Monday, July 22, 2013

रूट चेंज किए जाने पर विचार

दिल्ली से मेरठ के बीच हाई स्पीड ट्रेन चलाए जाने के मामले में एनएचएआई की आपत्ति को देखते हुए टे्रन का रूट चेंज किए जाने पर विचार किया जा रहा है। नए रूट के रूप में दिल्ली से मेरठ के बीच प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के डिवाइडर पर पिलर बनाने की योजना पर परामर्शी कंपनी ने विचार करना शुरू कर दिया है। अब तक एनएच- 58 के डिवाइडर पर पिलर बनाने का प्रस्ताव था। अगर रूट में चेंज आया तो इससे रूट की लंबाई और प्रोजेक्ट खर्चा दोनों बढ़ जाएंगे। 
हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दिल्ली के निजामुद्दीन से मेरठ के पल्लवपुरम के बीच हाई स्पीड ट्रेन चलाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद उम्मीद बंधी थी कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। एनएचएआई की आपत्ति ने इस उम्मीद को धंुधला कर दिया है। प्रस्ताव के अनुसार इस ट्रेन को दिल्ली और मेरठ के बीच एनएच-58 के ऊपर से होकर गुजरना था। इसके लिए एनएच-58 के डिवाइडर पर पिलर खड़े किए जाने थे, जिस पर एनएचएआई सहमत नहीं है। उसकी आपत्ति यह है कि प्रोजेक्ट डिजाइन के अनुसार करीब 8 से 10 फुट चौड़ाई के पिलर खड़े किए जाने हैं। चार लेन के एनएच- 58 की चौड़ाई इस समय कुल 15.7 मीटर है, जिसमें से इसके बीच 2.5 मीटर का डिवाइडर बना हुआ है। इस डिवाइडर पर 10 फुट का पिलर खड़े किए जाने के लिए सड़क पर 7.5 मीटर अतिरिक्त जगह की जरूरत पड़ेगी। साथ ही पिलर निर्माण के दौरान कुछ और अतिरिक्त जगह की आवश्यकता होगी। 
वर्तमान समय में यह हाइवे ट्रैफिक जाम की समसया से जूझ रहा है। ऐसे में यदि इस रूट पर पिलर बनाए गए तो स्थिति भयावह हो जाएगी। इस समस्या से निबटने के लिए एनएचएआई ने ट्रेन का रूट बदलने की सलाह दी है। उसने अपने सुझाव में एनएच- 58 के स्थान पर दिल्ली के निजामुद्दीन से शुरू होने वाली इस ट्रेन को एनएच-24 से होकर डासना तक लाने और उसके बाद इसे दिल्ली मेरठ के बीच प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के डिवाइडर के ऊपर से गुजारने को कहा है। 
सूत्रों का कहना है कि एनएचएआई ने अपना यह सुझाव एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को दे दिया है। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट की परामर्शी कंपनी ने रूट के संशोधन प्लान पर विचार शुरू कर दिया है। अगर रूट का नया संशोधित प्लान मान लिया गया तो हाई स्पीड टे्रन के रूट की लंबाई 97 किमी से बढ़कर 104 किमी हो जाएगी और इस प्रोजेक्ट की लागत 15 हजार करोड़ से बढ़कर 15800 करोड़ हो जाएगी। 

Wednesday, July 10, 2013

कनॉट प्लेस रीडिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट

नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) के कनॉट प्लेस रीडिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट की कई डेडलाइन मिस करने से भले ही यहां उन पर सवाल उठने लगे हैं, लेकिन फ्रांस में उनके काम की तारीफ हो रही है। कनॉट प्लेस रीडिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट से प्रभावित होकर फ्रांस ने एनडीएमसी डेलिगेशन को पैरिस आने का इन्विटेशन दिया है ताकि वहां के री-जेनरेशन प्रॉजेक्ट पर चर्चा हो सके।

फ्रांस की एंबेसी के जरिए एनडीएमसी को यह इन्विटेशन भेजा गया है। सूत्रों के मुताबिक पैरिस के मेयर ऑफिस के जरिए 'दी ला रिपब्लिक' में अर्बन मेट्रोपॉलिटन री-जेनरेशन प्रॉजेक्ट शुरू किया जाना है। इसी तरह एनडीएमसी ने कनॉट प्लेस में रीडिवेलपमेंट का काम किया है। एनडीएमसी डेलिगेशन को पैरिस में साइट का दौरा करने और तकनीक की जानकारी देने को कहा गया है। पैरिस के मेयर की तरफ से एनडीएमसी डेलिगेशन को जुलाई के तीसरे हफ्ते में इनवाइट किया गया है। एनडीएमसी चेयरपर्सन अर्चना अरोड़ा ने कहा कि डेलिगेशन भेजने पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।

भले ही एनडीएमसी डेलिगेशन को पैरिस में एक्सपर्ट के तौर पर राय लेने के लिए बुलाया जा रहा है लेकिन कनॉट प्लेस प्रॉजेक्ट पर कई डेडलाइन मिस होने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। एनडीएमसी ने 2004 में सीपी रीडिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट के बारे में सोचा और नवंबर 2008 में इस काम को करने के लिए फाइनल अप्रूवल मिल गया। तब इसकी डेडलाइन अक्टूबर 2010 रखी गई थी, यानी कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले काम पूरा होना था। फिर नई डेडलाइन जून 2011 तय की गई और तब से डेडलाइन बढ़ती ही चली गई।