्व का भविष्य तय करेगा।
प्रधानमंत्री ने साइबर जगत के मुद्दे का जिक्र किया और कहा, 'साइबर जगत अनेक अवसरों का स्रोत है, लेकिन साइबर सुरक्षा एक अहम चिंता का विषय बन चुका है।'
मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को साइबर क्षेत्र को समान वैश्विक हित के लिए बनाए रखने के मामले में अगुआई करनी चाहिए।