Saturday, November 29, 2014

उपभोक्ता स्कूल फीस से लेकर बिजली, पानी के बिलों का भुगतान एक ही स्थान पर

जल्द ही एक ऐसा सिस्टम आने वाला है जिसकी मदद हर कोई किसी भी वक्त और किसी भी तरह का बिल पेमेंट कर सकेगा। अभी कुछ हद तक इस सुविधा का फायदा वही लोग उठा रहे हैं जो नेटबैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत जल्द यह सुविधा सबके लिए होगी। 
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस तरह के सिस्टम शुरू करने के लिए अंतिम दिशा-निर्देश शुक्रवार की देर शाम जारी कर दिए। इस सिस्टम को 'भारत बिल पेमेंट सिस्टम' (बीबीपीएस) का नाम दिया गया है। इसके जरिए उपभोक्ता स्कूल फीस से लेकर बिजली, पानी के बिलों का भुगतान एक ही स्थान पर कर सकेंगे। 

आरबीआई के गाइडलाइंस में कहा गया है, 'बीबीपीएस एक सिंगल बिल पेमेंट सिस्टम होगा। इस सिस्टम में एजेंटों, विभिन्न पेमेंट सिस्टम और पेमेंट संबंधी जानकारी प्राप्त होने का एक व्यापक नेटवर्क होगा, जिसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा।' इस तरह का नेटवर्क स्थापित करने के लिए आरबीआई द्वारा प्रवर्तित नैशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) को शीर्ष एजेंसी बनाया गया है। 
ध्यान रहे कि एनपीसीआई ने ही रुपे कार्ड जारी किया है। आरबाआई ने बीबीपीएस के तहत अथॉराइज्ड पेमेंट कलेक्शन एजेंट बनने के लिए 100 करोड़ रुपये की नेटवर्थ और घरेलू रजिस्ट्रेशन को जरूरी शर्त रखी है। 
गौरतलब है कि रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने सबसे पहले पिछले साल दूसरी तिमाही मौद्रिक नीति में इस तरह की एकीकृत भुगतान प्रणाली स्थापित किए जाने की मंशा जाहिर की थी। इसके बाद इसके बारे में तौर-तरीके सुझाने के लिए एक समिति गठित की गई। समिति की सिफारिशों के आधार पर 7 अगस्त को दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया गया था। 
ये दिशा-निर्देश रिजर्व बैंक द्वारा भुगतान बैंकों और लघु वित्तीय बैंकों के बारे में अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाने के एक दिन बाद ही जारी किए गए।

Saturday, November 15, 2014

अभियान की बागडोर मेट्रोमैन ई. श्रीधरन को

नए रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेलवे में सुधार की एक अच्छी पहल की है। उन्होंने अपने अभियान की बागडोर मेट्रोमैन ई. श्रीधरन को सौंप दी है। उन्हें उस एक सदस्यीय समिति का प्रमुख बनाया गया है, जो रेलवे के कमर्शल मामलों में जिम्मेदारी और पारदर्शिता लाने के उपाय सुझाएगी।
श्रीधरन की योग्यता और क्षमता पर देश में शायद ही किसी को कोई संदेह होगा। दिल्ली मेट्रो से शुरू करके उन्होंने देश भर में मेट्रो की महत्वाकांक्षा जगा दी और महानगरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का स्वरूप ही बदल डाला। सिर्फ पंद्रह वर्षों में मेट्रो सटीक वक्त पर, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करने का पर्याय बन गई है। श्रीधरन का रेलवे से जुड़ना इसलिए भी उम्मीद जगा रहा है कि वह काम के मामले में कोई समझौता न करने के लिए जाने जाते हैं।
जहां तक भारतीय रेलवे का प्रश्न है तो फिलहाल उसकी ख्याति अपनी अकुशलता, लेट लतीफी और करप्शन के लिए ही है। तमाम सरकारी प्रतिष्ठानों में रेलवे का दर्जा भ्रष्टाचार के मामले में सबसे ऊंचा है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के अनुसार 2013 में उसे करप्शन की सबसे ज्यादा शिकायतें रेलवे से ही मिलीं।

पिछले साल तत्कालीन रेल मंत्री पवन कुमार बंसल को रेलवे के शीर्ष पदों की नियुक्ति में जारी भ्रष्टाचार के चलते ही अपने पद से हाथ धोना पड़ा था। बंसल पर आरोप था कि उन्होंने रिश्वत लेकर एक अधिकारी को रेलवे बोर्ड में रखा। अधिकारी बोर्ड में इसलिए आना चाहते हैं ताकि मोटी घूस के एवज में टेंडर के हेरफेर से मनमाने लोगों को मोटे फायदे पहुंचा सकें। दरअसल राजनेताओं, नौकरशाहों, ठेकेदारों और दलालों का एक गठजोड़ रेलवे को हर साल करोड़ों का चूना लगा रहा है। इसलिए इसमें सुधार के पहले कदम के रूप में सुरेश प्रभु टेंडरिंग प्रोसेस को ही बदलना चाहते हैं।
मौजूदा नियमों के तहत 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर रेलवे बोर्ड के तहत आते हैं और इन्हें मंत्री खुद क्लीयर करते हैं। प्रभु की योजना एक ऐसा पारदर्शी सिस्टम बनाने की है, जिसमें टेंडर और खरीद के मामलों का मंत्री की मेज तक पहुंचना गैरजरूरी हो जाए। वह रेलवे के विकेंद्रीकरण के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि रेलवे बोर्ड के कई अधिकार संबंधित जोन के हवाले कर दिए जाएं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि नौकरशाहों का रोल तब भी बना रहेगा क्योंकि मंत्री न सही, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और बोर्ड के सीनियर मेंबर्स टेंडरिंग प्रोसेस में जीएम पर दबाव डाल ही सकते हैं। देखना यह है कि श्रीधरन इसकी क्या काट ढूंढते हैं। एनडीए सरकार के बाकी मंत्री भी सुरेश प्रभु की तरह प्रयास करें तो अतिशय राजनीतिक होने का आरोप उन पर से हट जाएगा और सरकार की साख बेहतर होने लगेगी।

Sunday, November 9, 2014

कस्टमर्स को एटीएम के जरिए बैंक एग्जेक्यूटिव्स के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सहूलियत

मुंबई की ग्लोबल कंजयूमर ट्रांजैक्शन टेक्नॉलजीज कंपनी एनसीआर ने एक नया इनोवेशन -एप्ट्रा इंटरैक्टिव टेलर- पेश किया है, जो कस्टमर्स को एटीएम के जरिए बैंक एग्जेक्यूटिव्स के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सहूलियत देता है। एनसीआर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर नवरोज दस्तूर ने नई मशीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल बूम के बावजूद कई भारतीय कंजयूमर्स अडवांस्ड बैंकिंग सॉल्यूशंस का इस्तेमाल करने में संकोच करते हैं। 
नए सॉल्यूशंस इस्तेमाल करने को लेकर जागरूकता या जानकारी की कमी व्यक्ति को शंकित करती है। उन्होंने बताया कि मार्केट की जरूरत को समझते हुए हमने इंटरैक्टिव टेलर डिवेलप किया है, जो बैंक कस्टमर्स को सेल्फ सर्विस बैंकिंग और ब्रांच एक्सपीरियंस दोनों की सहूलियत देता है।
 

उन्होंने बताया कि यूनीक सॉल्यूशन होने के कारण यह 24X7 एटीएम पर ही 80 फीसदी से ज्यादा बैंकिंग ट्रांजैक्शन पूरा करने की सुविधा देता है। इंटरैक्ट्रिव टेलर को इंडस्ट्री से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। उन्होंने बताया कि अगस्त में दिल्ली में इंडसइंड बैंक के लिए हमने पहली मशीन लगाई है। हम दूसरे बैंकों के साथ भी इस बारे में बातचीत कर रहे हैं। दस्तूर ने बताया कि यह एटीएम आपको पर्सनलाइज्ड दो-तरफा विडियो-ऑडियो इंटरैक्शन के लिए लाइव और सेंट्रलाइज्ड टेलर से कनेक्ट करते हैं। सॉल्यूशन रेगुलर बैंकिंग ट्रांजैक्शंस को सपोर्ट करता है। 
विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अलावा यह एटीएम आपको कैश डिपॉजिट, फंड ट्रांसफर, यूटिलिटी बिल पेमेंट्स, इनवेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स की इंक्वायरी की सहूलियत देता है। इसके अलावा, कस्टमर्स ट्रेडिशनल एटीएम कार्ड के बगैर भी अपने आइडेंटिटी कार्ड की स्कैनिंग के जरिए ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रांजैक्शंस के लिए यह पूरी तरह सुरक्षित माध्यम है, क्योंकि इसमें कई स्तर के सिक्योरिटी सॉल्यूशंस हैं। दस्तूर ने बताया कि एनसीआर इंटरैक्टिव टेलर कस्टमर्स को 24X7 सर्विसेज ऑफर करता है। इसमें कस्टमर्स बैंकिंग आवर्स के बाद भी ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।