Tuesday, September 24, 2013

छठ पूजा पर बिहार जाने वाली सभी ट्रेनें फुल

 दशहरा-दिवाली और छठ पूजा पर बिहार जाने वाली सभी ट्रेनें फुल हो चुकी है। यात्रियों को केवल तत्काल टिकटों का सहारा है। इस स्थिति के मद्देनजर रेलवे स्पेशल ट्रेन चलाने का प्लान बना रहा है, ताकि वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को राहत मिल सके। नई दिल्ली से बिहार जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में बिहार संपर्क क्रान्ति, सप्तक्रान्ति, सदभावना, श्रमजीवी, आम्रपाली एक्सप्रेस, तूफान एक्सप्रेस, लालकिला एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस, ब्रहमपुत्र मेल, फरक्का एक्सप्रेस सहित सभी ट्रेनों में त्योहारों पर सीट खाली नहीं है। सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट से यात्री खासे परेशान है। 
रेलवे प्रशासन को भी इसका अहसास है। इसलिए दशहरा, दीपावली और छठ पूजा पर स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए रेलवे बोर्ड को प्रपोजल भेजा गया है। उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली से बिहार में विभिन्न जगहों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने का मसौदा तैयार किया है। इन स्पेशल ट्रेनों की मंजूरी मिलते ही इनकी कम्प्यूटर में फीडिंग कर दी जाएगी। सीपीआरओ नीरज शर्मा ने बताया कि अगले 2 महीने में कई प्रमुख त्योहार होने के कारण ट्रेनों में अचानक भीड़ बढ़ गई है। निकासी के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का प्रपोजल बनाया जा रहा है जिससे यात्रियों को राहत मिल सके। जल्द ही इसकी घोषणा कर दी जायेगी। 
हालांकि एनआर लखनऊ डिवीजन ने स्पेशल ट्रेन चलाने की कोई घोषणा अभी नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि दीपावली के बाद भैया दूज में नई दिल्ली के लिए स्पेशल ट्रेन चला सकती है। जिससे दीपावली के बाद अपने नौकरी स्थल पर जाने वाले यात्रियों को राहत मिल सकती है। सीनियर डीसीएम अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि अभी इस बारे में कुछ तय नहीं किया गया है, लेकिन वेटिंग लिस्ट को देखकर उत्तर रेलवे मुख्यालय से स्पेशल ट्रेन को चलाने के लिए अनुमति मांगी जाएगी। 

Thursday, September 19, 2013

शीर्ष पुलिस अधिकारी एडीजी (लॉ ऐंड ऑर्डर) अरुण कुमार यूपी में काम नहीं करना चाहते

 मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर चौतरफा घिरी उत्तर प्रदेश सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दंगे के दौरान मुजफ्फरनगर में कैंप करके मुस्तैदी से काम करते दिखे उत्तर प्रदेश के शीर्ष पुलिस अधिकारी एडीजी (लॉ ऐंड ऑर्डर) अरुण कुमार यूपी में काम नहीं करना चाहते हैं। प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जाने की अर्जी देने के बाद वह छुट्टी पर चले गए हैं। हालांकि, उन्होंने अर्जी करीब दो महीने पहले दी थी, लेकिन हाल में स्‍मरण पत्र देने से बुधवार को सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। सूत्रों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में वह अपने को फिट नहीं पा रहे हैं।
एडीजी लॉ ऐंड ऑर्डर के पद पर उनकी तैनाती सीएम अखिलेश यादव ने पिछले साल नवम्बर में उस वक्त की थी, जब प्रदेश में कई जिलों में हालत काफी तनाव पूर्ण थे। तब यह उम्मीद थी कि अरुण कुमार पुलिसिया कार्यशैली में बदलाव लाएंगे। अपनी कार्यशैली को लेकर पहचाने जाने वाले अरुण कुमार ने पदभार संभालने के बाद बीटवार ड्यूटी लगाने से लेकर वैज्ञानिक तरीके से तफ्तीश को बढ़ावा देने समेत कई अहम कदम उठाए, लेकिन उनके कुछ फैसलों को दरकिनार कर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से वह असहज महसूस करने लगे।
खासतौर से गोंडा के तत्कालीन एसपी नवनीत राणा के मामले में जो कुछ हुआ उससे वह काफी असहज थे। राणा ने उनके कहने पर प्रदेश सरकार के मंत्री के करीबी पशु तस्कर के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किया, लेकिन बाद में मंत्री के दबाव के चलते राणा को ही हटा दिया गया। सुभाष चंद्र दुबे को भी वह मुजफ्फरनगर खुद लेकर गए थे, लेकिन दुबे के निलंबन से उनको झटका लगा। डीएसपी जियाउल हक की हत्या के बाद उनकी सख्ती भी सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं को नागवार गुजरी। कुछ ऐसा ही नोएडा के एसएसपी शलभ माथुर के मामले में भी हुआ।

Saturday, September 14, 2013

हिन्दी ! भारत- माता के माथे की बिंदी

हिन्दी ! भारत- माता के माथे की बिंदी ! सभी हिन्दी भाषियों को हिदी दिवस की शुभकामनायें ,एवं अहिन्दी भाषियों को हिन्दी भाषा अपनाने का आवाहन ! जय हिन्दी !

Tuesday, September 10, 2013

क्या इसे ही विकास कहते हैं ?

 यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में छेड़छाड़ से शुरू हुए विवाद ने ऐसा रंग लिया कि अब तक 36 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 2 युवकों ने अपनी बहन से छेडछाड़ करने वाले की हत्या कर दी और इसके बाद छेड़छाड़ करने वाले युवक के परिजनों ने उन दोनों युवकों को मार डाला। लेकिन, प्रशासन ने हत्या के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में लापरवाही बरती। चूंकि , दोनों पक्ष अलग-अलग समुदायों से ताल्लुक रखते थे, ऐसे में मामले ने मजहबी रंग ले लिया। नतीजा आपके सामने है।
घटना 27 अगस्त की है। एक लड़की ने अपने भाइयों को बताया कि एक युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ की है। लड़की के दोनों भाइयों ने छेड़छाड़ करने वाले लड़के की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। इसके बाद लड़की के दोनों भाइयों ने छेड़छाड़ करने वाले लड़के के परिजनों से समझौते की कोशिश की, मगर गुस्साए परिजनों ने दोनों को पीट-पीटकर मार डाला। दोनों पक्ष अलग-अलग समुदायों से थे। जैसे ही इस घटना की खबर लोगों को हुई, दोनों के समुदायों के बीच तलवारें खिंच गईं।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में लड़की के माता-पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली, जबकि वे मौके पर मौजूद ही नहीं थी। इलाके का बहुसंख्यक समुदाय इस बात से नाराज था कि लड़की के माता-पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ऐसे में लड़की के परिवार से सहानुभूति रखने वालों ने कवाल गांव में 31 अगस्त को एक पंचायत बुलाने की घोषणा की। दूसरे पक्ष ने इसका विरोध करते हुए शहर के खालापार इलाके में उसी दिन अपनी पंचायत बुलाने का फैसला किया।

इलाके के सांसदों, विधायकों और स्थानीय नेताओं ने कवाल पंचायत के आयोजकों को चेतावनी दी कि 31 अगस्त को यह पंचायत नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद प्रशासन ने भी आश्वासन दिया कि खालापार में भी पंचायत नहीं होने दी जाएगी। प्रशासन ने भारतीय किसान यूनियन के नेताओं राकेश और नरेश टिकैत से बातचीत करने के बाद घोषणा की कि प्रस्तावित पंचायत स्थगित कर दी गई है।
कवाल पंचायत के लिए लगभग 40 हजार लोग इक्कट्ठा हो गए थे, लेकिन आयोजनों ने कहा कि पंचायत 7 सितंबर को की जाएगी। 'बेटी बचाओ, बहू बचाओ' पंचायत के सदस्य जब घर लौट रहे थे, तो शाहपुर पुलिस थाने के तहत आने वाले गांव बस्सी में उन पर तलवारों से हमला किया गया। पुलिस ने नैशनल सिक्यॉरिटी ऐक्ट के तहत 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इन लोगों में 7 बहुसंख्यक, जबकि 1 अल्पसंख्यक समुदाय से था। इस खबर के फैलने के बाद शामली और मेरठ जिलों के कुछ इलाकों में दंगा भड़क गया। तब से हालात और बिगड़ते गए और हिंसा दूसरे इलाकों में भी फैल गई। अब हालात पर काबू पाने के लिए सेना का सहारा लेना पड़ रहा है।