Tuesday, June 23, 2015

स्वच्छता अभियान

साथियों,
वर्तमान एक महीना बहुत ही पवित्र है । चाहे हिंदु हो या मुसलमान , सभी के लिए ।
हिंदुओं के लिए यह माह मल-मास (अधिक मास) के रूप में और मुसलमानों के लिए पवित्र रमजान
आइए इस पवित्र माह को स्वच्छता अभियान से जोड़ दें और अपने आस पास गंदगी न रहने दें ।

स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनें । 

Monday, June 15, 2015

नियामक प्राधिकरण बनाकर रेल बजट को खत्म करने की सिफारिश

भारतीय रेलवे में सुधार को लेकर बिबेक देबरॉय कमिटी की सिफारिशों पर विवाद की गुंजाइश तो है, लेकिन इनमें से भविष्य के लिए कई रास्ते भी निकल सकते हैं। सच कहा जाए तो इसने रेलवे पर लीक से हटकर विचार करने पर जोर दिया है। 
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे के हालात बदलने और संसाधन जुटाने के उपाय सुझाने के लिए इस कमिटी का गठन पिछले साल सितंबर में किया गया था। कमिटी ने 5 साल का एक रोडमैप पेश किया है, जिसके आधार पर रेलवे में व्यापक बदलाव की बात कही गई है। इसमें रेलवे की आर्थिक ग‌तिविधियों के संचालन के लिए नियामक प्राधिकरण बनाकर रेल बजट को खत्म करने की सिफारिश की गई है। 
रेलवे को मुख्य रूप से दो निकायों में बांटने का सुझाव दिया गया है। एक निकाय बुनियादी ढांचे की देखभाल के लिए होगा तो दूसरा संचालन संबंधी काम देखेगा। इसके अलावा ट्रेनों के संचालन को प्राइवेट हाथों में देने का प्रस्ताव रखा गया है और कहा गया है कि इसकी शुरुआत सवारी गाड़ियों से की जा सकती है। 
साथ ही रेलवे के लिए स्वतंत्र और अर्ध-न्यायिक रेलवे नियामक प्राधिकारण बनाने की अनुशंसा भी की गई है। कमिटी ने कहा है कि सरकार रेलवे के सामाजिक दायित्व का सारा दबाव रेलवे पर सब्सिडी के रूप में डाल देती है जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। कमिटी का बुनियादी सवाल है कि रेलवे एक आर्थिक सेवा है या सामाजिक सेवा करने वाली कोई संस्था? आखिर रेलवे को स्कूल, अस्पताल चलाने और सुरक्षा बल रखने की क्या जरूरत है? इसे एक आधुनिक परिवहन सेवा समझने और उसे उसी रूप में विकसित किए जाने की जरूरत है। 
रिपोर्ट में रेलवे में निजी कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है और प्रतिस्पर्धा का माहौल सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है। दरअसल कमिटी रेलवे को एक सरकारी विभाग से ज्यादा एक कंपनी के रूप में विकसित करने की पक्षधर है। मगर दिक्कत यह है कि हमारे देश में रेलवे सियासत का एक टूल बनी हुई है। गठबंधन राजनीति के दौर में सत्तारूढ़ दल हमेशा अपने गठजोड़ के सबसे बड़े सहयोगी दल को संतुष्ट करने के लिए उसे रेल मंत्री का पद देता आया है। 
रेल बजट के जरिए सरकार अपने पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश करती है। अपने वोटबैंक को एकजुट करती है। इसके लिए बिना किसी ठोस आधार के गाड़ियां चलाई जाती हैं। आज भी जिन सरकारी महकमों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है, उनमें रेलवे प्रमुख है। इसमें भर्तियों के घोटाले अक्सर सामने आते रहते हैं। यह लालफीताशाही की प्रतीक है। इसमें छोटे से छोटे फैसले लेने में वर्षों लग जाते हैं। 
नतीजा यह है कि स्वतंत्रता के समय भारत का रेलवे नेटवर्क चीन से दोगुना था। पर आज चीन हमसे मीलों आगे नजर आ रहा है। कमिटी की राय स्पष्ट है कि रेलवे को अगर प्रफेशनल ढंग से नहीं चलाया गया तो कभी यह फायदे में नहीं आएगी और इसके आधुनिकीकरण का सपना भी कभी पूरा नहीं हो पाएगा।

Tuesday, June 9, 2015

ट्रेनों को रोकने के लिए लगी चेन जल्द ही हटा दी जाएगी

ट्रेन के डिब्बों पर लिखा मेसेज 'गाड़ी खड़ी करने के लिए जंजीर खींचिए' अब बीते दौर की बात बन जाएगा। आपात स्थिति में ट्रेनों को रोकने के लिए लगी चेन जल्द ही हटा दी जाएगी। बेवजह होने वाली चेन पुलिंग से निपटने के लिए रेल मंत्रालय ने ट्रेन के डिब्बों से चेन को हटाने का फैसला किया है।
रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि बिना कारण चेन पुलिंग के चलते ट्रेनें अक्सर समय पर नहीं पहुंच पातीं। इस वजह से रेलवे को 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा है। बरेली के इज्जतनगर में ट्रेनों से चेनों को हटाने का काम शुरू हो गया है।
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कोच में ड्राइवर और सहायक ड्राइवर के मोबाइल नंबर लिखे जाएंगे। आपात स्थिति में यात्री उन पर कॉल कर सकेंगे।
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर डिविजन के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने कहा, 'देशभर की फैक्ट्रियों में बन रहे नए कोचों में अलार्म चेन नहीं लगाई जा रही हैं। ट्रेन में ड्राइवर और सहायक ड्राइवर के मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने के अलावा हर तीन डिब्बों के लिए एक कर्मचारी वॉकी-टॉकी के साथ तैनात किया जाएगा।'
केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने बरेली की यात्रा के दौरान कहा कि चेन खींचकर ट्रेन रोकना उत्तर प्रदेश और बिहार की एक गंभीर समस्या है। बिना वाजिब कारण के ट्रेन रोकने की वजह से रेलवे को भारी नुकसान हुआ है। रेलवे बोर्ड की अधिसूचना में पहले ही कोचों में चेन न लगाने को कहा जा चुका है।
इज्जतनगर डिविजन के डिविजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) चंद्र मोहन जिंदल ने कहा, 'ट्रेनों में देरी के प्रमुख कारणों में चेन पुलिंग को नकारा नहीं जा सकता। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में चेन पुलिंग एक गंभीर समस्या है।'