Wednesday, September 12, 2012

भ्रष्टाचार पर अपने सख्त रुख के लिए नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं


गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी वीजा देने पर सात साल से लगे प्रतिबंध को हटवाने के लिए एक अमेरिकी सांसद ने मुहिम शुरू की है। विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को लिखे पत्र में सांसद ने कहा है, 'जिस बात को लेकर मोदी को वीजा देने से इन्कार किया गया है, उसका कोई आधार नहीं है और यह अमेरिकी कानून से मेल भी नहीं खाता।' सांसद का कहना है कि अमेरिका मोदी से बहुत कुछ सीख सकता है।

इलिनॉयस से रिपब्लिकन सांसद जोए वाल्श ने कहा, 'भ्रष्टाचार पर अपने सख्त रुख के लिए नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनके प्रयासों के चलते ही गुजरात की तरक्की की मिसाल दी जाती है। मोदी को वीजा देने से इनकार करने के बजाय हमें उन्हें अमेरिका आमंत्रित करना चाहिए।

वाल्श एक विवादास्पद हस्ती रहे हैं, जो अपने सरकार विरोधी विचारों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, शिकागो में भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के जो लोग मोदी का समर्थन करते हैं उनके बीच वाल्श बेहद लोकप्रिय हैं।

Friday, September 7, 2012

सूचना एवं प्रसरण राज्यमंत्री एस. जगतरक्षकन ने तो अलॉटमें


 कांग्रेसी नेता सुबोध कांत सहाय और विजय दर्डा के बाद दो और नेताओं का नाता 2005-2009 के बीच कोयला ब्लॉक आवंटन पाने वालीं कंपनियों से जुड़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता प्रेम चंद गुप्ता के बेटों ने उस समय कोयला ब्लॉक के लिए आवेदन किया था जब वह केंद्र सरकार में कंपनी मामलों के मंत्री थे। गुप्ता का बेटा स्टील के कारोबार में बिल्कुल नया था, इसके बावजूद उन्हें ब्लॉक मिल गया।

सूचना एवं प्रसरण राज्यमंत्री एस. जगतरक्षकन ने तो अलॉटमेंट से पांच दिन पहले जेआर पावर नामक कंपनी बनाई और सरकारी कंपनी पुड्डुचेरी इंड्स्ट्रियल प्रमोशन डिवलपमेंट ऐंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (पीआईपीडीआईसी) के साथ एमओयू साइन करके 17 जनवरी 2007 को कोल ब्लॉक के लिए दावेदारी ठोक दी। 25 जुलाई को कंपनी को उड़ीसा के नैनी में कोल ब्लॉक मिल गया और एक महीने के भीतर ही जेआर पावर ने अपनी हिस्सेदारी हैदराबाद की कंपनी केएसके एनर्जी वेंचर्स को बेच दी, जिससे इस कंपनी को ब्लॉक से कोयला निकालने का अधिकार मिल गया।

बाद जगतरक्षकन ने 2009 में चुनाव लड़ने के लिए कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनके परिवार के लोग अभी भी कंपनी के डायरेक्टर हैं। साफ है कि कोर सेक्टर में कोई ट्रैक रेकॉर्ड न होने के बावजूद जेआर पावर को मनमानी पूर्ण तरीके से ब्लॉक आवंटित किए गए और कंपनी ने इसे बेचकर एक महीने के भीतर ही मोटा मुनाफा कमा लिया। खास बात यह है कि जिस पीआईपीडीआईसी के साथ जेआर पावर ने कोल ब्लॉक की दावेदारी जताने के लिए संयुक्त उपक्रम बनाया था वह भी एक इन्वेस्टमेंट कंपनी है।

Thursday, August 23, 2012

यात्रियों की सुविधा के लिए पांच सौ से च्यादा विशेष ट्रेनें

 रेलवे ने त्यौहार और खासकर दुर्गा पूजा के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए पांच सौ से च्यादा विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय किया है। 

उत्तर रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि त्योहार के दौरान उत्तर रेलवे द्वारा कुल मिलाकर 572 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इनमें पटना, गया, दरभंगा, वाराणसी, लखनऊ अमृतसर जम्मू और उधमपुर के लिए विशेष ट्रेनें शामिल हैं। 

Tuesday, March 1, 2011

रेलमंत्री ने मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) की मुंबई की लाइफलाइन को सुधारने के लिए तारीफ की

इसे एक कॉपोर्रेट कंपनी की स्टाइल कह लीजिए या फंड मैनेजमेंट के क्राइसिस की दौर से गुजर रहे रेलवे का सबक, अब रेलवे अपने पहियों को और भी सुचारु रूप से दौड़ाने की प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकारों को अपने साथ लेना चाहती है। वह इस अर्थ में कि मेट्रो सिटीज में रेल ट्रांसपोर्ट अब सिर्फ रेलवे का विषय नहीं रह गया। रेलमंत्री ने मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) की मुंबई की लाइफलाइन को सुधारने के लिए तारीफ की और इसी तर्ज पर दूसरे 4 शहरों (चेन्नै, हैदराबाद, अहमदाबाद, कोलकाता) में ऐसे कार्पोरेशन की स्थापना की बात कही। इससे स्पष्ट है कि अब शहरों का रेल नेटवर्क सुधारने का बोझ रेलवे सिर्फ अपने कंधों पर नहीं, बल्कि राज्य सरकारों पर भी डालना चाहती है। बजट के प्रस्तावों के अनुसार, रेल मंत्री चाहती है कि एमआरवीसी की ही तरह केआरवीसी (कोलकाता रेल विकास कार्पोरेशन) का गठन हो और उसके लिए राज्य सरकार के अलावा बैंक और दूसरी फाइनांस कंपनियां, स्थानीय निकाय तथा दूसरे स्टेकहोल्डर अपनी तरफ से फंड दें। आपको मालूम होगा कि एमआरवीसी रेलवे और राज्य सरकार का एक ज्वाइंट वेंचर है जो रेलवे प्रॉजेक्ट का कार्यान्वयन करती है। प्रॉजेक्ट का खर्च रेलवे और महाराष्ट्र सरकार मिलकर वहन करती हैं। इसका गठन 12 जुलाई 1999 को हुआ था। उस समय मुंबई का रेलवे नेटवर्क अच्छी स्थिति में नही था। फिर एमआरवीसी अस्तित्व में आई और इसने लाइफलाइन के दमघोंटू माहौल में राहत की एक सांस सी भर दी। यूं तो आज मुंबई की लाइफलाइन में काफी सहूलियत की गुंजाइश है, मगर 5 साल पहले की तुलना में यह काफी सुकून देता है। राज्य सरकारों या दूसरे एजेंसियों की आर्थिक सहायता लेने की रेलवे की नीयत को इस बात से भी जाना जा सकता है कि इसी बजट में ममता बनर्जी ने देश के 20 महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों को चकाचक करने के लिए टूरिजम बोर्ड की फिफ्टी-फिफ्टी मदद मांगी है। पश्चिम रेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दरअसल अब वक्त ही ऐसा आ गया है कि किसी भी शहर का रेल ट्रांसपोर्ट सिर्फ रेलवे नहीं कर सकती है। उसमें संबंधित सरकारों या दूसरी फाइनांशल एजेंसियों का समूचा योगदान जरूरी हो गया है। जबकि खुद एमआरवीसी के एमडी पी. सी. सहगल बताते हैं कि रेल मंत्री द्वारा हमारी एजेंसी की तारीफ इस बात की परिचायक है कि अब रेल ट्रांसपोर्ट के प्रॉजेक्टों में सरकारों की आर्थिक सहभागिता बहुत जरूरी हो गई है।

Monday, February 14, 2011

मार्च माह में कुर्ला-ठाणे छठे रेलवे लाइन का काम पूरा हो जाएगा

आगामी मार्च माह में कुर्ला-ठाणे छठे रेलवे लाइन का काम पूरा हो जाएगा और उन पर रेलगाडि़यां दौड़ने लगेंगी। इससे मुंबई में मध्य रेलवे के उपनगरीय यात्रियों को बहुत राहत मिलेगी। पांचवें और छठे रेलवे ट्रैक पर अन्य बिजली के तारों जैसा ही अधिक वोल्टेज वाला विद्युत प्रवाह होने के कारण लोकल यात्रियों को सावधानी बरतनी पड़ेगी। 15 साल से चल रहे इस काम को गत दो वषोर्ं से गति मिली है। दौड़ेंगी लोकल और मेल बिना रुकावट: गत कुछ वर्षों से कुर्ला टर्मिनस से बाहर गांव की लंबी दूरी वाली रेलगाडि़यां छूटती हैं और टमिर्नस होने के कारण वहीं आकर रुकती भी होती हैं। इसलिए मध्य रेलवे की तेज लोकल विद्या विहार के पास आकर या खड़ी रहती हैं या फिर तेज लोकल मंद गति से आगे जा पाती हैं। कई बार लोकल को निकालने के लिए बाहर गांव वाली रेलगाडि़यों को भी विद्याविहार के पास लंबे समय तक रुकना पड़ता है और बिना किसी कारण कुर्ला टमिर्नस तक पहुंचने में घंटों लेट हो जाती हैं। फरवरी के अंत तक मेल ट्रेन चलेगी: मध्य रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि कुछ समय तक दोनों नए ट्रैक पर लोकल रेलगाडि़यां ट्रायल के लिए चलाई जाएंगी। फिलहाल विक्रोली के पास काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। मार्च माह में दोनों नए ट्रैक पर रेलगाडि़यां दौड़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और लगता है कि फरवरी माह के अंत में ही काम पूरा हो जाएगा और इन ट्रैकों पर मेल गाडि़यां दौड़ने लगेंगी। बढ़ जाएगी विक्रोली वासियों की परेशानी: अलबत्ता इससे विक्रोली वासियों की परेशानी बढ़ जाएगी। कारण साफ है विक्रोली क्रासिंग पर फुट ओवर ब्रिज नहीं है और मजबूरन लोगों को रोजाना जान हथेली पर रखकर रेलवे लाइन पार करनी पड़ेगी। फुट ओवर ब्रिज की मांग लेकर विक्रोली वासियों ने आंदोलन भी किया था। पहले ही बेचारे 4-4 रेलवे लाइनें पार कर रहे हैं अब दो और यानि 6 रेलवे लाइन पार करनी पड़ेंगी। 15 साल का समय क्यों लगा: पांचवें और छठे ट्रैक को बनाने के लिए विक्रोली, कांजुरमार्ग के बीच चौथे ट्रैक के पास रहने वाले लोगों के पुनर्वास, विद्याविहार की इमारतों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास सबसे बड़े चुनौती बनकर सामने आए थे। कई साल इसी प्रक्रिया में गुजर गए। स्टेशन के पूर्व में बनी चार इमारतों के पुनर्वास ने बहुत समय खाया। इससे काम में देरी होने के साथ ही योजना का खर्च भी बढ़ता गया।

Monday, January 3, 2011

नववर्ष आपको मंगलमय हो

नववर्ष आपको मंगलमय हो, जीवन पथ पर ज्योतिर्मय जय हो
सत्य न्याय और प्रेम पताका, सुगंध सुवासित नूतन किसलय हो
रहे कोई न शत्रु जग में, हे प्रभुराम प्रेममय जग हो
विपुल कीर्ती भारत की होवे, उच्च तिरंगा प्रखर अमर हो
कर जोर पुन: विनती करता, नववर्ष आपको मंगलमय हो

Thursday, November 11, 2010

दिल्ली ने महाराष्ट्र पर पृथ्वी मिसाइल छोड़ी

महाराष्ट्र की राजनीति में हुए नाटकीय राजनीतिक परिवर्तन के दौरान कुछ नए जुमले और नए नारे गढ़े गए हैं। नए सीएम पृथ्वीराज चव्हाण के बारे में कहा गया कि दिल्ली ने महाराष्ट्र पर पृथ्वी मिसाइल छोड़ी है। यह कहा जा रहा है कि वह सरकार में फैले भ्रष्टाचार को हटाने आए हैं। चव्हाण के गृह क्षेत्र कराड़ में उन्हें 'बाबा' के नाम से पुकारा जाता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अब 'बाबा ' संभालेंगे महाराष्ट्र को। एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार अपने तल्ख तेवर और बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। कार्यकर्ता उन्हें प्यार से 'दादा' कहते हैं। उन्हें उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाने के लिए उत्सुक समर्थकों ने बुधवार सुबह से ये नारे लगाना जारी रखा, 'एक ही वादा, अजित दादा', यह सुनकर एक पत्रकार ने आगे जोड़ा 'एक ही वादा, अजित दादा, मुख्यमंत्री आधा।' चव्हाण हिंदी बहुत अच्छी बोल लेते हैं, जबकि अजित ने अभी-अभी हिंदी बोलना शुरू किया है।