दिल्ली से मेरठ के बीच
हाई स्पीड ट्रेन चलाए जाने के मामले में एनएचएआई की आपत्ति को देखते हुए टे्रन का
रूट चेंज किए जाने पर विचार किया जा रहा है। नए रूट के रूप में दिल्ली से मेरठ के
बीच प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के डिवाइडर पर पिलर बनाने की योजना पर परामर्शी कंपनी
ने विचार करना शुरू कर दिया है। अब तक एनएच- 58 के डिवाइडर पर पिलर बनाने का प्रस्ताव था। अगर रूट में चेंज आया तो
इससे रूट की लंबाई और प्रोजेक्ट खर्चा दोनों बढ़ जाएंगे।
हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दिल्ली के निजामुद्दीन से मेरठ के पल्लवपुरम के बीच हाई स्पीड ट्रेन चलाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद उम्मीद बंधी थी कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। एनएचएआई की आपत्ति ने इस उम्मीद को धंुधला कर दिया है। प्रस्ताव के अनुसार इस ट्रेन को दिल्ली और मेरठ के बीच एनएच-58 के ऊपर से होकर गुजरना था। इसके लिए एनएच-58 के डिवाइडर पर पिलर खड़े किए जाने थे, जिस पर एनएचएआई सहमत नहीं है। उसकी आपत्ति यह है कि प्रोजेक्ट डिजाइन के अनुसार करीब 8 से 10 फुट चौड़ाई के पिलर खड़े किए जाने हैं। चार लेन के एनएच- 58 की चौड़ाई इस समय कुल 15.7 मीटर है, जिसमें से इसके बीच 2.5 मीटर का डिवाइडर बना हुआ है। इस डिवाइडर पर 10 फुट का पिलर खड़े किए जाने के लिए सड़क पर 7.5 मीटर अतिरिक्त जगह की जरूरत पड़ेगी। साथ ही पिलर निर्माण के दौरान कुछ और अतिरिक्त जगह की आवश्यकता होगी।
वर्तमान समय में यह हाइवे ट्रैफिक जाम की समसया से जूझ रहा है। ऐसे में यदि इस रूट पर पिलर बनाए गए तो स्थिति भयावह हो जाएगी। इस समस्या से निबटने के लिए एनएचएआई ने ट्रेन का रूट बदलने की सलाह दी है। उसने अपने सुझाव में एनएच- 58 के स्थान पर दिल्ली के निजामुद्दीन से शुरू होने वाली इस ट्रेन को एनएच-24 से होकर डासना तक लाने और उसके बाद इसे दिल्ली मेरठ के बीच प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के डिवाइडर के ऊपर से गुजारने को कहा है।
सूत्रों का कहना है कि एनएचएआई ने अपना यह सुझाव एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को दे दिया है। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट की परामर्शी कंपनी ने रूट के संशोधन प्लान पर विचार शुरू कर दिया है। अगर रूट का नया संशोधित प्लान मान लिया गया तो हाई स्पीड टे्रन के रूट की लंबाई 97 किमी से बढ़कर 104 किमी हो जाएगी और इस प्रोजेक्ट की लागत 15 हजार करोड़ से बढ़कर 15800 करोड़ हो जाएगी।
हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दिल्ली के निजामुद्दीन से मेरठ के पल्लवपुरम के बीच हाई स्पीड ट्रेन चलाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद उम्मीद बंधी थी कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। एनएचएआई की आपत्ति ने इस उम्मीद को धंुधला कर दिया है। प्रस्ताव के अनुसार इस ट्रेन को दिल्ली और मेरठ के बीच एनएच-58 के ऊपर से होकर गुजरना था। इसके लिए एनएच-58 के डिवाइडर पर पिलर खड़े किए जाने थे, जिस पर एनएचएआई सहमत नहीं है। उसकी आपत्ति यह है कि प्रोजेक्ट डिजाइन के अनुसार करीब 8 से 10 फुट चौड़ाई के पिलर खड़े किए जाने हैं। चार लेन के एनएच- 58 की चौड़ाई इस समय कुल 15.7 मीटर है, जिसमें से इसके बीच 2.5 मीटर का डिवाइडर बना हुआ है। इस डिवाइडर पर 10 फुट का पिलर खड़े किए जाने के लिए सड़क पर 7.5 मीटर अतिरिक्त जगह की जरूरत पड़ेगी। साथ ही पिलर निर्माण के दौरान कुछ और अतिरिक्त जगह की आवश्यकता होगी।
वर्तमान समय में यह हाइवे ट्रैफिक जाम की समसया से जूझ रहा है। ऐसे में यदि इस रूट पर पिलर बनाए गए तो स्थिति भयावह हो जाएगी। इस समस्या से निबटने के लिए एनएचएआई ने ट्रेन का रूट बदलने की सलाह दी है। उसने अपने सुझाव में एनएच- 58 के स्थान पर दिल्ली के निजामुद्दीन से शुरू होने वाली इस ट्रेन को एनएच-24 से होकर डासना तक लाने और उसके बाद इसे दिल्ली मेरठ के बीच प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के डिवाइडर के ऊपर से गुजारने को कहा है।
सूत्रों का कहना है कि एनएचएआई ने अपना यह सुझाव एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को दे दिया है। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट की परामर्शी कंपनी ने रूट के संशोधन प्लान पर विचार शुरू कर दिया है। अगर रूट का नया संशोधित प्लान मान लिया गया तो हाई स्पीड टे्रन के रूट की लंबाई 97 किमी से बढ़कर 104 किमी हो जाएगी और इस प्रोजेक्ट की लागत 15 हजार करोड़ से बढ़कर 15800 करोड़ हो जाएगी।
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