देश के कोने कोने में रेल हमारी जाती है
हिंदी भाषा ही जिसको सारे मार्ग दिखाती है ।
यात्री अपने प्रांत के एक दूजे से मिल जाते हैं
यात्रा के दौरान वे सब हिंदी के गुन गाते है ।
मद्रासी हो गुजराती हो यात्री चाहे हो सिंधी
मेल मिलाप की बात चले जब, सबकी भाषा हो हिंदी ।
रेल मिलाती है शहरों को गांवों से देहातो से
तुम भी अपने दिल मिलाओं हिंदी छलके बातों से ।
एक ही भाषा है जो सारे भाषाओं की रानी है
हिंदी में ही काम चले जब सामने हिंदुस्तानी है ।
विकास पथ के पथ पर चलके रेल विकास करना है
तकनीकों का स्वागत करके तकलीफों का नीकास करना है ।
एमआरवीसी का नाम बढे उससे अधिक काम बढे
यात्री जिससे हो संतुष्ट ऐसे प्रयास करना है ।
कलीमुल्ला अ. अजी़म
एमआरवीसी
No comments:
Post a Comment