2012 को
अलविदा -- तथा नव वर्ष 2013 की शुभकामनायें । इसी
उम्मीद के साथ कि नव वर्ष महिला उत्पीड़न मुक्त हो ।
Monday, December 31, 2012
Thursday, December 20, 2012
खेती के मामले में भी गुजरात का रेकॉर्ड बेहतरीन
रोजगार,
बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में गुजरात की मिसाल ने मोदी को
विकास पुरुष का दर्जा दे दिया है। खेती के मामले में भी गुजरात का रेकॉर्ड बेहतरीन
है।
मोदी ने एक जुझारू, दबंग और अक्खड़ प्रशासक की स्टाइल से जनता को अपना मुरीद बना लिया है। वे गुजरात के मैचो मैन हैं, जो किसी से नहीं दबते, यहां तक कि अपनी बिरादरी से भी नहीं। वे सख्त बोलने वाले गार्जियन की तरह आदर से देखे जाते हैं। करप्शन के मामले में उनका बेदाग रेकॉर्ड और परिवारवाद से दूरी उन्हें दूसरे नेताओं से अलग कर देते हैं।
मोदी ने गुजराती वोटर को दिल्ली की सियासत पर राज करने का सपना दिखाया है। गुजराती अस्मिता उनकी असरदार थीम रही है। रीजनलिजम का इस तरह इस्तेमाल किसी दूसरे नेता ने नहीं किया। उन्होंने अपने वोटर को ताकतवर होने का अहसास दिलाया है, जो तरक्की का अगला कदम है। गुजरात की इज्जत के नाम पर वे बाहरी हमले का डर दिखाते रहते हैं। यह हमला दिल्ली की सत्ता की तरफ से है, जिसका चेहरा कांग्रेस है।
पूरे देश की तरह गुजरात में भी युवा वोटरों की तादाद बढ़ रही है। इस वोटर के लिए 2002 के दंगे ज्यादा मायने नहीं रखते। उसके लिए तरक्की सबसे अहम है। यह कंज्यूमर जेनरेशन पॉलिटिक्स को एक सर्विस मानती है और मोदी का कस्टमर केयर डिपार्टमेंट बढिय़ा काम कर रहा है। यूथ वोटर गांधी-नेहरू से भी खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं करता, जिसकी याद राहुल गांधी दिलाने की नाकाम कोशिश करते रहे।
डी-लिमिटेशन के बाद गुजरात में शहरी सीटों की तादाद बढ़ गई। शहरी मिडल क्लास में मोदी हिट हैं और इस बार यह लगाव कुछ और बढ़ गया है। वैसे भी बीजेपी को शहरी पार्टी माना जाता रहा है। इस जीत के बाद यह सवाल उठाया भी जाने लगा है कि क्या मोदी के जरिए बीजेपी उस शहरी भारत को फिर से कैप्चर कर सकती है, जिसने इंडिया शाइनिंग के नारे से चिढ़कर उसका साथ छोड़ दिया था। मोदी पूरे भारत में बीजेपी के पुराने वोटर की वापसी करा सकते हैं।
मोदी को उन इलाकों से भी ठीक-ठाक सपोर्ट मिलता दिखा है, जो खिलाफ माने जा रहे थे, जैसे मुस्लिम बहुल और आदिवासी इलाके। हालांकि इस पॉइंट की पूरी छानबीन होनी बाकी है, लेकिन मुमकिन है कि तरक्की के मोदी मंत्र ने उन समुदायों में भी उन्हें एक हद तक पसंदीदा बना दिया हो। बिना किसी का नाम लिए पुरानी गलतियों के लिए मोदी का अब माफी मांगना और आगे कोई गलती न करने का वादा इस बदले हुए माहौल का असर हो सकता है।
मोदी ने एक जुझारू, दबंग और अक्खड़ प्रशासक की स्टाइल से जनता को अपना मुरीद बना लिया है। वे गुजरात के मैचो मैन हैं, जो किसी से नहीं दबते, यहां तक कि अपनी बिरादरी से भी नहीं। वे सख्त बोलने वाले गार्जियन की तरह आदर से देखे जाते हैं। करप्शन के मामले में उनका बेदाग रेकॉर्ड और परिवारवाद से दूरी उन्हें दूसरे नेताओं से अलग कर देते हैं।
मोदी ने गुजराती वोटर को दिल्ली की सियासत पर राज करने का सपना दिखाया है। गुजराती अस्मिता उनकी असरदार थीम रही है। रीजनलिजम का इस तरह इस्तेमाल किसी दूसरे नेता ने नहीं किया। उन्होंने अपने वोटर को ताकतवर होने का अहसास दिलाया है, जो तरक्की का अगला कदम है। गुजरात की इज्जत के नाम पर वे बाहरी हमले का डर दिखाते रहते हैं। यह हमला दिल्ली की सत्ता की तरफ से है, जिसका चेहरा कांग्रेस है।
पूरे देश की तरह गुजरात में भी युवा वोटरों की तादाद बढ़ रही है। इस वोटर के लिए 2002 के दंगे ज्यादा मायने नहीं रखते। उसके लिए तरक्की सबसे अहम है। यह कंज्यूमर जेनरेशन पॉलिटिक्स को एक सर्विस मानती है और मोदी का कस्टमर केयर डिपार्टमेंट बढिय़ा काम कर रहा है। यूथ वोटर गांधी-नेहरू से भी खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं करता, जिसकी याद राहुल गांधी दिलाने की नाकाम कोशिश करते रहे।
डी-लिमिटेशन के बाद गुजरात में शहरी सीटों की तादाद बढ़ गई। शहरी मिडल क्लास में मोदी हिट हैं और इस बार यह लगाव कुछ और बढ़ गया है। वैसे भी बीजेपी को शहरी पार्टी माना जाता रहा है। इस जीत के बाद यह सवाल उठाया भी जाने लगा है कि क्या मोदी के जरिए बीजेपी उस शहरी भारत को फिर से कैप्चर कर सकती है, जिसने इंडिया शाइनिंग के नारे से चिढ़कर उसका साथ छोड़ दिया था। मोदी पूरे भारत में बीजेपी के पुराने वोटर की वापसी करा सकते हैं।
मोदी को उन इलाकों से भी ठीक-ठाक सपोर्ट मिलता दिखा है, जो खिलाफ माने जा रहे थे, जैसे मुस्लिम बहुल और आदिवासी इलाके। हालांकि इस पॉइंट की पूरी छानबीन होनी बाकी है, लेकिन मुमकिन है कि तरक्की के मोदी मंत्र ने उन समुदायों में भी उन्हें एक हद तक पसंदीदा बना दिया हो। बिना किसी का नाम लिए पुरानी गलतियों के लिए मोदी का अब माफी मांगना और आगे कोई गलती न करने का वादा इस बदले हुए माहौल का असर हो सकता है।
Sunday, December 16, 2012
अगले 4-5 महीनों में देश के इससबसे लंबे ब्रिज के निर्माण का काम शुरू
मुंबई के शिवड़ी से न्हावा शेवा तक समंदर के बीचोबीच बननेवाले 22 किमी लंबे ट्रांस हाबॅर लिंक का काम आहिस्ता -आहिस्ता बढ़ने लगा है। पिछले दिनों वित्त मंत्रालय कीनिगहबानी में गठित हाई पॉवर कमिटी द्वारा वायबिलिटी गैपफंडिंग का प्रस्ताव मंजूर करने से इसका काम आगे बढ़ा है औरअब इंतजार है तो एमएमआरडीए द्वारा टेंडर निकालने का।यह तय हो गया है कि 9,630 करोड़ रुपये की लागत वाले इसब्रिज के निर्माण के लिए केंद्र सरकार 20 प्रतिशत अर्थात1,926 करोड़ रुपये केंद्र सरकार बतौर वायबिलिटी गैप फंडपेश करेगी।
उल्लेखनीय यह है कि इस प्रॉजेक्ट के काम में कोई आगे देरी ना हो , इसके लिए खुद मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कोपत्र लिखकर इस पर ध्यान देने का अनुरोध किया है। उन्होंने आशंका जताई है कि कुछ और एजेंसियां केंद्रीय स्तरपर इसमें अड़ंगा डालकर प्रॉजेक्ट के कामकाज में व्यवधान डाल सकती हैं। गौरतलब है कि हाल ही में जेएनपीटीने इस प्रॉजेक्ट पर अपनी तरफ से कुछ आपत्तियां दर्ज की हैं।
देश के सबसे बड़े और बेशकीमती प्रॉजेक्ट के ताजातरीन डिवेलपमेंट के बारे में एमएमआरडीए के एक अधिकारीने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गठित इंपॉवर्ड कमिटी ने ट्रांसहार्बर लिंक के लिए वीजीएफ की संस्तुति दे दी हैऔर अब हम इस ब्रिज के निर्माण के लिए सबसे अहम कदम ' टेंडरिंग ' का काम शुरू करने वाले हैं। उन्होंनेबताया कि हम इस साल की शुरुआत में ही 5 कंपनियों के समूह का चयन कर चुके हैं और उन्हें ब्रिज की डिजाइनऔर अपनी जरूरतों को पेश करने को कह दिया गया है। उन्होंने बताया कि अगले 4-5 महीनों में देश के इससबसे लंबे ब्रिज के निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
उल्लेखनीय यह है कि इस प्रॉजेक्ट के काम में कोई आगे देरी ना हो , इसके लिए खुद मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कोपत्र लिखकर इस पर ध्यान देने का अनुरोध किया है। उन्होंने आशंका जताई है कि कुछ और एजेंसियां केंद्रीय स्तरपर इसमें अड़ंगा डालकर प्रॉजेक्ट के कामकाज में व्यवधान डाल सकती हैं। गौरतलब है कि हाल ही में जेएनपीटीने इस प्रॉजेक्ट पर अपनी तरफ से कुछ आपत्तियां दर्ज की हैं।
देश के सबसे बड़े और बेशकीमती प्रॉजेक्ट के ताजातरीन डिवेलपमेंट के बारे में एमएमआरडीए के एक अधिकारीने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गठित इंपॉवर्ड कमिटी ने ट्रांसहार्बर लिंक के लिए वीजीएफ की संस्तुति दे दी हैऔर अब हम इस ब्रिज के निर्माण के लिए सबसे अहम कदम ' टेंडरिंग ' का काम शुरू करने वाले हैं। उन्होंनेबताया कि हम इस साल की शुरुआत में ही 5 कंपनियों के समूह का चयन कर चुके हैं और उन्हें ब्रिज की डिजाइनऔर अपनी जरूरतों को पेश करने को कह दिया गया है। उन्होंने बताया कि अगले 4-5 महीनों में देश के इससबसे लंबे ब्रिज के निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
Wednesday, December 5, 2012
एनसीपी भी अब महाराष्ट्र में विदेशी किराना खेलने के खिलाफ उठ खड़ी हुई
एसपी-बीएसपी की 'दोस्ती' की बदौलत सरकार ने भले ही लोकसभा में अपनी नैय्या पार लगा ली पर रीटेल में
एफडीआई का लागू होना दूर की कौड़ी लग रही है। एसपी-बीएसपी ने लोकसभा से वॉकआउट
करके सरकार की मदद जरूर की लेकिन वे पहले ही कह चुकी हैं कि उत्तर प्रदेश में इसकी
इजाजत नहीं दी जाएगी। सरकार के साथ लोकसभा में वोट करने वाली सहयोगी पार्टी एनसीपी
भी अब महाराष्ट्र में विदेशी किराना खेलने के खिलाफ उठ खड़ी हुई है।
एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष मधुकर पिचड़ ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज को चिट्ठी लिखकर कहा है कि राज्य में विदेशी किराना खोलने की अनुमति नहीं दी जाए। उन्होंने लिखा है कि एनसीपी को इस पर एतराज है, लिहाजा समन्वय समिति में इस पर चर्चा जरूरी है।
वैसे, भी विदेशी रीटेल स्टोर उन शहरों में ही खोले जा सकते हैं जहां की आबादी 10 लाख से ज्यादा हैं। देश में कुल 51 शहर ही ऐसे हैं। ज्यादातर गैर-कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारें पहले से ही इसके खिलाफ हैं। कांग्रेस के शासन वाला केरल भी पहले ही कह चुका है कि वह अपने यहां इसे लागू नहीं करेगा। ऐसे में फिलहाल 18 शहरों में ही विदेशी रीटेल चेन खोलने का विकल्प बचा था। इन 18 शहरों में से 10 महाराष्ट्र में ही हैं। एनसीपी की आपत्ति के बाद महाराष्ट्र में भी फिलहाल विदेशी किराना फंसता दिख रहा है।
एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष मधुकर पिचड़ ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज को चिट्ठी लिखकर कहा है कि राज्य में विदेशी किराना खोलने की अनुमति नहीं दी जाए। उन्होंने लिखा है कि एनसीपी को इस पर एतराज है, लिहाजा समन्वय समिति में इस पर चर्चा जरूरी है।
वैसे, भी विदेशी रीटेल स्टोर उन शहरों में ही खोले जा सकते हैं जहां की आबादी 10 लाख से ज्यादा हैं। देश में कुल 51 शहर ही ऐसे हैं। ज्यादातर गैर-कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारें पहले से ही इसके खिलाफ हैं। कांग्रेस के शासन वाला केरल भी पहले ही कह चुका है कि वह अपने यहां इसे लागू नहीं करेगा। ऐसे में फिलहाल 18 शहरों में ही विदेशी रीटेल चेन खोलने का विकल्प बचा था। इन 18 शहरों में से 10 महाराष्ट्र में ही हैं। एनसीपी की आपत्ति के बाद महाराष्ट्र में भी फिलहाल विदेशी किराना फंसता दिख रहा है।
लोकसभा में बहस के दौरान भी पार्टियों का अंतर्विरोध
साफ दिख रहा था। 18 में 14 राजनीतिक
दलों ने बहस के दौरान इसका विरोध किया। 21 में 11 राज्य इससे सहमत हैं और सात विरोध में। एनडीए शासित तीन राज्यों गुजरात,
हिमाचल और पंजाब ने लिखित में इस प्रस्ताव का विरोध नहीं किया है
लेकिन मौखिक रूप से कई बार कह चुके हैं कि वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। इस फैसले
पर इतनी ज्यादा सियासत हो गई है कि कांग्रेस की भी कोई राज्य सरकार शायद ही तत्काल
इसे लागू करेगी
Tuesday, November 20, 2012
अजमल आमिर कसाब के शव को यरवदा जेल में दफना दिया गया
आतंकी अजमल आमिर कसाब के शव को यरवदा जेल में दफना
दिया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बताया कि कसाब के शव
को पाकिस्तान को न सौंपकर जेल के अंदर ही दफन कर दिया गया। इससे पहले कयास लग रहे
थे कि कसाब के शरीर को या तो पाकिस्तान के हवाले किया जाएगा, या
ओसामा-बिन-लादेन की ही तरह पर समंदर में दफन किया जाएगा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने जानकारी दी कि कसाब को यरवदा जेल के अंदर ही दफनाया गया है। इस बात के लिए खास इंतजाम किए गए हैं कि कसाब की कब्र की कोई पहचान न हो। मुंबई हमले के दौरान मार गिराए गए कसाब के साथियों के शवों को भी गुमनाम जगह पर दफन किया गया था। उस वक्त समस्या यह थी कि पाकिस्तान ने शव लिए नहीं और भारत में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने अपील की थी आतंकियों को यहां न दफनाया जाए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सुबह बताया था कि पाकिस्तान को इस बारे में एक लेटर भी भेजा गया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया।
कुछ लोग मांग कर रहे थे कि कसाब के शरीर को भारत में दफनाने के बजाए समंदर में दफन कर दिया जाए। आशंका थी कि अगर कसाब को भारत में दफन किया जाता है, तो कट्टरपंथी और राष्ट्र विरोधी लोग उसे हीरो बना सकते हैं। इसी तरह की आशंका के डर से अमेरिका ने 9/11 के गुनहगार ओसामा बिना लादेन को मार गिराने के बाद उसकी डेड बॉडी को समंदर में दफन कर दिया था। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कसाब के शरीर को जेल में दफनाने का फैसला किया, ताकि वहां कोई पहुंच न सके।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने जानकारी दी कि कसाब को यरवदा जेल के अंदर ही दफनाया गया है। इस बात के लिए खास इंतजाम किए गए हैं कि कसाब की कब्र की कोई पहचान न हो। मुंबई हमले के दौरान मार गिराए गए कसाब के साथियों के शवों को भी गुमनाम जगह पर दफन किया गया था। उस वक्त समस्या यह थी कि पाकिस्तान ने शव लिए नहीं और भारत में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने अपील की थी आतंकियों को यहां न दफनाया जाए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सुबह बताया था कि पाकिस्तान को इस बारे में एक लेटर भी भेजा गया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया।
कुछ लोग मांग कर रहे थे कि कसाब के शरीर को भारत में दफनाने के बजाए समंदर में दफन कर दिया जाए। आशंका थी कि अगर कसाब को भारत में दफन किया जाता है, तो कट्टरपंथी और राष्ट्र विरोधी लोग उसे हीरो बना सकते हैं। इसी तरह की आशंका के डर से अमेरिका ने 9/11 के गुनहगार ओसामा बिना लादेन को मार गिराने के बाद उसकी डेड बॉडी को समंदर में दफन कर दिया था। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कसाब के शरीर को जेल में दफनाने का फैसला किया, ताकि वहां कोई पहुंच न सके।
Sunday, November 11, 2012
Tuesday, November 6, 2012
टेलिकॉम इंडस्ट्री के लिए आने वाले दिन काफी अहम
मोबाइल कंस्यूमर्स और टेलिकॉम इंडस्ट्री के लिए आने वाले दिन काफी
अहम होने वाले हैं। ये फैसले तय करेंगे कि भविष्य में उन्हें कौन सी नई सुविधा मिल
सकती है या कहां कठिनाई हो सकती है।
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, नब्बे के दशक में देश में मोबाइल क्रांति आने के बाद पहली बार यह सेक्टर बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसका असर मोबाइल उपभोक्ताओं पर भी पड़ना तय है। अभी देश में तकरीबन 91 करोड़ मोबाइल यूजर्स हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया भर में सबसे सस्ती सेवा पाने वाले देशों में शामिल है।
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, नब्बे के दशक में देश में मोबाइल क्रांति आने के बाद पहली बार यह सेक्टर बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसका असर मोबाइल उपभोक्ताओं पर भी पड़ना तय है। अभी देश में तकरीबन 91 करोड़ मोबाइल यूजर्स हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया भर में सबसे सस्ती सेवा पाने वाले देशों में शामिल है।
Wednesday, October 31, 2012
मुंबई - ट्रांस हार्बर लिंक - आगेबढ़ाने की दिशा में एक और सकारात्मक कदम
देश के सबसे बड़े 22 किमी का समुद्री संपर्कमार्ग मुंबई - ट्रांस हार्बर लिंक ( एमटीएचएल ) का काम आगेबढ़ाने की दिशा में एक और सकारात्मक कदम उठाया गया है।वह कि अब केंद्र सरकार इस परियोजना में आने वाले लागतकी 20 फीसदी रकम खर्च करने को तैयार हो गया है। चूंकिअभी हाल ही में इस प्रॉजेक्ट की लागत 8,800 करोड़ सेबढ़ाकर 9,600 करोड़ कर दी गई थी , अत : अब केंद्र सरकारने इस प्रॉजेक्ट पर 1,920 रुपये खर्च करने की हामी भर दीहै। इसका फैसला केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने दिल्ली में मंगलवारको लिया। इस प्रॉजेक्ट की नोडल एजेंसी एमएमआरडीए के कमिश्नर राहुल अस्थाना ने प्रॉजेक्ट के डिटेल्स कीब्रीफिंग वित्त मंत्रालय द्वारा गठित इंपॉवर्ड कमिटी के अधिकारियों को की। चूंकि इस पूरे प्रॉजेक्ट का 20 प्रतिशतखर्च राज्य सरकार ही अदा करने वाली है , अत : बाकी का 60 प्रतिशत रकम उस कंपनी को वहन करना होगा ,जो इसका टेंडर हथियाएगी।
इस प्रॉजेक्ट के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि अब इसे वन और पर्यावरण मंत्रालय से भी हरी झंडी मिलगई है और इस परियोजना पर जनवरी , 2013 से काम शुरू होने की संभावना है। जब यह ब्रिज 2017 तकबनकर पूरा हो जाएगा तो यह मुंबई में राजीव गांधी बांद्रा - वर्ली सी लिंक के बाद अरब सागर में यह दूसरा औरदेश का सबसे बड़ा 22 किलोमीटर लंबा पुल होगा। दक्षिण मुम्बई के शिवड़ी से शुरू होने वाला छह लेन का यहसमुद्री सम्पर्क मार्ग ठाणे क्रीक से होते हुए रायगढ़ जिले के पास स्थित न्हावा शेवा के पास चर्ली गांव में समाप्त होजाएगा। एमएमआरडीए के एक अधिकारी के मुताबिक कवठकर ने कहा कि अगले दो - तीन महीनों में जरूरीऔपचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद हमें आशा है कि जनवरी , 2013 से इस पर काम शुरू हो जाएगा। फिलहालशिवडी - न्हावा शेवा लिंक परियोजना के लिए टेंडर मंगाए जा चुके हैं और पांच कंपनियों को शार्ट लिस्ट भीकिया गया है। ज्यादा संभावना है कि अगले महीने तक इन कंपनियों से प्रॅपोजल मंगा लिया जाएगा।
इस प्रॉजेक्ट के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि अब इसे वन और पर्यावरण मंत्रालय से भी हरी झंडी मिलगई है और इस परियोजना पर जनवरी , 2013 से काम शुरू होने की संभावना है। जब यह ब्रिज 2017 तकबनकर पूरा हो जाएगा तो यह मुंबई में राजीव गांधी बांद्रा - वर्ली सी लिंक के बाद अरब सागर में यह दूसरा औरदेश का सबसे बड़ा 22 किलोमीटर लंबा पुल होगा। दक्षिण मुम्बई के शिवड़ी से शुरू होने वाला छह लेन का यहसमुद्री सम्पर्क मार्ग ठाणे क्रीक से होते हुए रायगढ़ जिले के पास स्थित न्हावा शेवा के पास चर्ली गांव में समाप्त होजाएगा। एमएमआरडीए के एक अधिकारी के मुताबिक कवठकर ने कहा कि अगले दो - तीन महीनों में जरूरीऔपचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद हमें आशा है कि जनवरी , 2013 से इस पर काम शुरू हो जाएगा। फिलहालशिवडी - न्हावा शेवा लिंक परियोजना के लिए टेंडर मंगाए जा चुके हैं और पांच कंपनियों को शार्ट लिस्ट भीकिया गया है। ज्यादा संभावना है कि अगले महीने तक इन कंपनियों से प्रॅपोजल मंगा लिया जाएगा।
Sunday, October 21, 2012
दो नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा
ठाणे से पनवेल के बीच चलने वाली ट्रांस-हार्बर लिंक रूट पर दिघा और बोनकोड़े के रूप में दो नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। इनके बनने से दो से तीन लाख यात्रियों को फायदा होगा। केंद्रीय रेलवे बोर्ड ने सैद्धांतिक रुप ले इसकी मंजूरी दे दी है।
ठाणे के सांसद डॉ. संजीव नाईक से मिली जानकारी के अनुसार ठाणे से वाशी होकर पनवेल तक जाने वाले ट्रांस हार्बर लिंक रूट पर दिघा व बोनकोड़े स्टेशनों की मंजूरी इसी 18 अक्टूबर को रेलवे के मुख्य प्रबंधक सुबोध कुमार के साथ हुई बैठक में घोषित की गई। इस बैठक में छहों सांसदों समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
ठाणे के सांसद डॉ. संजीव नाईक से मिली जानकारी के अनुसार ठाणे से वाशी होकर पनवेल तक जाने वाले ट्रांस हार्बर लिंक रूट पर दिघा व बोनकोड़े स्टेशनों की मंजूरी इसी 18 अक्टूबर को रेलवे के मुख्य प्रबंधक सुबोध कुमार के साथ हुई बैठक में घोषित की गई। इस बैठक में छहों सांसदों समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
Friday, October 12, 2012
हमारी भाषा खो गई तो सब कुछ खो जा जाएगा
सार्क देशों का
भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काफी सुनहरा भविष्य है। कंप्यूटिंग टेक्नॉलजी
में लोगों की रुचि काफी बढ़ी है। पीसी और इंटरनेट का तेजी से विस्तार आफिस तक ही
सीमित नहीं। यह घर-घर तक पहुंच चुका है। लोगों में आगे बढ़ने और नई तकनीक अपनाने
की ललक दिखाई देती है। मुझे विश्वास है कि निरंतर विकास करती हमारी टेक्नॉलजी
सार्क देशों को अपनी भाषा के प्रसार के लिए नई दिशा प्रदान करती रहेगी। इस स्थिति
को और विकसित करने एवं बढ़ाने की आवश्यकता है। सार्क देशों में कंप्यूटर और उसके
प्रयोग की असीम संभावनाएं हैं। बहुत सारी पुस्तकें, पत्रिकाएं ऑडियो प्रशिक्षण सामग्री तथा प्रशिक्षण केंद्र का विस्तार
किया जाना चाहिए
Monday, October 8, 2012
15 डिब्बों की 16 सर्वि
यात्रियों की बढ़ती हुई
भीड़ और मांग के बाद सेंट्रल रेलवे 15 अक्टूबर से पहली बार 15 डिब्बों की 16 सर्विस चलाएगी। इसके साथ ही सेंट्रल रेलवे की मेन लाइन पर चलने वाली
लोकल सर्विस की संख्या 785 से 803 हो जाएगी।
सभी 15 डिब्बों की सर्विस फास्ट लोकल होंगी। इन बढ़ाई गई सर्विस में से पीक ऑवर्स में पांच सर्विस चलाई जाएंगी। इसके अलावा सेंट्रल रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली 206 फास्ट लोकल सेवाओं की संख्या बढ़ाकर 233 कर दी जाएगी।
सभी 15 डिब्बों की सर्विस फास्ट लोकल होंगी। इन बढ़ाई गई सर्विस में से पीक ऑवर्स में पांच सर्विस चलाई जाएंगी। इसके अलावा सेंट्रल रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली 206 फास्ट लोकल सेवाओं की संख्या बढ़ाकर 233 कर दी जाएगी।
Monday, September 24, 2012
प्रॉपर्टी की कीमतों में आग लगी हुई है
रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट देश में सबसे फायदे
वाला सौदा है। नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में तो यह बात और सही है, जहां प्रॉपर्टी
की कीमतों में आग लगी हुई है। अगर लॉन्ग टर्म में ओवरऑल रिटर्न की बात करें,
तो 15 साल में कोई भी प्रॉपर्टी आपको 15
फीसदी सीएजीआर से रिटर्न दे सकती है। इस तरह का रिटर्न किसी भी ऐसेट
से मिलना मुश्किल है। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि दिल्ली
और मुंबई में कीमतें इस लेवल पर पहुंच चुकी हैं कि अब इन शहरों में प्रॉपर्टी में
इन्वेस्टमेंट से बेहतर रिटर्न हासिल करना मुमकिन नहीं है। हालांकि, अगर आप लॉन्ग टर्म रिकॉर्ड्स देखेंगे तो ऊंची कीमतों के बावजूद रिटर्न
बेहतर रहा है।
अभी बैंक इंटरेस्ट रेट घटा रहे हैं। इससे घर खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में पहले से तेज प्रॉपर्टी की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगी। लिहाजा, आप पर्सनल यूज या इन्वेस्टमेंट के लिए घर खरीदना चाहते हैं, तो कीमतें घटने का इंतजार करना आपके लिए ठीक नहीं होगा। अगर आप प्रॉपर्टी में पैसा लगाने चाहते हैं, तो लॉन्ग टर्म प्लान बेहतर रहेगा। एनसीआर में पिछले कुछ सालों में किराए में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अगर आप रेंटल इनकम की बात करें, तो घर खरीदने के लिए आपका इन्वेस्टमेंट काफी कम पड़ता है। मिसाल के तौर पर, अगर आप एक करोड़ का घर खरीदते हैं तो 20 साल के लिए 10 फीसदी इंटरेस्ट के हिसाब से आपकी ईएमआई 96,502 रुपए होगी। इसमें से 83,333 रुपए पहले महीने ब्याज के तौर पर एडजस्ट हो जाएंगे और 13,169 रुपए की भरपाई प्रिंसिपल में होगी।
लिहाजा, अगले महीने प्रिंसिपल घटकर 1 करोड़ के बजाय 99,86,331 रुपए हो जाएगा और अगले महीने ब्याज घटकर 83,224 रुपए। इस तरीके से ब्याज का बोझ घटता जाएगा, जिससे ईएमआई का बड़ा हिस्सा प्रिंसिपल के तौर पर अजस्ट करने में मदद मिलेगी। वहीं, अपार्टमेंट का ऐनुअल रेंटल कैपिटल वैल्यू का 2.5 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी हो जाएगा। इस हिसाब से 1 करोड़ के फ्लैट पर 25,000 रुपए सालाना किराया आपको मिल सकेगा। इससे आपको ब्याज खर्च कम करने में मदद मिलेगी। किराए में आमतौर पर सालाना 10 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। हालांकि, अगर इसे सिर्फ 5 फीसदी भी मान कर चलें, तो इससे इंटरेस्ट का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। 14वें साल के अंत तक फ्लैट का किराया ईएमआई के इंटरेस्ट वाले हिस्से से ज्यादा होगा। कुल मिलाकर अगर आप रेंटल इनकम को शामिल कर प्रॉपर्टी में रिटर्न का अंदाजा लगाते हैं, तो यह कम से कम 15 फीसदी सीएजीआर के दायरे में होगा।
अभी बैंक इंटरेस्ट रेट घटा रहे हैं। इससे घर खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में पहले से तेज प्रॉपर्टी की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगी। लिहाजा, आप पर्सनल यूज या इन्वेस्टमेंट के लिए घर खरीदना चाहते हैं, तो कीमतें घटने का इंतजार करना आपके लिए ठीक नहीं होगा। अगर आप प्रॉपर्टी में पैसा लगाने चाहते हैं, तो लॉन्ग टर्म प्लान बेहतर रहेगा। एनसीआर में पिछले कुछ सालों में किराए में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अगर आप रेंटल इनकम की बात करें, तो घर खरीदने के लिए आपका इन्वेस्टमेंट काफी कम पड़ता है। मिसाल के तौर पर, अगर आप एक करोड़ का घर खरीदते हैं तो 20 साल के लिए 10 फीसदी इंटरेस्ट के हिसाब से आपकी ईएमआई 96,502 रुपए होगी। इसमें से 83,333 रुपए पहले महीने ब्याज के तौर पर एडजस्ट हो जाएंगे और 13,169 रुपए की भरपाई प्रिंसिपल में होगी।
लिहाजा, अगले महीने प्रिंसिपल घटकर 1 करोड़ के बजाय 99,86,331 रुपए हो जाएगा और अगले महीने ब्याज घटकर 83,224 रुपए। इस तरीके से ब्याज का बोझ घटता जाएगा, जिससे ईएमआई का बड़ा हिस्सा प्रिंसिपल के तौर पर अजस्ट करने में मदद मिलेगी। वहीं, अपार्टमेंट का ऐनुअल रेंटल कैपिटल वैल्यू का 2.5 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी हो जाएगा। इस हिसाब से 1 करोड़ के फ्लैट पर 25,000 रुपए सालाना किराया आपको मिल सकेगा। इससे आपको ब्याज खर्च कम करने में मदद मिलेगी। किराए में आमतौर पर सालाना 10 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। हालांकि, अगर इसे सिर्फ 5 फीसदी भी मान कर चलें, तो इससे इंटरेस्ट का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। 14वें साल के अंत तक फ्लैट का किराया ईएमआई के इंटरेस्ट वाले हिस्से से ज्यादा होगा। कुल मिलाकर अगर आप रेंटल इनकम को शामिल कर प्रॉपर्टी में रिटर्न का अंदाजा लगाते हैं, तो यह कम से कम 15 फीसदी सीएजीआर के दायरे में होगा।
Wednesday, September 12, 2012
भ्रष्टाचार पर अपने सख्त रुख के लिए नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं
गुजरात के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी को अमेरिकी वीजा देने पर सात साल से लगे प्रतिबंध को हटवाने के लिए
एक अमेरिकी सांसद ने मुहिम शुरू की है। विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को लिखे पत्र
में सांसद ने कहा है, 'जिस
बात को लेकर मोदी को वीजा देने से इन्कार किया गया है, उसका
कोई आधार नहीं है और यह अमेरिकी कानून से मेल भी नहीं खाता।' सांसद का कहना है कि अमेरिका मोदी से बहुत कुछ सीख सकता है।
इलिनॉयस से रिपब्लिकन सांसद जोए वाल्श ने कहा, 'भ्रष्टाचार पर अपने सख्त रुख के लिए नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनके प्रयासों के चलते ही गुजरात की तरक्की की मिसाल दी जाती है। मोदी को वीजा देने से इनकार करने के बजाय हमें उन्हें अमेरिका आमंत्रित करना चाहिए।
वाल्श एक विवादास्पद हस्ती रहे हैं, जो अपने सरकार विरोधी विचारों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, शिकागो में भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के जो लोग मोदी का समर्थन करते हैं उनके बीच वाल्श बेहद लोकप्रिय हैं।
इलिनॉयस से रिपब्लिकन सांसद जोए वाल्श ने कहा, 'भ्रष्टाचार पर अपने सख्त रुख के लिए नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनके प्रयासों के चलते ही गुजरात की तरक्की की मिसाल दी जाती है। मोदी को वीजा देने से इनकार करने के बजाय हमें उन्हें अमेरिका आमंत्रित करना चाहिए।
वाल्श एक विवादास्पद हस्ती रहे हैं, जो अपने सरकार विरोधी विचारों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, शिकागो में भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के जो लोग मोदी का समर्थन करते हैं उनके बीच वाल्श बेहद लोकप्रिय हैं।
Friday, September 7, 2012
सूचना एवं प्रसरण राज्यमंत्री एस. जगतरक्षकन ने तो अलॉटमें
कांग्रेसी नेता सुबोध कांत सहाय और विजय दर्डा के बाद दो और नेताओं
का नाता 2005-2009 के बीच कोयला ब्लॉक आवंटन पाने वालीं
कंपनियों से जुड़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता प्रेम चंद गुप्ता के
बेटों ने उस समय कोयला ब्लॉक के लिए आवेदन किया था जब वह केंद्र सरकार में कंपनी
मामलों के मंत्री थे। गुप्ता का बेटा स्टील के कारोबार में बिल्कुल नया था,
इसके बावजूद उन्हें ब्लॉक मिल गया।
सूचना एवं प्रसरण राज्यमंत्री एस. जगतरक्षकन ने तो अलॉटमेंट से पांच दिन पहले जेआर पावर नामक कंपनी बनाई और सरकारी कंपनी पुड्डुचेरी इंड्स्ट्रियल प्रमोशन डिवलपमेंट ऐंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (पीआईपीडीआईसी) के साथ एमओयू साइन करके 17 जनवरी 2007 को कोल ब्लॉक के लिए दावेदारी ठोक दी। 25 जुलाई को कंपनी को उड़ीसा के नैनी में कोल ब्लॉक मिल गया और एक महीने के भीतर ही जेआर पावर ने अपनी हिस्सेदारी हैदराबाद की कंपनी केएसके एनर्जी वेंचर्स को बेच दी, जिससे इस कंपनी को ब्लॉक से कोयला निकालने का अधिकार मिल गया।
बाद जगतरक्षकन ने 2009 में चुनाव लड़ने के लिए कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनके परिवार के लोग अभी भी कंपनी के डायरेक्टर हैं। साफ है कि कोर सेक्टर में कोई ट्रैक रेकॉर्ड न होने के बावजूद जेआर पावर को मनमानी पूर्ण तरीके से ब्लॉक आवंटित किए गए और कंपनी ने इसे बेचकर एक महीने के भीतर ही मोटा मुनाफा कमा लिया। खास बात यह है कि जिस पीआईपीडीआईसी के साथ जेआर पावर ने कोल ब्लॉक की दावेदारी जताने के लिए संयुक्त उपक्रम बनाया था वह भी एक इन्वेस्टमेंट कंपनी है।
सूचना एवं प्रसरण राज्यमंत्री एस. जगतरक्षकन ने तो अलॉटमेंट से पांच दिन पहले जेआर पावर नामक कंपनी बनाई और सरकारी कंपनी पुड्डुचेरी इंड्स्ट्रियल प्रमोशन डिवलपमेंट ऐंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (पीआईपीडीआईसी) के साथ एमओयू साइन करके 17 जनवरी 2007 को कोल ब्लॉक के लिए दावेदारी ठोक दी। 25 जुलाई को कंपनी को उड़ीसा के नैनी में कोल ब्लॉक मिल गया और एक महीने के भीतर ही जेआर पावर ने अपनी हिस्सेदारी हैदराबाद की कंपनी केएसके एनर्जी वेंचर्स को बेच दी, जिससे इस कंपनी को ब्लॉक से कोयला निकालने का अधिकार मिल गया।
बाद जगतरक्षकन ने 2009 में चुनाव लड़ने के लिए कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनके परिवार के लोग अभी भी कंपनी के डायरेक्टर हैं। साफ है कि कोर सेक्टर में कोई ट्रैक रेकॉर्ड न होने के बावजूद जेआर पावर को मनमानी पूर्ण तरीके से ब्लॉक आवंटित किए गए और कंपनी ने इसे बेचकर एक महीने के भीतर ही मोटा मुनाफा कमा लिया। खास बात यह है कि जिस पीआईपीडीआईसी के साथ जेआर पावर ने कोल ब्लॉक की दावेदारी जताने के लिए संयुक्त उपक्रम बनाया था वह भी एक इन्वेस्टमेंट कंपनी है।
Thursday, August 23, 2012
यात्रियों की सुविधा के लिए पांच सौ से च्यादा विशेष ट्रेनें
रेलवे ने त्यौहार और खासकर दुर्गा पूजा के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए पांच सौ से च्यादा विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय किया है।
उत्तर रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि त्योहार के दौरान उत्तर रेलवे द्वारा कुल मिलाकर 572 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इनमें पटना, गया, दरभंगा, वाराणसी, लखनऊ अमृतसर जम्मू और उधमपुर के लिए विशेष ट्रेनें शामिल हैं।
उत्तर रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि त्योहार के दौरान उत्तर रेलवे द्वारा कुल मिलाकर 572 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इनमें पटना, गया, दरभंगा, वाराणसी, लखनऊ अमृतसर जम्मू और उधमपुर के लिए विशेष ट्रेनें शामिल हैं।
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