Saturday, October 17, 2009

महालक्ष्मी का स्वागत करें

दीपावली सुख और समृद्धि का पर्व है और हर साल यह हमारी जिंदगी में कुछ उम्मीदें लेकर आता है, लेकिन इस साल यह खास है। गुजरे एक बरस में हमने ऐसी अनहोनी झेली, जैसी कहते हैं कि 80 बरस पहले आई थी, लेकिन स्लोडाउन के इस दौर को हमने किसी खेल की तरह गुजार दिया। यह दिवाली इस जीत का जश्न है। तो आइए, एक बार फिर महालक्ष्मी का स्वागत करें और देखें कि ग्लोबल आर्थिक संकट से हमने क्या सीखा। इस अनुभव के आधार पर पेश हैं इन्वेस्टमेंट और वेल्थ क्रिएशन के वे गुर, जिनके पीछे दुनिया के सबसे गुणी मनी मैनिजरों और सबसे बड़े धन कुबेरों का ज्ञान मौजूद है: निवेश जुआ नहीं होता शेयर मार्किट के बारे में लोग एक्स्ट्रीम खयालात रखते हैं। या तो यह कि वहां रातों-रात अमीर हुआ जा सकता है या फिर यह कि स्टॉक इन्वेस्टमंट
तबाही का रास्ता है। दोनों ही खयाल गलत हैं। निवेश जुआ नहीं है, उसे एक साइंस की तरह अपनाना चाहिए। सबसे अच्छे निवेशक भी मानते हैं कि अगर उन्हें एवरेज 20 फीसदी सालाना रिटर्न मिल जाए तो वे खुद को धन्य समझेंगे। गो सिस्टमैटिक बाजार की उठापटक ने बता दिया है कि एक ही झोंक में सब कुछ दांव पर लगा देना कितना खतरनाक होता है। सिस्टमैटिक तरीके से यानी धीरे-धीरे किस्तों में अपना पोर्टफोलियो तैयार कीजिए। याद रहे कोई भी बाजार के टॉप और बॉटम की भविष्यवाणी नहीं कर सकता। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमंट इस रिस्क को कम करता है। जल्दी शुरुआत करें निवेश की शुरुआत जिंदगी में जितने जल्द होगी, उतना बेहतर रहेगा। कम उम्र में जोखिम लिए जा सकते हैं। स्टॉक इन्वेस्टमेंट के लिए यह सही समय होता है। शुरू में बचाई गई छोटी रकम भी वक्त के साथ बड़ा खजाना बन जाती है। पहले यकीन करें अगर आपको भारत और दुनिया के बेहतर भविष्य पर यकीन है, तो निवेश कीजिए। उन कंपनियों को चुनिए जो उस भविष्य में साझीदार होंगी। एक अच्छा इन्वेस्टर होने के लिए आशावाद जरूरी है। उम्मीद ही तो है, जो हमें बचाए रखती है। यह आपका ही पैसा है निवेश का मतलब पैसा लगाकर सो जाना नहीं है। याद रखिए यह आपका ही पैसा है, इसलिए जागरूक बनिए। देश और दुनिया के हालात को समझने की कोशिश कीजिए, कंपनियों की किस्मत पढ़ना जानिए और सबसे बड़ी बात, हर सलाह के पीछे भागने की बजाए उतनी ही कंपनियों में पैसा लगाइए जिन्हें आप नियमित तौर पर ट्रैक कर सकें। सेफ्टी सबसे जरूरी अमीर बनने का ख्वाब देखने में कोई बुराई नहीं, लेकिन इससे जरूरी है अपनी पूंजी को डूबने से बचाए रखना। उन कंपनियों का साथ दीजिए जो टिकाऊ और भरोसेमंद हैं। आप देखेंगे कि लंबी रेस में मजबूत इंजन जीतता है, सेक्सी लुक नहीं।

Sunday, October 4, 2009

काम करेंगे



काम करेंगें, काम करेंगें,
जग में हम कुछ नाम करेंगें.
काम करेंगें, काम करेंगें,
कभी नहीं आराम करेंगें,
रुकने वाला पानी सडता,
रुकने वाला चक्का सडता,
रुकने वाली घडी न चलती,
रुकने वाली कलम न लिखती,
रुकने वाली फौजें हारी,
राह रुकी तो मन्जिल भारी,
हम रुकने की रीत न सीखें,
हम झुकने का गीत न सीखें,
काम करेंगें, काम करेंगें,
जग में हम कुछ नाम करेंगे,
काम करेंगें, काम करेंगें,
रोशन एमआरवीसी का नाम करेंगे.

कांतीलाल शिवराम कसबले
कार्यलय सहायक

Tuesday, September 22, 2009

एमआरवीसी का नाम बढे उससे अधिक काम बढे

देश के कोने कोने में रेल हमारी जाती है
हिंदी भाषा ही जिसको सारे मार्ग दिखाती है ।


यात्री अपने प्रांत के एक दूजे से मिल जाते हैं
यात्रा के दौरान वे सब हिंदी के गुन गाते है ।


मद्रासी हो गुजराती हो यात्री चाहे हो सिंधी
मेल मिलाप की बात चले जब, सबकी भाषा हो हिंदी ।


रेल मिलाती है शहरों को गांवों से देहातो से
तुम भी अपने दिल मिलाओं हिंदी छलके बातों से ।


एक ही भाषा है जो सारे भाषाओं की रानी है
हिंदी में ही काम चले जब सामने हिंदुस्तानी है ।


विकास पथ के पथ पर चलके रेल विकास करना है
तकनीकों का स्वागत करके तकलीफों का नीकास करना है ।


एमआरवीसी का नाम बढे उससे अधिक काम बढे
यात्री जिससे हो संतुष्ट ऐसे प्रयास करना है ।

कलीमुल्ला अ. अजी़म
एमआरवीसी

Saturday, July 4, 2009

मुंबई में विकास जारी रहेगा, बजट में जो प्रावधान है अपेक्षाकृत कम लेकिन समुचित

यह सच है कि मुम्बई को रेल बजट से जो अपेक्षाएं थी, उसके अनुपात में इसे हिस्से में वो माल नहीं आया है, मगर ऐसा भी नहीं है कि रेल बजट के प्रावधानों से मुम्बई एकदम अछूती रहेगी। तकनीकी विश्लेषण पर पता चलता है कि मुम्बई को भी आगे चलकर काफी फायदा होने वाला है। बोरिवली स्टेशन के प्लैटफार्म 6-ए को बनाने के लिए 14.5 करोड़ रुपए की मंजूरी इस बजट में दे दी गई है। इसके अलावा देश के जिन 375 स्टेशनों के कायाकल्प की बात कही गई है, उसमें करीब 38 स्टेशन उपनगरों के हैं। इनमें से प्रमुख स्टेशन है अंधेरी, बांद्रा, बेलापुर, भांडूप, भाईंदर, बोरिवली, चर्नी रोड, चेम्बूर, चर्चगेट, करी रोड, दादर, दहाणू रोड, डाकयार्ड रोड, डोंबिवली, घाटकोपर, गोरेगांव, कर्जत, कसारा, खोपोली, किंग सर्कल, कुर्ला, मालाड, मरीन लाइन्स, माटुंगा, मीरा रोड, मुलुंड, मुम्बई सेंट्रल, नाहुर, नायगांव, पनवेल, सानपाड़ा, सांताक्रुज, सफाले, तिलक नगर, उल्हासनगर, वाणगांव, वाशी, विरार हैं। इन स्टेशनों पर पीने का पानी, प्रसाधन, कैटरिंग सर्विस, वेटिंग रूम और दूसरी बुनियादी सेवाओं को चकाचक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कल्याण में एक नर्सिंग कॉलेज खुलने वाला है। बंगाल के कंचरापारा में जिस 5000 कोच की क्षमता वाले ईएमयू/एमईएमयू के उत्पादन की इकाई खोले जाने की बात कही है, उसका सबसे ज्यादा फायदा मुम्बई को ही मिलने वाला है, क्योंकि यही एक ऐसा शहर है जहां एमईएमयू के ट्रेनों की खपत सबसे ज्यादा होती है। जानकारों के अनुसार सुदूर उपनगरों में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों ऐसे हैं, जिन्हें 'इज्जत' स्कीम का सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा और उन्हें लोकल का पास 25 रुपए में मिल सकेगा। इन सबके बरक्स, मुम्बई से खुलने वाली 11 नई मेल ट्रेनें शुरू की गई हैं 'मुम्बई-दिल्ली युवा ट्रेन' की बात करें तो इसके जरिए महज 299 रुपए में मुम्बई से दिल्ली जाया जा सकता है। मुम्बई को मिले इस 'ट्रीटमेंट' को सही ठहराते हुए सांसद मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि दरअसल सारा दारोमदार मुम्बई की लोकल एजेंसियों, मसलन राज्य सरकार, बीएमसी, एमआरवीसी आदि के ऊपर हैं। वो बताते हैं कि मत भूलिए कि 'रेल मंत्री जी ने साफ तौर पर कहा है कि एमयूटीपी के प्रोजेक्टों को पैसे की कमी नहीं पड़ने दी जाएगी।

Tuesday, June 30, 2009

MRVC की आवाज

ये MRVC की आवाज ।
मुंबई यात्री सेवा में,
किए असंभव काज ।
ये MRVC की आवाज .....

था हुआ गठन निन्यानवे में,
है प्रदेश की साझेदारी ।
था लक्ष्य रेल-विकास का,
लाना था परिवर्तन भारी ।।
भीड़भाड़ हो कम ट्रेनों में,
मिले सभी को लाभ ।।
ये MRVC की आवाज ....

मुंबई रेल – प्रणाली विकसित,
मध्य और पश्चिम रेलों पर ।
तिरसठ लाख यात्री प्रतिदिन,
सेवाएं हर एक मिनट पर ।।
अतुलनीय ये दुनियाँ में,
पहने है रेलों का ताज ।।
ये MRVC की आवाज ......


उत्तम नियमित सेवाओं से,
अब प्रतिदिन बढती माँगे ।
नई लाइनें, नये टर्मिनल,
नई दिशाओं की हैं माँगे ।।
हों रेल तंत्र की क्षमता में,
शीघ्र विकास के काज ।।
ये MRVC की आवाज .....



प्रतिकूल विषम स्थितियों में,
यह थी कठिन परीक्षा ।
बाधाएं हर एक कदम पर,
साथ जटिल थी वित्त व्यवस्था ।।
विश्व बैंक से निधि आयोजन,
किया कठिन ये काज ।।
ये MRVC की आवाज ......


संचालन प्रबंध व्यवस्था का,
कंप्यूटरीकृत प्रयोगों से ।
योजनाओं का कार्यान्वयन,
नूतन वैज्ञानिक विधियों से ।।
परिणाम लाये हैं `सहगलजी`
आज हमें है उनपर नाज़ ।।
ये MRVC की आवाज .......


थी अपेक्षा कई वर्षों से,
अब स्वप्न हुए साकार ।
नई डिजाइन के डिब्बों में ,
है सुविधायं कई प्रकार ।।
मुंबई जनता करे प्रशंसा,
MRVC का सौभाग्य ।।
ये MRVC की आवाज .......


नये मार्गों के खुलने से,
बृद्धि हो रही क्षमता में ।
बढती हुई सेवाओं से,
संतुष्टि बढ रही जनता में ।।
लगन और मेहनत का फल,
और नहीं कोई ये राज ।।

ये MRVC की आवाज .....



MRVC के माध्यम से,
मुंबई में हो रहा विकास ।
द्वितीय चरण की स्वीकृति से ,
हों नई दिशा में नये प्रयास ।।
कार्य सभी हों जल्दी पूरें,
आओं हाथ बढायें आज़ ।।
ये MRVC की आवाज .....


`विकास-पथ` पर सदा अग्रसर,
MRVC की सेवाएं ।
करती रहें सदा ये पूरी,
मुंबई जनता की आशाएं ।।
लक्ष्य सदा जनता की सेवा,
हो उन्नत मुबई समाज़ ।
ये MRVC की आवाज ....

द्वारा श्री रमेश भावे,
सचिव/ प्रबंध-निदेशक

Wednesday, June 3, 2009

मुंबई रेलवे विकास निगम की नई योजनाओं का खुलासा किया गया

हार्बर लाइन पर बढ़ते यात्रियों के बोझ और नवी मुम्बई में लोकल ट्रेनों के ऑपरेशन की संभावनाओं के मद्देनजर राज्य सरकार ने इस रूट पर 12 डिब्बों की लोकल चलाने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है और इसकी संभाव्यता रिपोर्ट (फिजीबिलिटी रिपोर्ट)का आकलन करने के लिए फौरन 1 करोड़ रुपए भी सैंक्शन कर दिया है। फिलहाल इसका पता लगाने के लिए मुम्बई रेल विकास कारपोरेशन (एमआरवीसी) ने इसका अध्ययन कर रही है और जैसे ही यह पूरा हो जाता है, रेलवे बोर्ड के पास इसे अप्रूवल के लिए भेज दिया जाएगा। यही नहीं, सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे के स्टेशनों पर 100-100 एटीवीएम लगाने के खर्च को वहन करने की मां.ग को भी राज्य सरकार ने मंजूर कर लिया है। राज्य सरकार के फैसले पर खुशी का इजहार करते हुए एमआरवीसी के प्रबंध निदेशक डॉ. पी. सी. सहगल ने बताया कि अब जबकि राज्य सरकार ने इस बहुप्रतीक्षित प्रॉजेक्ट को हरी झंडी दिखाते हुए काम आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है, तो हमें पूरी उम्मीद है कि साल 2013 के अंत तक हम हार्बर लाइन पर 12 डिब्बों की लोकल चलाने की पोजीशन में होंगे। हालांकि उनका कहना था कि इस पर पूरी तरह से काम अगले साल ही शुरू हो पाएगा, जब रेल बजट में इसका प्रावधान कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि हार्बर लाइन पर 9 डिब्बों की लोकल को 12 डिब्बों में बदलने का प्रस्ताव एमयूटीपी के फेज-1 और फेज-2 में किया गया था। जहां तक फेज-3 का सवाल है तो इसे साल 2013 तक शुरू कर देने की उम्मीद है, जिस पर अगले 20 सालों में 30,000 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया है। जहां तक 9 डिब्बों की लोकल को 12 डिब्बों की लोकलों में कन्वर्ट करने का सवाल है, तो इसमें प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाना, स्टेबलिंग साइडिंग का एक्सटेंशन, पुलों के स्ट्रक्चर में सुधार, बिजली सप्लाई का प्रावधान, ओवरहेड औजारों की समुचित देखरेख, सिग्नलों को फिर से फिट करना, प्लेटफॉर्म से उनकी शिफ्टिंग और ट्रैकों के सर्किट का मॉडिफिकेशन करना महत्वपूर्ण काम माना जाता है। इसके अलावा 12 डिब्बों के कोचों की उपलब्धता भी एक प्रमुख समस्या मध्य रेल के पास होगी।

Saturday, April 25, 2009

मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन लि

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