Saturday, April 4, 2015

जायकेदार फास्ट फूड का ट्रेन में मजा

अब पिज्जा हट और केएफसी के लजीज और जायकेदार फास्ट फूड का आप ट्रेन में मजा ले सकेंगे। रेलवे के लिए ई-टिकटिंग, कैटरिंग और टूरिजम के काम को संभालने वाली आईआरसीटीसी ने ई-कैटरिंग के लिए पिज्जा हट और केएफसी के आवेदन को मंजूरी दे दी है।
इन वेंडर्स के खाने के लिए यात्रा की तिथि से 48 घंटे पहले आईआरसीटीसी वेबसाइट के माध्यम से ऑर्डर करना होगा। ऑर्डर बुक होने के बाद वेंडर की ओर से कस्टमर के मोबाइल फोन पर एक पासवर्ड भेजा जाएगा जिसे डिलिवरी के समय बताना जरूरी होगा। 12 स्टेशनों आगरा छावनी, अलवर, जयपुर, अंबाला, जालंधर, मथुरा जंक्शन, मुजफ्फरनगर, न्यू दिल्ली, पठानकोट, वापी, भरूच एवं वडोदरा पर पिज्जा डिलिवर करने के लिए फरवरी में आईआरसीटीसी ने देश में डोमिनोस पिज्ज ब्रैंड चलाने वाली कंपनी से डील की।
आईआरसीटीसी के चेयरमैन और एमडी ए.के.मनोचा ने ईटी से बातचीत में बताया, 'शुरू में यह सर्विस उन ट्रेनों में चालू होग जिनमें पैंट्री कार नहीं है। बाद में इस सर्विस का विस्तार उन ट्रेनों तक भी किया जाएगा जिनमें पैंट्री कार होती है जैसे राजधानी और दुरंतो। उन्होंने बताया कि पिज्जा हट और केएफसी से खाने की डिलिवरी के लिए और भी स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। लंबी दूरी की ट्रेनों में इस प्रकार के सिस्टम को चालू करने में समस्या यह है कि खाने की कीमत यात्री के भाड़े में शामिल होती है।
योजना के अनुसार फूड चेंस ऑनलाइन दिए गए खाने के ऑर्डर को सीधे डिलिवर कर सकते हैं या ट्रेनों में डिलिवर करने के लिए रेलवे के फूड प्लाजा नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मनोचा ने बताया, ''अगर पिज्जा हट जैसी कंपनी का फूड प्लाजा में आउटलेट नहीं होगा ते यह शहर में स्टेशन के समीप अपने सामान्य आउटलेट से डिलिवरी कर सकती है।

Thursday, April 2, 2015

कई चीजों के ठेके दशकों से फाइनल नहीं

मेट्रो मैन के नाम से मशहूर ई श्रीधरन ने कहा है कि भारतीय रेलवे को सामानों की खरीदारी में हर साल कम से कम 10 हजार करोड़ रुपए का चूना लग रहा है । श्रीधरन की रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीद अधिकारों को विकेंद्रित करने यानी निचले स्तर तक देने से इस लूट को रोका जा सकता है।
श्रीधरन ने रेलवे के जनरल मैनेजर्स को वित्तीय अधिकार देने और अधिकारों के विकेंद्रीकरण संबंधी अपनी फाइनल रिपोर्ट में कहा है कि इस समय खरीद अधिकार सीमित होने से रेलवे का बहुत ज्यादा पैसा महज कुछ हाथों में है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
श्रीधरन की अध्यक्षता वाली इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारियों की भी राय ली है। मौजूदा खरीद प्रक्रिया का विश्लेषण कर कमिटी इस नतीजे पर पहुंची है कि जवाबदेही तय करने और अधिकारों को विकेंद्रित करने से रेलवे की सालाना आय में भारी अंतर आ जाएगा। इससे हर साल सामान की खरीद में करीब 5 हजार करोड़ रुपए और कामों के ठेके देने में भी इतने ही रुपयों की बचत होगी।
कमिटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट 15 मार्च को दाखिल की थी। इसमें कहा गया है कि बोर्ड को कोई भी वित्तीय फैसले नहीं लेने चाहिए। खुद अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी भी उत्तरी रेलवे से करानी चाहिए। ये अधिकार जनरल मैनेजर और निचले स्तर के अधिकारियों को दिए जाने की भी सिफारिश की गई है।
आपको बता दें कि रेलवे देश में सबसे ज्यादा खरीदारी करने वाली दूसरी सबसे बड़ी एजेंसी है। इससे ज्यादा की खरीदारी सिर्फ डिफेंस के सामान की होती है। रेलवे हर साल खरीदारी पर करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है, जिसमें से करीब आधी रकम से रेलवे बोर्ड खरीदारी करता है।
पिछले साल नवंबर में श्रीधरन के प्रारंभिक रिपोर्ट देने के बाद से ही रेलवे ने अधिकारों के विकेंद्रीकरण का काम शुरू कर दिया है। अब श्रीधरन कमिटी ने कहा है कि रेलवे बोर्ड का गठन रेलवे की नीतियां, योजनाएं, नियम और सिद्धांतों को बनाने, इनकी जांच करने और रेलवे को दिशानिर्देश देने को हुआ था, लेकिन आज बोर्ड इनमें से कोई भी काम नहीं कर रहा है।
कमिटी ने विस्तार से विश्लेषण के लिए डीजल, कंक्रीट स्लीपर्स, 53-s सीमेंट जैसे सामनों की खरीद प्रक्रिया का भी अध्धयन किया। उनके मुताबिक, रेलवे देश में सबसे ज्यादा डीजल की खरीद करता है और पिछले 15 महीनों से इसका नया ठेका ही फाइनल नहीं हुआ है। कई चीजों के ठेके तो दशकों से फाइनल नहीं हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हालात इतने खराब हो गए हैं कि रेलवे के कामकाज की इस व्यवस्था को अच्छे से झकझोरने की जरूरत है, जिससे प्रभावी और बेहतर बिजनस के फैसले लिए जा सकें। इसमें कहा गया है कि बोर्ड को फील्ड में मौजूद अपने शीर्ष अधिकारियों यानी जनरल मैनेजर्स की बिजनस की क्षमता पर ही शक है।
इसके अलावा रिपोर्ट में रेलवे की ढुलाई और यात्रियों की संख्या (हवाई और सड़क के मुकाबले) कम होने पर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 1960-61 के 82 फीसदी (टन के हिसाब से) के मुकाबले आज रेलवे से केवल 30 फीसदी ढुलाई होती है। श्रीधरन ने कहा है कि शायद ही रेलवे के मुकाबले किसी और भारतीय संस्था की इतनी ज्यादा समितियों ने समीक्षा की होगी, लेकिन विडंबना यह है कि सारी सिफारिशें आज भी धूल फांक रही हैं।

Friday, March 27, 2015

अटल बिहारी वाजपेयी को शुक्रवार को भारत रत्न पुरस्कार

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को शुक्रवार को भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह कार्यक्रम यहां कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर ही होगा , जिसमें प्रेजिडेंट प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे।
ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्मे वाजपेयी पहले जनसंघ फिर बीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष रहे। दिलचस्प बात यह भी कि तीन बार प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी के समय देश की आर्थिक विकास दर तेज रही। वह देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने, जिनका कांग्रेस से कभी नाता नहीं रहा। साथ ही वह कांग्रेस के अलावा किसी अन्य दल के ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरे से जुड़े होने के बावजूद वाजपेयी एक धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी राजनेता के रूप में पहचाने गए। उनकी लोकप्रियता भी दलगत सीमाओं से परे रही। करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता और प्रखर कवि के रूप में प्रख्यात वाजपेयी को उस साहसिक पहल के लिए भी जाना जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री के रूप में उनकी 1999 की ऐतिहासिक लाहौर बस यात्रा आयोजित हुई थी।
उस दौर में पाकिस्तान जाकर उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ लाहौर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। वाजपेयी और प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं स्वतंत्रता सेनानी महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा 24 दिसम्बर को की गई थी। वाजपेयी और मालवीय दोनों का जन्मदिन 25 दिसंबर है।
महामना को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। मालवीय के परिजनों को 30 मार्च को राष्ट्रपति भवन में यह पुरस्कार दिया जाएगा। वाजपेयी और महामना इस पुरस्कार से नवाजे जाने वाली 44वीं और 45वीं हस्ती हैं। 1998 से 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी उम्र से जुड़ी बीमारियों के चलते फिलहाल घर पर ही रहते हैं

Monday, March 23, 2015

क्लीन इंडिया के प्रॉजेक्ट के लिए कॉर्पोरेट जगत ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक दान

पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रति भारत के उद्योग जगत ने काफी दरियादिली दिखाई है। पीएम मोदी के क्लीन इंडिया के प्रॉजेक्ट के लिए कॉर्पोरेट जगत ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक दान दिया है। स्वच्छ भारत से संबंधित प्रॉजेक्ट्स को अपना बजट समर्पित करने वाले बड़े कॉर्पोरेट हाउसों में एलऐंडटी, वेदांता, भारती, टीसीएस, अंबुजा सीमेंट्स, टोयोटा किरलोस्कर, मारूती, टाटा मोटर्स, कोका कोला, डाबर, रेकिट बेनजीकर, आदित्य बिड़ला ग्रुप, अडाणी, बायॉकॉन, इंफोसिस, टीवीएस एवं अन्य शामिल हैं।

इन प्रॉजेक्ट्स के तहत स्वच्छता से संबंधित कई काम हैं जैसे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में शौचालय बनवाना, लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए कार्यशाला चलाना, कचरा प्रबंधन से लेकर जल एवं वातावरण की स्वच्छता आदि। इनमें से अधिकतर प्रॉजेक्ट्स के लिए उनलोगों ने दान अपनी कॉर्पोरेट समाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) मद से दिया है लेकिन कुछ प्रॉजेक्ट्स के लिए अलग से भी दान दिया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार की यह पहल कॉर्पोरेट जगत को दोहरा फायदा करा रही है। एक ओर इससे उनको सीएसआर में 2 फीसदी अनिवार्य निवेश करने का मौका मिल रहा है तो दूसरी ओर सरकार की नजर में उनकी अहमियत बढ़ रही है। केपीएमजी के टेक्निकल डायरेक्टर, सस्टेनिबिलिटी अडवाइजरी संतोष जयराम ने बताया, 'जैसे ही पीए ने इस अभियान का आह्वान किया वैसे ही शुरू में तो लोगों ने झाड़ू अपने हाथ में थाम ली और कुछ कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया।'
इसके बाद कई कंपनियों ने इसे हकीकत का रूप देने के लिए धीरे-धीरे खास प्रॉजेक्ट और बजट तैयार करके इसे अपना मिशन बना लिया। उदाहरण के लिए, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और भारतीय एंटरप्राजेज का एक अंग भारती फाउंडेशन, दोनों ने स्कूलों में टॉयलट बनवाने के लिए अपने सीएसआर के रूप में 100-100 करोड़ रुपये इस अभियान को समर्पित कर दिया। इसके तहत टीसीएस ने देश के 10,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सुविधा के लिए फंड देने की योजना बनाई और भारती ने लुधियाना को गोद ले लिया है और इसे खुले में शौच से मुक्त जिला बनाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स (पीडब्लूसी) के पार्टनर सुधीर सिंह ने बताया, हालांकि ज्यादातर कंपनियों ने अभी तक टॉइलट्स बनवाने पर ही अपना ध्यान केंद्रित कर रखा है लेकिन कुछ अन्य कंपनियां हैं जिन्होंने कचरा प्रबंधन, पानी की सफाई और अन्य इनोवेटिव प्रॉजेक्ट्स को अपनाया है। उदाहरण के लिए डीएलएफ ने गुड़गांव के आसपास के गांवों में कचरा प्रबंधन प्रोग्राम पर काम शुरू किया है। इस प्रॉजेक्ट के तहत जिसके लिए फंड सीएसआर के तहत दिया गया है, कंपनी ने कचरा उपचार संयंत्र और कचरा संग्रहण आधारिक संरचना का निर्माण कराया है। निर्मित सुविधाओं को ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया गया है जो मार्केट में कंपोस्ट बेचकर कमाई कर रहा है।
डीएलएफ फाउंडेशन के सीईओ राजेंद्र सिंह ने बताया, 'साफ-सफाई हम सभी की जिम्मेदारी है, न कि सिर्फ सरकार की। स्वच्छ हरियाणा अभियान में डीएलएफ फाउंडेशन का योगदान उस समस्या के समाधान की दिशा में एक प्रयास है जो देश के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है।
सफाई क्षेत्र में काम कर रहे एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस अभियान को सफलता में बदलने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जल सफाई एवं स्वास्थ्य के लिए काम करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय संगठन वॉटर एड के सीईओ नीरज जैन ने बताया, 'इससे जुड़े प्रयास ज्यादातर संपत्ति निर्माण कार्य तक सीमित है। स्वच्छ भारत अभियान को सफल कहानी बनाने के लिए सभी पक्षों के बीच संतुलन जरूरी है।'
जैन का कहना है कि निवेश का उपयोग सभी तरह के बदलाव में होना चाहिए। टॉइलट्स के निर्माण के अलावा लोगों की आदतों को बदलना, तकनीक का उपयोग, सामुदायिक विकास के साथ साथ निगरानी व्यवस्था आदि मुख्य चुनौतियां है जिसका समाधान जरूरी है। लेकिन, एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि इस अजेंडे पर कॉर्पोरेट जगत की भागीदारी से इन समस्याओं के समाधान में मदद मिलेगी।
डिटॉल, हार्पिक और लिजॉल बेचने वाली कंपनी रेकिट बेनजीकर ने भी सफाई अभियान के लिए 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। कंपनी का कार्यक्रम मुख्य रूप से निजी स्वच्छता पर केंद्रित हैं।
निजी कंपनियों के अलावा सार्वजनिक सेक्टर की कंपनियां भी इस प्रकार के प्रॉजेक्ट्स में महत्तवपूर्ण रूप से निवेश कर रही हैं। सार्वजनिक सेक्टर की अधिकतर कंपनियां जैसे कोल इंडिया, ओएनजीसी, ओआईएल, आईओसी एवं गेल ने स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े प्रॉजेक्ट्स के लिए अलग फंड निर्धारित किया है।

Friday, March 13, 2015

मुंबई मेट्रो-3 के सभी विवादों पर विराम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फणवीस ने मुंबई मेट्रो-3 के सभी विवादों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने गुरुवार को साफ किया कि मुंबई के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए यह बहुत जरूरी है। इसके रास्ते में आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। इससे प्रभावित होने वाले लोगों का पुनर्वास भी मेट्रो स्टेशन के पास ही किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्टेशन के डिजाइन इस तरह से बनाए जाएंगे कि प्रभावित लोगों का पुनर्वास वहीं पर किया जा सके।
मेट्रो-3 में आरे कॉलोनी की हरियाली खत्म करने की आशंका को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री ने विधानसभा में घोषणा की, 'इसके कारशेड बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई गई है। कारशेड के लिए 12 हेक्टर जमीन चाहिए। आरे कॉलोनी का जितना ग्रीन स्पेस बचा सकेंगे, जरूर बचाएंगे।' मुख्यमंत्री ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, 'आरे में ग्रीन स्पेस होने के बाद भी वहां पर गैरकानूनी निर्माण कार्य हुआ है। मेट्रो-3 में साउथ मुंबई की 28 इमारतें और 1,754 झोपड़े प्रभावित हो रहे हैं। इन इमारतों में करीब 777 परिवार रहते हैं। उन परिवारों को वहीं और बेहतर व बड़े मकानों में शिफ्ट किया जाएगा।' 

मुख्यमंत्री ने माना कि मुंबई का पब्लिक ट्रांसपोर्ट कमजोर है। यहां की सड़कों पर रोज करीब 25 लाख गाड़ियां निकलती हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत करने के बाद लोग अपनी गाड़ियों की बजाय मेट्रो से सफर करेंगे। इससे ट्रैफिक जैम की समस्या कम होगी। उन्होंने कहा कि विदेशी भले ही करोड़ों रुपये की गाड़ी रखें, लेकिन वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए यहां मेट्रो बेहद जरूरी है।
टोल मुक्त महाराष्ट्र की घोषणा पर मुख्यमंत्री ने अपनी पूरी भड़ास कांग्रेस-एनसीपी पर निकाली। उन्होंने सदन को बताया कि पिछली सरकार ने ठेकेदारों के साथ केंद्रीय टोल नियम को दरकिनार करने का करार किया। इससे ठेकेदारों की चांदी हुई। मुंबई में आने और मुंबई-पुणे एक्सप्रेस मार्ग जैसे अन्य महत्वपूर्ण मार्गों के लिए टोल के करार निजी कंपनियों के साथ इस तरह किए गए कि बाय-बैक है ही नहीं। अब यह स्टडी की जा रही है कि उन कंपनियों से टोल करार खत्म करके टोल मुक्त महाराष्ट्र कैसे बनाया जा सकता है।
बीजेपी-शिवसेना सरकार के कार्यकाल में ज्यादा मुजरिमों को सजा दिलाई गई है। पिछली सरकार के समय 8 से 12 पर्सेंट मुजरिमों को को ही सजा मिलती रही थी। जनवरी में यह दर बढ़कर 28 पर्सेंट हो गई। इसका श्रेय लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस तबादलों को पारदर्शी किया गया, फॉरेंसिक लैब्स की संख्या बढ़ाई जा रही है और वकीलों की नियुक्ति का अधिकार अटॉर्नी जनरल व लॉ सेक्रेटरी को दिया गया है।
सीएम ने कहा कि महाराष्ट्र का एक बूंद भी ज्यादा पानी गुजरात को नहीं देंगे। दमण गंगा-पिंजाल नदी जोड़ योजना का 75 पर्सेंट पानी महाराष्ट्र को और बाकी का 25 पर्सेंट पानी गुजरात को दिया जाएगा। यह करार पहले ही हो चुका है। महाराष्ट्र को मिलने वाला पानी मुंबई को सप्लाई किया जाएगा। इससे मुंबई की अगले 50 साल की पानी की समस्या खत्म हो जाएगी।

Friday, March 6, 2015

विराट कोहली को बाकी मैचों के लिए बैन

वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन कर रही भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। वाइस कैप्टन विराट कोहली को बाकी मैचों के लिए बैन कर दिया गया है। बीसीसीआई ने अधिकारिक बयान जारी करके कहा है कि कोहली ने टीम के नियम तोड़े हैं। वह टीम का साथ छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में अपनी फ्रेंड के साथ घूम रहे थे। सूत्रों का कहना है कि बॉलिवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इस वक्त विराट के साथ ही हैं।
टीम के मैनेजर रवि शास्त्री का कहना है कि आज वेस्ट इंडीज के साथ हो रहे मैच में विराट खेलेंगे, लेकिन आगे के मैचों में हमें उनकी कमी खलेगी। टीम के दूसरे लड़के अनुशासन में रहें, इसलिए विराट के खिलाफ लिया गया ऐक्शन बिल्कुल ठीक है। वर्ल्ड कैप के बाकी के मैचों के लिए सुरेश रैना को वाइस कैप्टन बनाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, विराट पिछले दो दिनों से टीम के साथ नहीं थे। हंगामा तब शुरू हुआ जब कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिस गेल से निपटने की रणनीति बनाने के लिए अहम मीटिंग बुलाई। विराट इस मीटिंग में भी नहीं दिखे। धोनी ने इस बात की शिकायत शास्त्री से की। इस बीच ऑस्ट्रेलिया की मीडिया में वे तस्वीरें भी सामने आ गईं जिसमें विराट और अनुष्का साथ में दिख रहे थे। बीसीसीआई ने फौरन ऐक्शन लेते हुए विराट को आगे के मैचों में खेलने से बैन कर दिया।
इससे पहले इंग्लैंड टूर पर भी अनुष्का विराट के साथ थीं। उस समय विराट कोई बड़ा स्कोर नहीं कर पा रहे थे और इसे लेकर उन्हें काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। हालांकि इसके बाद ही वह फॉर्म में वापस आ गए थे। अटकलें लगाई जा रही हैं कि तीन दिन पहले उन्होंने भारत के एक पत्रकार के साथ भी गलत बर्ताव किया। पत्रकार ने विराट से अनुष्का के बारे में कोई सवाल किया था। विराट ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
विराट पर बैन के मामले में धोनी ने कहा कि हम विराट को मिस करेंगे। हालांकि टीम के सभी बैट्समैन अच्छे फॉर्म में हैं। इस मामले में कुछ पूर्व क्रिकेटर विराट के साथ हैं। सुनील गावस्कर ने कहा कि विराट बेशक किसी के साथ भी घूम सकते हैं, लेकिन उन्हें इस बारे में टीम मैनेजमेंट को बताना चाहिए था। उम्मीद है कि कुछ मैचों पर बैन के बाद बीसीसीआई उन्हें दोबारा खेलने की इजाजत दे देगी। (बुरा ना मानो होली है)

Friday, February 27, 2015

मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल

ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और ट्रैवल में लगने वाला समय घटाने के मकसद से सुरेश प्रभु की अगुवाई वाला रेल मंत्रालय जल्द ही बुलेट ट्रेनों की तर्ज पर बिना इंजन के खुद चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत करेगा। इससे मेट्रो शहरों के बीच ट्रैवल का समय 20 पर्सेंट कम किया जा सकेगा और हवाई जहाज से सफर करने वाले बहुत से लोग भी ट्रेनों की सवारी करना पसंद करेंगे।
इस प्रोजेक्ट की लागत 100 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसके लिए अगले दो वर्षों में देश में इम्पोर्टेड ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। प्रभु ने गुरुवार को अपना पहला रेल बजट पेश करने के दौरान बताया, 'यात्रा का बेहतर अनुभव देने और ट्रैवल टाइम में लगभग 20 पर्सेंट की कटौती करने के मकसद से ट्रेन सेट्स के नाम से एक मॉडर्न ट्रेन सिस्टम शुरू करने का प्रपोजल है। ये डिजाइन में बुलेट ट्रेनों जैसी होंगी और बिना इंजन के मौजूदा ट्रैक्स पर चल सकेंगी।'
उन्होंने कहा कि इससे रेलवे की कपैसिटी बढ़ेगी, एनर्जी की बचत होगी और आउटपुट में इजाफा किया जा सकेगा। प्रभु के मुताबिक, 'हमें इन ट्रेनों के पहले सेट के हमारे सिस्टम पर अगले दो वर्षों के अंदर चलने की उम्मीद है। अनुभव के आधार पर इन ट्रेन सेट्स की भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर विचार किया जाएगा।'
रेलवे मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने इकॉनमिक टाइम्स को बताया कि एक ट्रेन सेट में आठ कोच होंगे, जिन्हें 100 करोड़ रुपये की कीमत पर आयात किया जाएगा। ये मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चलेंगे। फीडबैक वेंचर्स के विनायक चटर्जी ने कहा, 'ट्रेन सेट्स ईएमयू (इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट्स) का बेहतर वर्जन हैं।'
उनका कहना था कि ये ट्रेनें राजधानी और शताब्दी की जगह ले सकती हैं। भारतीय रेलवे ने नौ रेलवे कॉरिडोर की स्पीड मौजूदा 110 और 130 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 160 और 200 किलोमीटर प्रति घंटा करने का प्रपोजल दिया है जिससे दिल्ली-कोलकाता और दिल्ली-मुंबई रूट्स पर यात्रा एक रात में पूरी की जा सकेगी। इसके लिए ट्रैक को अपग्रेड करना होगा, जिसमें रोलिंग स्टॉक में सुधार करना और ट्रैक रिकॉर्डिंग, मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस के लिए बेहतर तरीके अपनाना शामिल होगा। इसके साथ ही ट्रेन सेट्स की भी शुरुआत की जाएगी।
सीआईआई की रेल कमिटी के को-चेयरमैन तिलक राज सेठ ने कहा, 'मेट्रो शहरों के बीच यात्रा का समय कम करने की योजना केवल बिना लोकोमोटिव के खुद चलने वाले कोचों से ही संभव है। इसके शुरू होने पर एयर ट्रैवलर्स को भी खींचने में मदद मिलेगी।' मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल या बुलेट ट्रेन के बारे में प्रभु ने कहा, 'इसके लिए फिजिबिलिटी स्टडी अंतिम दौर में है और इसके इस वर्ष के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट आने के बाद इस पर तुरंत काम किया जाएगा।'
बुलेट ट्रेनें भले ही भारत के लिए अभी दूर की कौड़ी हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ट्रेन सेट्स के तौर पर इनका एक छोटा वर्जन शुरू करने की तैयारी कर रही है। बुलेट ट्रेन की तर्ज पर चलने वाले ट्रेन सेट्स में कोचों को खींचने के लिए लोकमोटिव या इंजन नहीं होता। इसके नतीजे में पावर पूरे सिस्टम में समान तौर पर डिस्ट्रीब्यूट होती है और ट्रैवल का समय काफी कम हो जाता है। हालांकि, बुलेट ट्रेन की तरह इनके लिए अलग से ट्रैक बिछाने की जरूरत नहीं होती। शुरुआत में इन ट्रेन सेट्स का इम्पोर्ट किया जाएगा। बाद में इनकी मैन्युफैक्चरिंग देश में ही की जा सकती है।