Monday, July 6, 2015

सर्वोच्च राजस्व की प्राप्ति

वेस्टर्न रेलवे के मुंबई डिविजन द्वारा बिना टिकट यात्रा के विरुद्ध सघन अभियान से अप्रैल एवं मई, 2015 में अब तक के सर्वोच्च राजस्व की प्राप्ति की गई है। अप्रैल, 2015 में की गई नियमित जांच का यह परिणाम रहा कि बिना टिकट/अनियमित यात्रा सहित बिना बुक किए गए सामान के 1.3 लाख मामले पकड़े गए। इस माल से 5.68 करोड़ रुपये जुर्माने स्वरूप प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की इसी माह तुलना में 27.04 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार मई, 2015 में किए गए बिना टिकट/अनियमित यात्रा सहित बिना बुक किए गए सामान के 1.2 लाख मामले पकड़े गए, जिनसे 5.41 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर मिले। अप्रैल तथा मई, 2015 के दौरान 6 फोर्ट्रेस जांच आयोजित की गईं, जिनसे बतौर जुर्माना 36.44 लाख रुपये प्राप्त हुए।

Thursday, July 2, 2015

भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू

शुक्रवार 3 जुलाई से भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू होने जा रही है।  पहले इस सेवा को 3 मई से लागू किया जाना था, लेकिन बाद में इसके लॉन्च की तारीख आगे बढ़ा दी गई।
एक वरिष्ठ टेलिकॉम अधिकारी ने बताया कि 3 जुलाई से यह सर्विस शुरू हो जाएगी। पूरे देश में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के लागू होने के बाद ग्राहकों को शहर या सर्कल बदलने पर अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलना होगा।
मौजूदा सिस्टम में अगर किसी व्यक्ति के पास दिल्ली का नंबर हो, तो उसे मुंबई, चेन्नै या किसी और सर्कल में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। उन सर्कल्स में मूव करने पर उसे अलग ही नंबर लेना होगा।
फुल नंबर पोर्टेबिलिटी को 3 मई को शुरू होना था। लेकिन सेल्युलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने टेलिकॉम ऑपरेटर्स से सर्विस लागू होने से रोकने की अपील की थी ताकि टेलिकॉम ऑपरेटर्स इसके लिए जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें। मंत्रालय ने इसके लिए दो महीने की मोहलत दी थी।
पिछले महीने, टेलिकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि यह सुविधा जुलाई तक तैयार हो जाएगी। COAI के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज़ ने कहा कि इंडस्ट्री अब इसके लागू होने के लिए तैयार है और अब इसमें देर होने की कोई संभावना नहीं है

Tuesday, June 23, 2015

स्वच्छता अभियान

साथियों,
वर्तमान एक महीना बहुत ही पवित्र है । चाहे हिंदु हो या मुसलमान , सभी के लिए ।
हिंदुओं के लिए यह माह मल-मास (अधिक मास) के रूप में और मुसलमानों के लिए पवित्र रमजान –
आइए इस पवित्र माह को स्वच्छता अभियान से जोड़ दें और अपने आस पास गंदगी न रहने दें ।

स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनें । 

Monday, June 15, 2015

नियामक प्राधिकरण बनाकर रेल बजट को खत्म करने की सिफारिश

भारतीय रेलवे में सुधार को लेकर बिबेक देबरॉय कमिटी की सिफारिशों पर विवाद की गुंजाइश तो है, लेकिन इनमें से भविष्य के लिए कई रास्ते भी निकल सकते हैं। सच कहा जाए तो इसने रेलवे पर लीक से हटकर विचार करने पर जोर दिया है। 
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे के हालात बदलने और संसाधन जुटाने के उपाय सुझाने के लिए इस कमिटी का गठन पिछले साल सितंबर में किया गया था। कमिटी ने 5 साल का एक रोडमैप पेश किया है, जिसके आधार पर रेलवे में व्यापक बदलाव की बात कही गई है। इसमें रेलवे की आर्थिक ग‌तिविधियों के संचालन के लिए नियामक प्राधिकरण बनाकर रेल बजट को खत्म करने की सिफारिश की गई है। 
रेलवे को मुख्य रूप से दो निकायों में बांटने का सुझाव दिया गया है। एक निकाय बुनियादी ढांचे की देखभाल के लिए होगा तो दूसरा संचालन संबंधी काम देखेगा। इसके अलावा ट्रेनों के संचालन को प्राइवेट हाथों में देने का प्रस्ताव रखा गया है और कहा गया है कि इसकी शुरुआत सवारी गाड़ियों से की जा सकती है। 
साथ ही रेलवे के लिए स्वतंत्र और अर्ध-न्यायिक रेलवे नियामक प्राधिकारण बनाने की अनुशंसा भी की गई है। कमिटी ने कहा है कि सरकार रेलवे के सामाजिक दायित्व का सारा दबाव रेलवे पर सब्सिडी के रूप में डाल देती है जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। कमिटी का बुनियादी सवाल है कि रेलवे एक आर्थिक सेवा है या सामाजिक सेवा करने वाली कोई संस्था? आखिर रेलवे को स्कूल, अस्पताल चलाने और सुरक्षा बल रखने की क्या जरूरत है? इसे एक आधुनिक परिवहन सेवा समझने और उसे उसी रूप में विकसित किए जाने की जरूरत है। 
रिपोर्ट में रेलवे में निजी कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है और प्रतिस्पर्धा का माहौल सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है। दरअसल कमिटी रेलवे को एक सरकारी विभाग से ज्यादा एक कंपनी के रूप में विकसित करने की पक्षधर है। मगर दिक्कत यह है कि हमारे देश में रेलवे सियासत का एक टूल बनी हुई है। गठबंधन राजनीति के दौर में सत्तारूढ़ दल हमेशा अपने गठजोड़ के सबसे बड़े सहयोगी दल को संतुष्ट करने के लिए उसे रेल मंत्री का पद देता आया है। 
रेल बजट के जरिए सरकार अपने पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश करती है। अपने वोटबैंक को एकजुट करती है। इसके लिए बिना किसी ठोस आधार के गाड़ियां चलाई जाती हैं। आज भी जिन सरकारी महकमों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है, उनमें रेलवे प्रमुख है। इसमें भर्तियों के घोटाले अक्सर सामने आते रहते हैं। यह लालफीताशाही की प्रतीक है। इसमें छोटे से छोटे फैसले लेने में वर्षों लग जाते हैं। 
नतीजा यह है कि स्वतंत्रता के समय भारत का रेलवे नेटवर्क चीन से दोगुना था। पर आज चीन हमसे मीलों आगे नजर आ रहा है। कमिटी की राय स्पष्ट है कि रेलवे को अगर प्रफेशनल ढंग से नहीं चलाया गया तो कभी यह फायदे में नहीं आएगी और इसके आधुनिकीकरण का सपना भी कभी पूरा नहीं हो पाएगा।

Tuesday, June 9, 2015

ट्रेनों को रोकने के लिए लगी चेन जल्द ही हटा दी जाएगी

ट्रेन के डिब्बों पर लिखा मेसेज 'गाड़ी खड़ी करने के लिए जंजीर खींचिए' अब बीते दौर की बात बन जाएगा। आपात स्थिति में ट्रेनों को रोकने के लिए लगी चेन जल्द ही हटा दी जाएगी। बेवजह होने वाली चेन पुलिंग से निपटने के लिए रेल मंत्रालय ने ट्रेन के डिब्बों से चेन को हटाने का फैसला किया है।
रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि बिना कारण चेन पुलिंग के चलते ट्रेनें अक्सर समय पर नहीं पहुंच पातीं। इस वजह से रेलवे को 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा है। बरेली के इज्जतनगर में ट्रेनों से चेनों को हटाने का काम शुरू हो गया है।
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कोच में ड्राइवर और सहायक ड्राइवर के मोबाइल नंबर लिखे जाएंगे। आपात स्थिति में यात्री उन पर कॉल कर सकेंगे।
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर डिविजन के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने कहा, 'देशभर की फैक्ट्रियों में बन रहे नए कोचों में अलार्म चेन नहीं लगाई जा रही हैं। ट्रेन में ड्राइवर और सहायक ड्राइवर के मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने के अलावा हर तीन डिब्बों के लिए एक कर्मचारी वॉकी-टॉकी के साथ तैनात किया जाएगा।'
केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने बरेली की यात्रा के दौरान कहा कि चेन खींचकर ट्रेन रोकना उत्तर प्रदेश और बिहार की एक गंभीर समस्या है। बिना वाजिब कारण के ट्रेन रोकने की वजह से रेलवे को भारी नुकसान हुआ है। रेलवे बोर्ड की अधिसूचना में पहले ही कोचों में चेन न लगाने को कहा जा चुका है।
इज्जतनगर डिविजन के डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) चंद्र मोहन जिंदल ने कहा, 'ट्रेनों में देरी के प्रमुख कारणों में चेन पुलिंग को नकारा नहीं जा सकता। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में चेन पुलिंग एक गंभीर समस्या है।'

Friday, May 15, 2015

आर्मी की तरफ से दिए गए चंदे को लेकर अजीब हालात

सेना प्रमुख द्वारा पिछले दिनों प्रधानमंत्री राहत कोष में आर्मी की तरफ से दिए गए चंदे को लेकर अजीब हालात पैदा हो गए हैं। सेना का कहना है कि उसने सैनिकों के वेतन से कोई चंदा नहीं दिया। ऐसे में उस चेक पर सवाल उठ रहा है, जिस पर लिखा गया था कि रकम सेना के वेतन से ली गई है।
चार महीने पहले आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग ने प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए 100 करोड़ रुपये का चेक दिया था। यह चेक उन्होंने खुद पीएम नरेंद्र मोदी को दिया था। मगर अब सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सैनिकों की सैलरी से या अन्य तरीके से ऐसा कोई दान नहीं दिया गया है।

देहरादून के रहने वाले प्रभु डंडरियाल की तरफ से डाली गई आरटीआई के जवाब में आर्मी के सीपीआईओ लेफ्टिनेंट कर्नल राजीव गुलेरिया ने लिखा है, 'संबंधित एजेंसी ने सूचित किया है कि सेना के जवानों के वेतन से प्रधानमंत्री राहत कोष में कोई अनुदान नहीं दिया गया है। यह मामला अभी विचाराधीन है।'
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के ऑफिस की वेबसाइट पर डाले गए 67वें सेना दिवस समारोह की तस्वीरों में एक चेक दिख रहा था। जनरल सुहाग इस चेक को पीएम मोदी को सौंप रहे हैं। इस चेक में लिखा है, 'भारतीय सेना के सभी रैंक्स का एक दिन का वेतन।'
डंडरियाल ने अब प्रधानमंत्री कार्यालय से आरटीआई के जरिए इस चेक के बारे में जानकारी मांगी है। डंडरियाल ने कहा, 'जब 20 मार्च तक दान के लिए वेतन से कुछ नहीं लिया गया था, तो आर्मी चीफ ने 100 करोड़ रुपये का चेक कैसे दे दिया? इसीलिए मैंने आरटीआई के जरिए पीएमओ से जवाब मांगा है।'

Wednesday, May 6, 2015

बॉलिवुड सुपरस्टार सलमान खान को 5 साल जेल की सजा

साल 2002 के हिट ऐंड रन केस में दोषी करार दिए गए बॉलिवुड सुपरस्टार सलमान खान को मुंबई की सेशंस कोर्ट ने 5 साल जेल की सजा सुनाई है। गैर इरादतन हत्या मामले में सलमान के खिलाफ लगे सभी आरोप कोर्ट ने सही पाए।
उतार चढ़ावों से भरे 12 साल पुराने इस मामले में न्यायाधीश डी डब्ल्यू देशपांडे ने 49 साल के ऐक्टर के खिलाफ फैसला सुनाया। इस मौके पर सलमान और उनका परिवार अदालत में मौजूद थे। अदालत ने कहा कि सलमान शराब पीकर गाड़ी चला रहे थे और उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।
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अदालत ने इस मामले का फैसला सुनाते हुए दिल्ली के बीएमडब्ल्यू निखिल नंदा और अलीस्टेयर परेरा मामले का अनुसरण करते हुए सलमान को दोषी ठहराया। अदालत ने सलमान से पूछा कि फैसले पर उन्हें क्या कहना है तो सलमान ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि हादसे के वक्त वह कार नहीं चला रहे थे।
वहीं, इस बीच मीडियाकर्मियों की भारी भीड़ के साथ पुलिसकर्मियों की झड़प भी हो गई। पुलिस ने इसके बाद मीडियाकर्मियों को बाहर कर कोर्ट रूम के दरवाजे को बंद कर दिया।
अदालत जिस समय अपना फैसला सुना रही थी, सलमान की आंखों में आंसू थे और वह चुपचाप खड़े थे। फैसले के बाद उनके वकील ने मामले की सजा की मात्रा पर जिरह शुरू की। इस महत्वपूर्ण मामले में आज फैसले को देखते हुए अदालत परिसर में और इसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई, जहां सलमान के भाई अरबाज, सोहेल, बहन अर्पिता खान सहित उनका परिवार आज सुबह ही पहुंच गया था।
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सितंबर 2002 की रात को सलमान की टोयोटा लैंड कू्जर बांद्रा के उपनगरीय इलाके में पटरी पर सोए लोगों को कुचलती हुई एक बेकरी में घुस गई थी, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हुए थे। बांद्रा के मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट (जिन्होंने सलमान के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने के हल्के आरोप में सुनवाई की थी, जिसमें अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है) ने 2012 में गैर इरादतन हत्या के अधिक गंभीर आरोप के साथ मामला सेशन कोर्ट को भेज दिया था।
जहां अभियोजन इस बात पर अडिग था कि हादसे के वक्त शराब पीकर सलमान ही लैंड क्रूजर चला रहे थे, वहीं सलमान का दावा था कि उस समय उनका ड्राइवर अशोक सिंह ड्राइविंग सीट पर था। सिंह ने भी बचाव पक्ष की इसी बात समर्थन किया। बचाव पक्ष ने यह दलील भी दी कि पुलिस ने स्टीयरिंग व्हील से उंगलियों के निशान नहीं उठाए थे, जिससे यह मालूम चले कि वाहन कौन चला रहा था।
अभियोजक प्रदीप घरात का आरोप था कि सलमान एक बार में 'बकार्डी रम' पीने के बाद गाड़ी चला रहे थे। हालांकि सलमान ने इस आरोप से इंकार करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक गिलास पानी पीया था। हादसे में नुरुल्लाह महबूब शरीफ की मौत हो गई थी, जबकि कलीम मोहम्मद पठान, मुन्ना मलाई खान, अब्दुल्लाह रौफ शेख और मुस्लिम शेख घायल हुए थे।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दाउंदकर ने एक अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने गलत डॉक्टरों से पूछताछ कर झूठे साक्ष्य पेश किए, जिससे मामले में तीन साल की देरी हुई। उन्होंने याचिका में पुलिस द्वारा मुख्य प्रत्यक्षदर्शी कमाल खान से पूछताछ नहीं किए जाने के संबंध में भी सवाल उठाए थे। सलमान खान को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग 2 (गैर इरादतन हत्या), 279 (लापरवाही से वाहन चलाना), 337 और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना अथवा जीवन को खतरे में डालना) और 427 (संपति को नुकसान), के तहत आरोपित किया गया था। मोटर वाहन कानून के तहत खान के खिलाफ 34 (ए), (बी) पढ़ें 181 के साथ (नियमों के विरुद्ध वाहन चलाने) और 185 (शराब पीने के बाद तेज रफ्तार से वाहन चलाने) आरोप लगाए गए हैं। उनको बम्बई मद्यनिषेध कानून के तहत भी आरोपित किया गया, जो शराब के नशे में गाड़ी चलाने से जुड़ा है।
इससे पहले, सुबह नीली जींस और सफेद कमीज पहने सलमान एक सफेद कार से बांद्रा स्थित अपने आवास से दक्षिण मुंबई स्थित सेशंस कोर्ट पहुंचे। उनके साथ उनके बॉडीगार्ड थे। वहां बाहर लोगों का जमावड़ा था और एक तमिल समूह प्रदर्शन करते हुए ऐक्टर के लिए अधिकतम सजा की मांग कर रहा था जिन्होंने श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान महिन्दा राजपक्षे का समर्थन किया था।