Monday, November 4, 2013

मंगल ग्रह को करीब

 चंद्रयान के बाद अब मंगलयान की बारी है। मंगल ग्रह को करीब से जानने की यह कोशिश अगर कामयाब होती है तो भारत अंतरिक्ष के मामले में एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। जाहिर है,
अभी तक अमेरिका, रूस और यूरोप के कुछ देश (संयुक्त रूप से) ही मंगल की कक्षा में अपने यान भेज पाए हैं। चीन और जापान इस कोशिश में अब तक कामयाब नहीं हो सके हैं। रूस भी अपनी कई असफल कोशिशों के बाद इस मिशन में सफल हो पाया है। अब तक मंगल को जानने के लिए शुरू किए गए दो तिहाई अभियान नाकाम साबित हुए हैं। भारत इस अभियान को अपने दम पर अंजाम तक पहुंचाने की ख्वाहिश रखता है और पूरी दुनिया की नजरें इस पर लगी हुई हैं।
मंगलयान को पिछले महीने 19 अक्टूबर को छोडे़ जाने की योजना थी, लेकिन दक्षिण प्रशांत महासागर क्षेत्र में मौसम खराब होने के कारण यह काम टाल दिया गया। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने अब आज यानी 5 नवंबर को इसे दिन में 2 बजकर 38 मिनट पर छोड़ने का फैसला किया है। इस अभियान को मार्स ऑर्बिटर मिशन नाम दिया गया है। भारत के इस मिशन के लिए सरकार ने इसरो को 3 अगस्त 2012 को मंजूरी दी थी। वैसे, इसके लिए 2011-12 के बजट में ही फंड का प्रावधान कर दिया गया था। भारत की जनता के साथ ही देश के स्पेस साइंटिस्ट्स इस अभियान को लेकर खासे उत्साहित हैं।

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