Friday, February 27, 2015

मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल

ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और ट्रैवल में लगने वाला समय घटाने के मकसद से सुरेश प्रभु की अगुवाई वाला रेल मंत्रालय जल्द ही बुलेट ट्रेनों की तर्ज पर बिना इंजन के खुद चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत करेगा। इससे मेट्रो शहरों के बीच ट्रैवल का समय 20 पर्सेंट कम किया जा सकेगा और हवाई जहाज से सफर करने वाले बहुत से लोग भी ट्रेनों की सवारी करना पसंद करेंगे।
इस प्रोजेक्ट की लागत 100 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसके लिए अगले दो वर्षों में देश में इम्पोर्टेड ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। प्रभु ने गुरुवार को अपना पहला रेल बजट पेश करने के दौरान बताया, 'यात्रा का बेहतर अनुभव देने और ट्रैवल टाइम में लगभग 20 पर्सेंट की कटौती करने के मकसद से ट्रेन सेट्स के नाम से एक मॉडर्न ट्रेन सिस्टम शुरू करने का प्रपोजल है। ये डिजाइन में बुलेट ट्रेनों जैसी होंगी और बिना इंजन के मौजूदा ट्रैक्स पर चल सकेंगी।'
उन्होंने कहा कि इससे रेलवे की कपैसिटी बढ़ेगीएनर्जी की बचत होगी और आउटपुट में इजाफा किया जा सकेगा। प्रभु के मुताबिक, 'हमें इन ट्रेनों के पहले सेट के हमारे सिस्टम पर अगले दो वर्षों के अंदर चलने की उम्मीद है। अनुभव के आधार पर इन ट्रेन सेट्स की भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर विचार किया जाएगा।'
रेलवे मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने इकॉनमिक टाइम्स को बताया कि एक ट्रेन सेट में आठ कोच होंगेजिन्हें 100 करोड़ रुपये की कीमत पर आयात किया जाएगा। ये मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चलेंगे। फीडबैक वेंचर्स के विनायक चटर्जी ने कहा, 'ट्रेन सेट्स ईएमयू (इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट्स) का बेहतर वर्जन हैं।'
उनका कहना था कि ये ट्रेनें राजधानी और शताब्दी की जगह ले सकती हैं। भारतीय रेलवे ने नौ रेलवे कॉरिडोर की स्पीड मौजूदा 110 और 130 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 160 और 200 किलोमीटर प्रति घंटा करने का प्रपोजल दिया है जिससे दिल्ली-कोलकाता और दिल्ली-मुंबई रूट्स पर यात्रा एक रात में पूरी की जा सकेगी। इसके लिए ट्रैक को अपग्रेड करना होगाजिसमें रोलिंग स्टॉक में सुधार करना और ट्रैक रिकॉर्डिंगमॉनिटरिंग और मेंटेनेंस के लिए बेहतर तरीके अपनाना शामिल होगा। इसके साथ ही ट्रेन सेट्स की भी शुरुआत की जाएगी।
सीआईआई की रेल कमिटी के को-चेयरमैन तिलक राज सेठ ने कहा, 'मेट्रो शहरों के बीच यात्रा का समय कम करने की योजना केवल बिना लोकोमोटिव के खुद चलने वाले कोचों से ही संभव है। इसके शुरू होने पर एयर ट्रैवलर्स को भी खींचने में मदद मिलेगी।मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल या बुलेट ट्रेन के बारे में प्रभु ने कहा, 'इसके लिए फिजिबिलिटी स्टडी अंतिम दौर में है और इसके इस वर्ष के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट आने के बाद इस पर तुरंत काम किया जाएगा।'
बुलेट ट्रेनें भले ही भारत के लिए अभी दूर की कौड़ी हैंलेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ट्रेन सेट्स के तौर पर इनका एक छोटा वर्जन शुरू करने की तैयारी कर रही है। बुलेट ट्रेन की तर्ज पर चलने वाले ट्रेन सेट्स में कोचों को खींचने के लिए लोकमोटिव या इंजन नहीं होता। इसके नतीजे में पावर पूरे सिस्टम में समान तौर पर डिस्ट्रीब्यूट होती है और ट्रैवल का समय काफी कम हो जाता है। हालांकिबुलेट ट्रेन की तरह इनके लिए अलग से ट्रैक बिछाने की जरूरत नहीं होती। शुरुआत में इन ट्रेन सेट्स का इम्पोर्ट किया जाएगा। बाद में इनकी मैन्युफैक्चरिंग देश में ही की जा सकती है।

Wednesday, February 18, 2015

माएं बच्चे पैदा करने की फैक्ट्री नहीं

बीजेपी सांसद साक्षी महाराज की हिंदू महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि हमारी माएं बच्चे पैदा करने की फैक्ट्री नहीं हैं।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कानपुर में सोमवार को संघ से जुड़े संगठनों के एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा, 'हमारी माताएं फैक्ट्री नहीं हैं, बच्चा पैदा करना व्यक्तिगत निर्णय है।' 

हालांकि भागवत ने साक्षी महाराज का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, 'मैं किसी को बोलने से कैसे रोक सकता हूं? लेकिन, कुछ कहने से पहले सोचना चाहिए।' अखबार के मुताबिक उस बैठक में मौजूद लोगों ने बताया कि भागवत ने हिंदुओं के घटते अनुपात का जिक्र किया और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया।
भागवत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए कहा कि उनमें इच्छा शक्ति है, हमें अपने स्वयंसेवकों पर भरोसा होना चाहिए। जब बैठक में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि केंद्र सरकार को हिंदू वर्ष और आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार के जन्मदिन को राष्ट्रीय दिवस घोषित करना चाहिए, तो संघ प्रमुख ने कहा, 'सरकार अपने ढंग से काम करती है। मैं भी प्रधानमंत्री बन जाऊं तो ऐसे ही काम करूंगा।'
भागवत ने लोगों से कहा कि हमें यह कहना बंद कर देना चाहिए कि यह हमारी सरकार है, हम सभी को अपना काम करते रहना है।

Wednesday, February 4, 2015

मैनेजमेंट प्रोग्राम अब अपनी चमक खो रहा है

देश भर में मैनेजमेंट प्रोग्राम अब अपनी चमक खोता जा रहा है  ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा जारी किए गए लेटेस्ट आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले अकैडमिक वर्ष में देश भर में इंजिनियरिंग संस्थानों द्वारा ऑफर किए जा रहे 147 बिजनस स्कूल और एमबीए प्रोग्राम बंद हो गए।
मैनेजमेंट संस्थानों में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोम प्रोग्राम की संख्या भी 606 से कम होकर 600 हो गई है। सबसे ज्यादा 24 एमबीए कॉलेज महाराष्ट्र में बंद हुए, उसके बाद तमिलनाडु में 23 और आंध्र प्रदेश में 19 एमबीए कॉलेज बंद हुए।  सिर्फ बिहार, झारखंड और केरल में नए संस्थानों में इजाफा हुआ है। इन राज्यों ने इस अवधि में एक-एक नए संस्थान शुरू किए हैं।

एजुकेशनल कंसल्टेंट मूर्ति सेल्वाकुमारन ने कहा कि ज्यादातर संस्थानों के बंद होने का कारण मुख्य रूप से संरक्षण का अभाव था। कॉमन ऐडमिशन टेस्ट में कमी होने के साथ यह गिरावट करीब दो साल पहले शुरू हुई। कॉमन ऐडमिशन टेस्ट के आधार पर ही देश भर के अग्रणी मैनेजमेंट संस्थानों और अन्य मैनेजमेंट प्रोग्राम में दाखिला मिलता है।
ग्रेट लेक्स इंस्टिट्युट ऑफ मैनेजमेंट के डायरेक्टर टी.एन.स्वामीनाथन का कहना है कि बिजनस स्कूलों के बंद होने का कारण सरप्लस सप्लाई और मांग में कमी का होना था। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, इस साल कैट के लिए 1.93 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया जिनमें से मात्र 1.53 लाख छात्रों ने परीक्षा दी।'
सेल्वाकुमारन का कहना है कि इंजिनियरिंग संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे कई मैनेजमेंट कोर्स बंद हो रहे हैं क्योंकि वे छात्रों की स्किल्स में बेहतरी लाने और उनको रोजगार परक बनाने पर पर्याप्त रूप से ध्यान नहीं दे रहे हैं।
स्वामीनाथन ने कहा कि कइयों को इसलिए बंद करना पड़ा, क्योंकि उनलोगों ने युनिवर्सिटी का पाठ्यक्रम अपनाया जो आउटडेट हो चुके थे और वे स्वायत्त बिजनस स्कूलों की तरह छात्रों को आकर्षित नहीं कर सकें। स्वायत्त बिजनस स्कूल मार्केट की जरूरत के मुताबिक अपने पाठ्यक्रम को अपडेट करते रहते हैं।
मार्केट में ऑनलाइन मैनेजमेंट प्रोग्राम ने भी अपने पैठ बनाई है। मैनेजमेंट ऐंड आन्त्रप्रन्योरशिप में लाखों छात्रों को प्रशिक्षण देने वाले ऑनलाइन बिजनस स्कूल MyBSkool.com के संस्थापक के.स्वामीनाथन के कहा कि कई संस्थानों के पास अच्छी टीचिंग फैकल्टी का अभाव है जिस कारण उनको मैनेजमेंट प्रोग्राम चलाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, 'बिजनस स्कूलों में फैकल्टी के अभाव में एमबीए की पढ़ाई तुरंत समाप्त करने वाले लोग पढ़ा रहे हैं। एक अच्छे मैनेजमेंट कोर्स के लिए उद्योग जगत का अनुभव रखने वाले फैकल्टी की जरूरत है। ऑनलाइन प्रोग्राम बेस्ट फैकल्टी के साथ यह चीज प्रदान करने में सफल है क्योंकि इसमें समय और दूरी की कोई चिंता नहीं रहती है