Tuesday, June 30, 2009

MRVC की आवाज

ये MRVC की आवाज ।
मुंबई यात्री सेवा में,
किए असंभव काज ।
ये MRVC की आवाज .....

था हुआ गठन निन्यानवे में,
है प्रदेश की साझेदारी ।
था लक्ष्य रेल-विकास का,
लाना था परिवर्तन भारी ।।
भीड़भाड़ हो कम ट्रेनों में,
मिले सभी को लाभ ।।
ये MRVC की आवाज ....

मुंबई रेल – प्रणाली विकसित,
मध्य और पश्चिम रेलों पर ।
तिरसठ लाख यात्री प्रतिदिन,
सेवाएं हर एक मिनट पर ।।
अतुलनीय ये दुनियाँ में,
पहने है रेलों का ताज ।।
ये MRVC की आवाज ......


उत्तम नियमित सेवाओं से,
अब प्रतिदिन बढती माँगे ।
नई लाइनें, नये टर्मिनल,
नई दिशाओं की हैं माँगे ।।
हों रेल तंत्र की क्षमता में,
शीघ्र विकास के काज ।।
ये MRVC की आवाज .....



प्रतिकूल विषम स्थितियों में,
यह थी कठिन परीक्षा ।
बाधाएं हर एक कदम पर,
साथ जटिल थी वित्त व्यवस्था ।।
विश्व बैंक से निधि आयोजन,
किया कठिन ये काज ।।
ये MRVC की आवाज ......


संचालन प्रबंध व्यवस्था का,
कंप्यूटरीकृत प्रयोगों से ।
योजनाओं का कार्यान्वयन,
नूतन वैज्ञानिक विधियों से ।।
परिणाम लाये हैं `सहगलजी`
आज हमें है उनपर नाज़ ।।
ये MRVC की आवाज .......


थी अपेक्षा कई वर्षों से,
अब स्वप्न हुए साकार ।
नई डिजाइन के डिब्बों में ,
है सुविधायं कई प्रकार ।।
मुंबई जनता करे प्रशंसा,
MRVC का सौभाग्य ।।
ये MRVC की आवाज .......


नये मार्गों के खुलने से,
बृद्धि हो रही क्षमता में ।
बढती हुई सेवाओं से,
संतुष्टि बढ रही जनता में ।।
लगन और मेहनत का फल,
और नहीं कोई ये राज ।।

ये MRVC की आवाज .....



MRVC के माध्यम से,
मुंबई में हो रहा विकास ।
द्वितीय चरण की स्वीकृति से ,
हों नई दिशा में नये प्रयास ।।
कार्य सभी हों जल्दी पूरें,
आओं हाथ बढायें आज़ ।।
ये MRVC की आवाज .....


`विकास-पथ` पर सदा अग्रसर,
MRVC की सेवाएं ।
करती रहें सदा ये पूरी,
मुंबई जनता की आशाएं ।।
लक्ष्य सदा जनता की सेवा,
हो उन्नत मुबई समाज़ ।
ये MRVC की आवाज ....

द्वारा श्री रमेश भावे,
सचिव/ प्रबंध-निदेशक

Wednesday, June 3, 2009

मुंबई रेलवे विकास निगम की नई योजनाओं का खुलासा किया गया

हार्बर लाइन पर बढ़ते यात्रियों के बोझ और नवी मुम्बई में लोकल ट्रेनों के ऑपरेशन की संभावनाओं के मद्देनजर राज्य सरकार ने इस रूट पर 12 डिब्बों की लोकल चलाने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है और इसकी संभाव्यता रिपोर्ट (फिजीबिलिटी रिपोर्ट)का आकलन करने के लिए फौरन 1 करोड़ रुपए भी सैंक्शन कर दिया है। फिलहाल इसका पता लगाने के लिए मुम्बई रेल विकास कारपोरेशन (एमआरवीसी) ने इसका अध्ययन कर रही है और जैसे ही यह पूरा हो जाता है, रेलवे बोर्ड के पास इसे अप्रूवल के लिए भेज दिया जाएगा। यही नहीं, सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे के स्टेशनों पर 100-100 एटीवीएम लगाने के खर्च को वहन करने की मां.ग को भी राज्य सरकार ने मंजूर कर लिया है। राज्य सरकार के फैसले पर खुशी का इजहार करते हुए एमआरवीसी के प्रबंध निदेशक डॉ. पी. सी. सहगल ने बताया कि अब जबकि राज्य सरकार ने इस बहुप्रतीक्षित प्रॉजेक्ट को हरी झंडी दिखाते हुए काम आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है, तो हमें पूरी उम्मीद है कि साल 2013 के अंत तक हम हार्बर लाइन पर 12 डिब्बों की लोकल चलाने की पोजीशन में होंगे। हालांकि उनका कहना था कि इस पर पूरी तरह से काम अगले साल ही शुरू हो पाएगा, जब रेल बजट में इसका प्रावधान कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि हार्बर लाइन पर 9 डिब्बों की लोकल को 12 डिब्बों में बदलने का प्रस्ताव एमयूटीपी के फेज-1 और फेज-2 में किया गया था। जहां तक फेज-3 का सवाल है तो इसे साल 2013 तक शुरू कर देने की उम्मीद है, जिस पर अगले 20 सालों में 30,000 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया है। जहां तक 9 डिब्बों की लोकल को 12 डिब्बों की लोकलों में कन्वर्ट करने का सवाल है, तो इसमें प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाना, स्टेबलिंग साइडिंग का एक्सटेंशन, पुलों के स्ट्रक्चर में सुधार, बिजली सप्लाई का प्रावधान, ओवरहेड औजारों की समुचित देखरेख, सिग्नलों को फिर से फिट करना, प्लेटफॉर्म से उनकी शिफ्टिंग और ट्रैकों के सर्किट का मॉडिफिकेशन करना महत्वपूर्ण काम माना जाता है। इसके अलावा 12 डिब्बों के कोचों की उपलब्धता भी एक प्रमुख समस्या मध्य रेल के पास होगी।