ये MRVC की आवाज ।
मुंबई यात्री सेवा में,
किए असंभव काज ।
ये MRVC की आवाज .....
था हुआ गठन निन्यानवे में,
है प्रदेश की साझेदारी ।
था लक्ष्य रेल-विकास का,
लाना था परिवर्तन भारी ।।
भीड़भाड़ हो कम ट्रेनों में,
मिले सभी को लाभ ।।
ये MRVC की आवाज ....
मुंबई रेल – प्रणाली विकसित,
मध्य और पश्चिम रेलों पर ।
तिरसठ लाख यात्री प्रतिदिन,
सेवाएं हर एक मिनट पर ।।
अतुलनीय ये दुनियाँ में,
पहने है रेलों का ताज ।।
ये MRVC की आवाज ......
उत्तम नियमित सेवाओं से,
अब प्रतिदिन बढती माँगे ।
नई लाइनें, नये टर्मिनल,
नई दिशाओं की हैं माँगे ।।
हों रेल तंत्र की क्षमता में,
शीघ्र विकास के काज ।।
ये MRVC की आवाज .....
प्रतिकूल विषम स्थितियों में,
यह थी कठिन परीक्षा ।
बाधाएं हर एक कदम पर,
साथ जटिल थी वित्त व्यवस्था ।।
विश्व बैंक से निधि आयोजन,
किया कठिन ये काज ।।
ये MRVC की आवाज ......
संचालन प्रबंध व्यवस्था का,
कंप्यूटरीकृत प्रयोगों से ।
योजनाओं का कार्यान्वयन,
नूतन वैज्ञानिक विधियों से ।।
परिणाम लाये हैं `सहगलजी`
आज हमें है उनपर नाज़ ।।
ये MRVC की आवाज .......
थी अपेक्षा कई वर्षों से,
अब स्वप्न हुए साकार ।
नई डिजाइन के डिब्बों में ,
है सुविधायं कई प्रकार ।।
मुंबई जनता करे प्रशंसा,
MRVC का सौभाग्य ।।
ये MRVC की आवाज .......
नये मार्गों के खुलने से,
बृद्धि हो रही क्षमता में ।
बढती हुई सेवाओं से,
संतुष्टि बढ रही जनता में ।।
लगन और मेहनत का फल,
और नहीं कोई ये राज ।।
ये MRVC की आवाज .....
MRVC के माध्यम से,
मुंबई में हो रहा विकास ।
द्वितीय चरण की स्वीकृति से ,
हों नई दिशा में नये प्रयास ।।
कार्य सभी हों जल्दी पूरें,
आओं हाथ बढायें आज़ ।।
ये MRVC की आवाज .....
`विकास-पथ` पर सदा अग्रसर,
MRVC की सेवाएं ।
करती रहें सदा ये पूरी,
मुंबई जनता की आशाएं ।।
लक्ष्य सदा जनता की सेवा,
हो उन्नत मुबई समाज़ ।
ये MRVC की आवाज ....
द्वारा श्री रमेश भावे,
सचिव/ प्रबंध-निदेशक
मुंबई यात्री सेवा में,
किए असंभव काज ।
ये MRVC की आवाज .....
था हुआ गठन निन्यानवे में,
है प्रदेश की साझेदारी ।
था लक्ष्य रेल-विकास का,
लाना था परिवर्तन भारी ।।
भीड़भाड़ हो कम ट्रेनों में,
मिले सभी को लाभ ।।
ये MRVC की आवाज ....
मुंबई रेल – प्रणाली विकसित,
मध्य और पश्चिम रेलों पर ।
तिरसठ लाख यात्री प्रतिदिन,
सेवाएं हर एक मिनट पर ।।
अतुलनीय ये दुनियाँ में,
पहने है रेलों का ताज ।।
ये MRVC की आवाज ......
उत्तम नियमित सेवाओं से,
अब प्रतिदिन बढती माँगे ।
नई लाइनें, नये टर्मिनल,
नई दिशाओं की हैं माँगे ।।
हों रेल तंत्र की क्षमता में,
शीघ्र विकास के काज ।।
ये MRVC की आवाज .....
प्रतिकूल विषम स्थितियों में,
यह थी कठिन परीक्षा ।
बाधाएं हर एक कदम पर,
साथ जटिल थी वित्त व्यवस्था ।।
विश्व बैंक से निधि आयोजन,
किया कठिन ये काज ।।
ये MRVC की आवाज ......
संचालन प्रबंध व्यवस्था का,
कंप्यूटरीकृत प्रयोगों से ।
योजनाओं का कार्यान्वयन,
नूतन वैज्ञानिक विधियों से ।।
परिणाम लाये हैं `सहगलजी`
आज हमें है उनपर नाज़ ।।
ये MRVC की आवाज .......
थी अपेक्षा कई वर्षों से,
अब स्वप्न हुए साकार ।
नई डिजाइन के डिब्बों में ,
है सुविधायं कई प्रकार ।।
मुंबई जनता करे प्रशंसा,
MRVC का सौभाग्य ।।
ये MRVC की आवाज .......
नये मार्गों के खुलने से,
बृद्धि हो रही क्षमता में ।
बढती हुई सेवाओं से,
संतुष्टि बढ रही जनता में ।।
लगन और मेहनत का फल,
और नहीं कोई ये राज ।।
ये MRVC की आवाज .....
MRVC के माध्यम से,
मुंबई में हो रहा विकास ।
द्वितीय चरण की स्वीकृति से ,
हों नई दिशा में नये प्रयास ।।
कार्य सभी हों जल्दी पूरें,
आओं हाथ बढायें आज़ ।।
ये MRVC की आवाज .....
`विकास-पथ` पर सदा अग्रसर,
MRVC की सेवाएं ।
करती रहें सदा ये पूरी,
मुंबई जनता की आशाएं ।।
लक्ष्य सदा जनता की सेवा,
हो उन्नत मुबई समाज़ ।
ये MRVC की आवाज ....
द्वारा श्री रमेश भावे,
सचिव/ प्रबंध-निदेशक
narayan narayan
ReplyDeleteसुन्दर रचना है बधाई।
ReplyDeleteसुन्दर। शुभकामनाएँ।
ReplyDeletekripayaa word verification ko hataa dijiye..
anaavashyak samauy nasht hotaa hai usame..