Monday, October 11, 2010

बीते हफ्ते नई ट्रेनों की 101वीं खेप मुंबई पहुंच गई।

मुंबई की लाइफलाइन बनकर करीब 33 महीने पहले जब दुल्हन की तरह से सजी-संवरी नई ट्रेनों ने पटरियों पर दौड़ना शुरू किया तो पहली बार रेल यात्रियों ने कसमसाते माहौल से जुदा थोड़ा खुलकर सांस लिया। एक-एक मिनट बचाने वाले लोकल के यात्रियों को 10-15 मिनट तक नई ट्रेनों का इंतजार करते देखा गया। नई ट्रेनों के आने का कारवां आगे बढ़ा और आज यह इस मुकाम पर पहुंच गया कि इसे सेलीब्रेट करने के लिए रेलवे के साथ राज्य सरकार भी आगे आ गई और विशेष डाक कवर भी रिलीज किया गया। जी हां, बीते हफ्ते नई ट्रेनों की 101वीं खेप मुंबई पहुंच गई। जून 2011 तक कुल 28 और नई ट्रेनें मुंबई में आने वाली हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन ट्रेनों के आने से वास्तव में रेल यात्रियों को सुविधा और सुकून मिला है? या फिर यात्रियों की बढ़ती रेलमपेल ने रेलवे के इस प्रयास को फुस्स कर दिया है। बढ़ी हुई ट्रेनों और इनकी बढ़ी हुई फ्रीक्वेंसी का असर बढ़े हए यात्रियों पर कितना पड़ा है मध्य और पश्चिम रेलवे से प्राप्त आंकड़े थोड़ा सुकून दे सकते हैं कि दुनिया के सबसे कॉम्प्लिकेटेड सबर्बन नेटवर्क में शुमार होने वाले मुंबई की लाइफलाइन (लोकल ट्रेनों) में थोड़ी बहुत भीड़ कम होने लगी है। एक रेल यात्री की हैसियत से शायद आपने भी महसूस किया होगा। रेल अधिकारियों की मानें तो साल 2013 में जब कई इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम पूरे हों जाएंगे तो रेल यात्रियों को और भी कई सुविधाएं मिलेंगी। मगर पहले बात वर्तमान की करें। साल 2005-06 में जहां मध्य रेल के प्रति कोच में 269 यात्री ठुंसे होते थे, जुलाई 2010 तक मध्य रेल के मेन-हार्बर और ट्रांसहार्बर रूट को मिलाकर यह संख्या 228 तक आ गई। जबकि पश्चिम रेल में 2005-06 में इसकी लोकल की प्रति बोगियों में 295 यात्री सफर किया करते थे और 2010 में यह तादाद घटकर 247 तक आ गई। इसे थोड़ा सा जनरल टर्म में कहा जाए तो पहले एक बैठे हुए यात्री के पीछे 4 यात्री खड़े रहते थे। अब यह संख्या घटकर तीन तक आ गई है। दूसरे शब्दों में कहें तो सेंट्रल रेल में 20 प्रतिशत और वेस्टर्न रेल में 17 प्रतिशत भीड़ में कमी हुई। बावजूद इसके कि इस दरमियान यात्रियों की संख्या में भी 7-8 प्रतिशत का इजाफा हुआ। यह देर से हुआ या समय पर हुआ, इसे बहस का मुद्दा बनाया जा सकता है। मगर यह भी सच है कि जिस रफ्तार से मुंबई की आबादी आने वाले दिनों में बढ़ने वाली है, उसे देखकर यह कहा जा सकता है लोकल ट्रेनों की भीड़ कम करना हमेशा से रेल अधिकारियों का सरदर्द बना ही रहेगा। रेल यात्रियों के लिए एक भरोसा देने वाली खबर यह भी है कि साल 2014 तक ऐसी 72 और ट्रेनों को मुंबईकरों की सेवा में लाकर पुरानी ट्रेनों को हटाने की प्लानिंग है। मगर यह भी काबिल-ए-गौर है कि जून 2011 से जून 2012 तक मुंबई में नई ट्रेनें नहीं आएंगी। अब बात करते हैं लोकल की बढ़ाई गई लोकल सेवाओं की। जुलाई 2010 तक के प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि मध्य रेल में साल 2005-06 में लोकल ट्रेनों की 1,203 सेवाएं हुआ करती थीं, जो जुलाई 2010 तक बढ़कर 1,556 हो गईं। इसमें 12 डिब्बों वाली लोकल की संख्या 218 से बढ़कर 577 हो गईं। पश्चिम रेल जो साल 2005-06 में जहां 1,017 सेवाएं चलाती थी, वो 2010 में बढ़कर 1,210 हो गईं। 12 डिब्बों वाली लोकल की संख्या बढ़कर 435 से 788 हो गई। जहां तक इस दरमियान बढ़ेे हुए यात्रियों की बात है तो मध्य रेल पर साल 2005-06 में रोजाना औसतन 30.84 लाख यात्री सफर करते थे वो साल 2010 जुलाई में बढ़कर 36.7 लाख हो गई। पश्चिम रेल में साल 2005-06 में 30.88 लाख यात्री थे और साल 2010 में इनकी संख्या बढ़कर 33.1 लाख हो गई। करती है जिसका एक और सिर्फ एक ही मकसद होता है पैसा कमाना। आज र्वल्ड क्लास स्टेशनों की बात होती है मगर कई स्टेशनों की हालत इतना बदतर है कि कुछ पूछिए मत। रेलवे को चाहिए कि वो किसी जनांदोलन का इंतजार न करे।

Tuesday, September 14, 2010

संदेश



14 सितम्बर, ​'हिंदी दिवस' के अवसर पर आप सभी को मेरी ​हार्दिक शुभकामनाएं ।

आज से 61 साल पहले 14 सितम्बर, 1949 के दिन संविधान सभा की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था ​कि संघ की राजभाषा हिंदी होगी ।

गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस की तरह आज का​ ​दिन भी राष्ट्रीय गौरव का दिन है । आज का दिन न केवल 'हिंदी दिवस' ब​ल्कि सभी भारतीय भाषाओं के परस्पर आदान-प्रदान, एकता और आपसी सौहार्द का भी दिन है ।

संविधान की आठवीं अनुसूची में हिंदी को संघ की राजभाषा और विभिन्न राज्यों की अपनी-अपनी भाषाओं को उन राज्यों की राजभाषा का दर्जा दिया गया है । संविधान निर्माताओं का यह पावन उद्देश्य था ​कि स्वतंत्र भारत में केंद्र सरकार का काम-काज हिंदी में और राज्य सरकारों का काम राज्यों की राजभाषा में चले तथा हमें किसी विदेशी भाषा की जरूरत न हो और हम अपनी अ​स्मिता का स्वयं सम्मान कर सकें ।

गांधी जी का यह सपना था ​कि स्वतंत्र भारत में हम अपने देश की ही भाषाओं को अपनाएं और उनके महत्व को समझें । इससे देश वास्तविक प्रग​ति के रास्ते पर आगे बढ़ेगा और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनेगा ।

राजभाषा हिंदी का प्रयोग प्रसार न केवल हमारी संवैधानिक जिम्मेवारी है, ​बल्कि यह हमारी नैतिक जिम्मेवारी भी है । मैं चाहूंगा ​कि भारत सरकार की राजभाषा नीति को सफल बनाने के लिए न केवल आप स्वयं कार्यालय के काम-काज में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें बल्कि व्यक्तिगत रूचि ले कर इसे बढ़ावा भी दें जिससे हम गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा जारी वार्षिक कार्यक्रम में निर्धारित सभी लक्ष्यों को हासिल कर सकें ।

'हिंदी दिवस' के अवसर पर हर वर्ष हमें इस बात का एक मौका मिलता है ​कि हम स्चयं अपना आत्मावलोकन करें ​कि पिछले वर्ष में हमने राजभाषा के काम-काज में कितनी प्रगति की है और कहां हमारी कमियां रही हैं, जिससे आगामी वर्ष में उन कमियों को पूरा करने के लिए हम स्वयं अपने लक्ष्य निर्धारित कर सकें
आज का युग सूचना प्रौद्यौगिकी का युग है । मैं चाहूंगा ​कि एमआरवीसी में भी सूचना प्रौद्यौगिकी के हर क्षेत्र में राजभाषा हिंदी को बढ़ावा दिया जाए ।

इस अवसर पर मैं उन सभी अधिकारियों और कर्मचा​रियों से भी यह खास अपील करता हूं ​कि जिन्हें हिंदी का ज्ञान है वे अनुवाद का सहारा छोड़कर अब मूल रूप से अपना सभी काम हिंदी में करना शुरू करें । मेरा यह विशेष आग्रह है ​कि 'हिंदी दिवस' के दिन एमआरवीसी के सभी अधिकारी और कर्मचारी अपना पूरा काम हिंदी में ही करें ।
14 सितम्बर 2010

(डॉ. पी. सी सहगल)
प्रबंध निदेशक

Friday, September 10, 2010

मुबरकबाद और शुभकामनाएं

ईद और गणेषोत्सव पर हमारी तरफ से मुबरकबाद और शुभकामनाएं

Friday, September 3, 2010

जय कन्हैया लाल' के जयकारे

जन्माष्टमी पर यूपी के अधिकांश मंदिरों में 'जय कन्हैया लाल' के जयकारे और 'गिरधर नागर नंदा , भजो रे मन गोविंदा' के भजन गूंजे। श्रीकृष्ण के स्वागत के लिए राजधानी लखनऊ सहित पूरा राज्य धार्मिक उल्लास में डूबा हुआ नजर आया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए अधिकांश मंदिर सजधज कर तैयार नजर आए। कुछ स्थानों पर बुधवार को ही जन्माष्टमी मनाई गई थी। कृष्ण जन्मोत्सव के लिए राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित राधाकृष्ण मंदिर, चौक स्थित कोनेश्वर मंदिर और चिनहट स्थित राधाकृष्ण मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया। यहां गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों के मंदिरों में कृष्ण भक्त सुबह से ही जयकारे लगाते नजर आए। लखनऊ में पुलिस लाइन सहित सैकड़ों स्थानों पर मनमोहक झांकियां सजाई गईं। कई स्थानों पर गुरुवार शाम को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कान्हा की भक्ति में डूबी ब्रजभूमि मथुरा और उसके आसपास फैले ब्रज मंडल में उत्साह और खुशी का माहौल रहा। विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में यहां जन्माष्टमी पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। इस बार जन्माष्टमी की तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम रहा लेकिन इसके बाद भी लोगों के उल्लास में कोई कमी नहीं है। वृंदावन और मथुरा के मंदिरों में एक लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे। वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर में बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु पहुंचे और कीर्तन में हिस्सा लिया। प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में बुधवार को ही जन्माष्टमी मना ली गई थी। आगरा में यमुना किनारे का मथुराधीश मंदिर विशेष आकर्षण रहा। शहजादी मंडी, लॉयर्स कॉलोनी, विजय नगर और शहर के अन्य हिस्सों के राधा कृष्ण मंदिर दमकते नजर आए।

Sunday, August 15, 2010

शुभकामनाएं

स्वतंत्रा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Monday, August 2, 2010

एमआरवीसी के प्रबंधनिदेशक पुरस्कृत

महाराष्ट्र राज्यहिन्दी एकेडमी के एक कार्यक्रम में एमआरवीसी के प्रबंधनिदेशक डॉ. पी सी सहगल को पुरस्कृतकिया गया

Friday, July 16, 2010

चर्चगेट जा रही लोकल माहिम स्टेशन पर पटरी से उतर गई।

रविवार दोपहर पश्चिम रेल के यात्रियों को उस समय परेशानियों का सामना करना पड़ा जब विरार से चर्चगेट जा रही लोकल माहिम स्टेशन पर पटरी से उतर गई। इसकी वजह से फ्रंट कोच के तीन पहिए पटरी से उतरकर रगड़ खाते हुए जमीन से जा मिले। बता दें कि एक कोच में 8 पहिए होते हैं। मगर इस दुर्घटना में किसी के भी हताहत होने की कोई खबर नहीं मिली। घटना दोपहर पौने तीन बजे की है जब प्लेटफॉर्म (लाइन) नंबर 4 से प्लेटफॉर्म नं. 2 पर जा रही फास्ट लोकल अपना संतुलन खो बैठी और वह पटरी से उतर गई। हालांकि इस दुर्घटना का समाचार पाते ही एजीएम और डीआरएम एक्सिडेंट रिलीफ ट्रेन के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे मगर जब तक उनके मार्गदर्शन में इसका रेस्टोरेशन हो पाता, बाकी की लोकल ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। यह सामान्य तभी हुआ जब शाम 6.15 बजे तक पटरी से उतरी लोकल को वहां से हटा दिया गया। गौरतलब है कि मेगा ब्लॉक का दिन होने से माहिम और मुंबई सेंट्रल के बीच मरम्मत का काम किया जा रहा था और इस दरमियान माहिम से मुंबई सेंट्रल फास्ट ट्रैक की लोकल को स्लो ट्रैक पर डायवर्ट किए जाने की व्यवस्था की गई थी। यह हादसा उसी समय हुआ, जब लोकल क्रासओवर से गुजर रही थी। गौरतलब है कि जब भी ट्रेन को एक लाइन से दूसरी लाइन पर डायवर्ट किया जाता है तो उस समय ट्रेन की स्पीड 15 किमी से कम ही रखी जाती है। पहला शक मोटरमैन के ऊपर जा रहा है। हालांकि पश्चिम रेल के अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि इस हादसे में मोटरमैन की तरफ से कोई गड़बड़ी हुई है। इसके मुख्य प्रवक्ता एस. एस. गुप्ता ने कहा है कि डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं और जांच के बाद ही इस हादसे की सही वजह पता चल पाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जांच के दौरान लोकल की स्पीड भी जांच का एक मुद्दा जरूर रहेगा।