Wednesday, August 13, 2014

काफी समय से लुप्त सरस्वती नदी की खोज

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती काफी समय से लुप्त सरस्वती नदी की खोज में जुट गई हैं। उमा ने कहा कि वह विलुप्त सरस्वती नदी के भूजल प्रवाह का पता लगाने और उसे पुनर्जीवित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने इस विषय पर लोकसभा में पेश ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा, 'मैंने अधिकारियों से कहा है कि वह सरस्वती के मार्ग और उसके भूजल का पता लगा कर इस विलुप्त नदी को पुनर्जीवित करें।'उमा ने कहा, 'यह साबित हो चुका है कि सरस्वती नदी मिथक नहीं है, बल्कि अब ऐसे वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, जो उसके अस्तित्व को साबित करते हैं।'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरस्वती के मार्ग और उसके भूजल की खोज में काफी अनुसंधान हुआ है और खासकर गुजरात में इस दिशा में बड़ा काम हुआ है। उन्होंने सांसदों से विलुप्त सरस्वती नदी के बारे में सूचनाएं साझा करने का आग्रह किया।
उमा भारती ने कहा कि सरस्वती की खोज में कई स्थानों पर कुओं की खुदाई कराई गई है और इस खोज के लिए जगह-जगह खोदे जा रहे कुंओं में से अगर किसी कुएं के जल का 25 प्रतिशत गुण भी सरस्वती से मेल खा गया तो यह मान कर काम आगे बढ़ाया जा सकता है कि विलुप्त नदी का मार्ग वही रहा होगा। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में सरस्वती कूप के जल का भी अनुसंधान किया जा रहा है।
इससे पहले इस विषय पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को पेश करने वाले बीजेपी के रत्न सिंह कटारिया ने कहा कि सरस्वती भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सभ्यता इस ऐतिहासिक नदी से जुड़ी हैं। कटारिया ने कहा कि गुजरात में सरस्वती की खोज में की जा रही कुओं की गहरी खुदाई में मीठा जल मिला है, जिससे लगता है कि वहां सरस्वती का जल प्रवाह है। कटारिया ने मांग की कि सरस्वती की खोज के लिए एक विशेष प्राधिकरण की स्थापना की जाए।

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