Tuesday, September 10, 2013

क्या इसे ही विकास कहते हैं ?

 यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में छेड़छाड़ से शुरू हुए विवाद ने ऐसा रंग लिया कि अब तक 36 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 2 युवकों ने अपनी बहन से छेडछाड़ करने वाले की हत्या कर दी और इसके बाद छेड़छाड़ करने वाले युवक के परिजनों ने उन दोनों युवकों को मार डाला। लेकिन, प्रशासन ने हत्या के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में लापरवाही बरती। चूंकि , दोनों पक्ष अलग-अलग समुदायों से ताल्लुक रखते थे, ऐसे में मामले ने मजहबी रंग ले लिया। नतीजा आपके सामने है।
घटना 27 अगस्त की है। एक लड़की ने अपने भाइयों को बताया कि एक युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ की है। लड़की के दोनों भाइयों ने छेड़छाड़ करने वाले लड़के की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। इसके बाद लड़की के दोनों भाइयों ने छेड़छाड़ करने वाले लड़के के परिजनों से समझौते की कोशिश की, मगर गुस्साए परिजनों ने दोनों को पीट-पीटकर मार डाला। दोनों पक्ष अलग-अलग समुदायों से थे। जैसे ही इस घटना की खबर लोगों को हुई, दोनों के समुदायों के बीच तलवारें खिंच गईं।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में लड़की के माता-पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली, जबकि वे मौके पर मौजूद ही नहीं थी। इलाके का बहुसंख्यक समुदाय इस बात से नाराज था कि लड़की के माता-पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ऐसे में लड़की के परिवार से सहानुभूति रखने वालों ने कवाल गांव में 31 अगस्त को एक पंचायत बुलाने की घोषणा की। दूसरे पक्ष ने इसका विरोध करते हुए शहर के खालापार इलाके में उसी दिन अपनी पंचायत बुलाने का फैसला किया।

इलाके के सांसदों, विधायकों और स्थानीय नेताओं ने कवाल पंचायत के आयोजकों को चेतावनी दी कि 31 अगस्त को यह पंचायत नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद प्रशासन ने भी आश्वासन दिया कि खालापार में भी पंचायत नहीं होने दी जाएगी। प्रशासन ने भारतीय किसान यूनियन के नेताओं राकेश और नरेश टिकैत से बातचीत करने के बाद घोषणा की कि प्रस्तावित पंचायत स्थगित कर दी गई है।
कवाल पंचायत के लिए लगभग 40 हजार लोग इक्कट्ठा हो गए थे, लेकिन आयोजनों ने कहा कि पंचायत 7 सितंबर को की जाएगी। 'बेटी बचाओ, बहू बचाओ' पंचायत के सदस्य जब घर लौट रहे थे, तो शाहपुर पुलिस थाने के तहत आने वाले गांव बस्सी में उन पर तलवारों से हमला किया गया। पुलिस ने नैशनल सिक्यॉरिटी ऐक्ट के तहत 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इन लोगों में 7 बहुसंख्यक, जबकि 1 अल्पसंख्यक समुदाय से था। इस खबर के फैलने के बाद शामली और मेरठ जिलों के कुछ इलाकों में दंगा भड़क गया। तब से हालात और बिगड़ते गए और हिंसा दूसरे इलाकों में भी फैल गई। अब हालात पर काबू पाने के लिए सेना का सहारा लेना पड़ रहा है।

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