Sunday, January 27, 2013

मिसाइल का टेस्ट


भारत ने रविवार को पानी के अंदर से छोड़ी जाने वाली न्यूक्लियर क्षमता वाली बैलेस्टिक मिसाइल का टेस्ट किया। इसे बंगाल की खाड़ी के किसी किसी प्लैटफॉर्म से छोड़ा गया। अब भारत विश्व के उन देशों की कतार में खड़ा हो गया है जिनके पास यह टेक्नॉलजी पहले से ही थी। रूस, अमेरिका, चीन और फ्रांस के पास यह क्षमता पहले से ही थी। 
भारत के पास अभी तक जमीन और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की तकनीक थी। इस टेस्ट के बाद अब पानी के अंदर से भी मिसाइल छोड़ने की क्षमता हासिल कर ली गई है। इस मिसाइल को किसी भी सबमैरीन (पनडुब्बी) से छोड़ा जा सकता है। 
डीआरडीओ के चीफ वी. के. सारस्वत ने टेस्ट एरिया के किसी अज्ञात स्थल से पीटीआई को बताया कि मीडियम रेंज की के-5 बैलेस्टिक मिसाइल का टेस्ट आज सफलतापूर्वक कर लिया गया। इस दौरान टेस्ट फायरिंग के सभी पैरामीटर्स का पालन किया गया। 
अन्य अधिकारियों ने बताया कि इस मिसाइल को लेकर 10 से ज्यादा टेस्ट किए गए थे। आज के-5 का आखिरी ट्रायल था। 

Sunday, January 20, 2013

पहले भाषण में पार्टी के कामकाज में जबर्दस्त बदलाव के संकेत


कांग्रेस उपाध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने अपने पहले भाषण में पार्टी के कामकाज में जबर्दस्त बदलाव के संकेत दिए। उनका यह भाषण बेहद भावुक भी रहा। राहुल ने भाषण की शुरुआत संगठन को मजूबत करने, टिकट बंटवारे के ढंग को बदलने, हर वर्कर की आवाज सुनने से की तो उसे खत्म भावुकता के साथ किया। भाषण के आखिर में राहुल ने उपाध्यक्ष बनने के बाद कमरे में आकर सोनिया के भावुक होने और दादी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद का वाकया सुनाया। राहुल ने बताया कि उनके उपाध्यक्ष बनने के बाद कल रात उनकी मां उनके कमरे में आकर रोईं। उन्होंने बताया कि मां इसलिए रोईं क्योंकि वह यह बात समझती हैं कि जो सत्ता हर कोई हासिल करना चाहता है, वह 'जहर' की तरह है। वह ऐसा समझती हैं क्योंकि वह इससे निर्लिप्त हैं। उन्होंने इसके सही इस्तेमाल की बात कही। राहुल का भाषण सुनने के बाद सोनिया गांधी भी भावुक हो गईं।
'आज सुबह मैं चार बजे उठा। मैं बालकनी में गया। वहां काफी अंधेरा था और ठंड थी। उस समय नई जिम्मेदारी के एहसास के साथ कई बातें मेरे जेहन में आईं। इनमें से कुछ मैं आपके साथ शेयर करूंगा। इसमें एक बात 'उम्मीद' की है, तो दूसरी 'पावर' की।
पहले उम्मीद की बात। मैं जब बच्चा था तो मुझे बैडमिंटन बहुत पसंद था। यह खेल इस जटिल दुनिया में मुझे बैलेंस देता था। मैं अपनी दादी के घर में उनकी सुरक्षा में लगे दो पुलिसवालों से इसे सीखा। वे मेरी दादी की सुरक्षा का जिम्मा संभालते थे। वे मेरे दोस्त हो गए थे। एक दिन उन्होंने मेरी दादी को मार दिया और मेरे जीवन का बैलेंस छीन लिया

Friday, January 18, 2013

आईआईएम में पहली बार 'लैटरल्स' प्लेसमेंट शुरू किया गया


 इस महीने की शुरुआत में गूगल इंडिया ने अहमदाबाद और कोलकाता आईआईएम में एक नए ट्रेंड की शुरुआत की। कंपनी 'लैटरल्स' के लिए आयोजित प्लेसमेंट प्रोग्राम में पहुंची और कुछ ग्रैजुएट को हायर किया। आईआईएम में पहली बार 'लैटरल्स' प्लेसमेंट शुरू किया गया है। कैंपस प्लेसमेंट के लिहाज से 'लैटरल्स' के मायने उन स्टूडेंट्स से है, जिनके पास एमबीए करने से पहले कुछ वर्क एक्स्पीरियंस था।

हालांकि, गूगल ने यह बताने से इनकार कर दिया कि 'लैटरल' प्लेसमेंट में उसने कितने ग्रैजुएट हायर किए हैं। लेकिन कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि इस साल कंपनी ने 'लैटरल्स' स्टूडेंट्स की हायरिंग पिछले साल के मुकाबले ज्यादा की है। मुमकिन है कि ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या डबल डिजिट में पहुंच गई हो। इससे पहले कंपनी ने सिर्फ हैदराबाद में आईएसबी में ही एक्स्पीरियंस वाले ग्रैजुएट की हायरिंग की गई थी। आईआईएम में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है।

कम से कम 8 आईआईएम में चल रहे 'लैटरल प्लेसमेंट्स' के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक गूगल जैसी कई दूसरी कंपनियां इकनॉमिक स्लोडाउन से लड़ने के लिए एक्स्पीरियंस प्रोफेशनल्स को जोड़ रही हैं। केपीएमजी इंडिया के पार्टनर और कंट्री हेड (ह्यूमन कैपिटल) गणेश शेरमॉन ने कहा, 'मुश्किल आर्थिक हालात में लैटरल्स ग्रैजुएट की हायरिंग में तेजी आई है।' उन्होंने कहा, 'ऐसे स्टूडेंट्स तेजी से सीखते हैं, आसानी से समाज में घुल-मिल जाते हैं, दूसरों की अच्छी स्किल्स को आसानी से अपना लेते हैं। साथ ही ऐसे ग्रैजुएट में नौकरी छोड़ने की दर काफी कम होती है।'

औसतन, 40-50 फीसदी आईआईएम ग्रैजुएट, जिनके पास कम से कम 10 महीने का वर्किंग एक्स्पीरियंस होता है वे 'लैटरल प्लेसमेंट्स' में शामिल हो सकते हैं। यह मिड दिसंबर से लेकर मिड फरवरी तक चलता है। फाइनल प्लेसमेंट फरवरी और मार्च की शुरुआत में होता है, जब बिना वर्क एक्स्पीरियंस वाले स्टूडेंट्स की हायरिंग की जाती है। आमतौर पर कंपनियां प्लेसमेंट के लिए हर साल दो बार आती हैं।

Wednesday, January 16, 2013

शिवडी-न्हावा शेवा ट्रांस हार्बर लिंक की राह आसान


शिवडी-न्हावा शेवा ट्रांस हार्बर लिंक की राह आसान हो गई है। अब जेएनपीटी इस लिंक को अपनी एनओसी जल्द ही देगी। इस बारे में घोषणा केंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री मिलिंद देवरा ने की। इसके पहले जेएनपीटी इस हार्बर लिंक की ऊंचाई बढ़ाने की मांग को लेकर अड़ा हुआ था। जेएनपीटी इसके अंतिम सिरे पर नया टर्मिनल बनाना चाह रहा था। इसको लेकर पूरा मामला लटका हुआ था। 
मुंबई के शिवड़ी से नवी मुंबई के न्हावा शेवा को जोड़ने वाले इस ब्रिज की संकल्पना सालों पहले ही की गई थी। 22 किमी लंबा यह ब्रिज समुद्र में सबसे बड़ा ब्रिज होगा। 9000 करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना को पहले ही पर्यावरण मंत्रालय से हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बाद मामला जेएनपीटी के पास अटका हुआ था। अब उम्मीद है कि यहां से एनओसी मिलने के बाद इसका काम करने वाली एजेंसी एमएमआरडीए इसके काम को लेकर आगे बढ़ेेगी, ताकि इसी साल में इसका काम शुरू हो सके।

Monday, January 7, 2013

महाराष्ट्र बाकी राज्यों के कहीं आगे


गुजरात के मुकाबले महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट में पिछड़ रहा है, इस दावे से मुख्यमंत्री पृथ्वीराज आजिज आ चुके हैं। सोमवार को उन्होंने नरेंद्र मोदी के गुजरात और अपनी अधीन महाराष्ट्र में हुए 'फॉरन इन्वेस्टमेंट' के सिलसिलेवार आंकड़े ही जारी कर दिए। यह जरूर ध्यान रखा कि 'गुजरात' का अपने बयान में नाम नहीं लिया। बताना नहीं भूले की महाराष्ट्र बाकी राज्यों के कहीं आगे हैं।

केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि कुल विदेशी निवेश में एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी महाराष्ट्र की है। इसके बाद 19 प्रतिशत पर दिल्ली, 6 प्रतिशत पर कर्नाटक और सिर्फ 5 प्रतिशत पर गुजरात का पांचवां नंबर आता है।

पिछले सप्ताह मोदी ने 'वाइब्रेंट गुजरात' का नारा देते हुए अहमदाबाद में फॉरेन इन्वेस्टरों को न्योता दिया था। मुख्यमंत्री चव्हाण की ताजा कार्रवाई इसी का जवाब मानी जा रही है। महाराष्ट्र सरकार ने धड़ल्ले से नई 'इंडस्ट्रियल पॉलिसी' घोषित कर दी। पिछले सात सालों से यह पॉलिसी सरकारी फाइलों में धूल खा रही थी