Friday, May 23, 2014

कुछ ही दिनों में आपका घरेलू बिल ऊपर

नरेंद्र मोदी के पीएम पद संभालने के कुछ ही दिनों में आपका घरेलू बिल ऊपर जा सकता है, बशर्ते नई सरकार कई मंत्रालयों की सिफारिशें मान ले। कई मंत्रालय मोदी के सामने ऐसा प्रस्ताव रखने की तैयारी में हैं जिसमें उनसे सब्सिडी घटाने का अनुरोध किया जाएगा। इनमें फाइनैंस, फर्टिलाइज़र और पेट्रोलियम जैसे मंत्रालय शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन तीन मंत्रालयों की ओर से मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके सामने रखे जाने वाले प्रेजेंटेशन में सब्सिडी एक अहम मसला होगा। बताया जा रहा है कि प्रेजेंटेशन में बताया जाएगा कि सब्सिडी बेकार के खर्च घटाने और निवेश बढ़ाने की राह में एक बड़ी बाधा है।

Thursday, May 8, 2014

मनमोहन सिंह की बेटी काफी आहत हुई थीं और चाहती थीं कि उनके पिता इस्तीफा दे दें

राहुल गांधी ने जब दागी नेताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत देने वाला बिल कांग्रेस फाड़ा था तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी काफी आहत हुई थीं और चाहती थीं कि उनके पिता इस्तीफा दे दें। ऐसा दावा पीएम के पूर्व सलाहकार संजय बारू ने किया है।
विवादों में घिरी अपनी किताब 'द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के मुंबई में लोकार्पण के वक्त बारू ने बुधवार को कहा कि 2009 में यूपीए के दोबारा सत्ता में आने के बाद उन्होंने पीएम को कई बार इस्तीफा देने की सलाह दी थी।
बारू के मुताबिक राहुल गांधी के बिल फाड़ने की घटना के बाद, 'आखिरकार मैं टीवी पर आया और मैंने कहा कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। मुझे उनकी बेटी की ओर से एक मेसेज मिला, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह मुझसे सहमत हैं।' बारू ने हालांकि यह नहीं बताया कि पीएम की दोनों में से किस बेटी ने अपने पिता के इस्तीफा देने की बात पर सहमति जताई थी।
बारू ने कहा कि प्रधानमंत्री मानते थे कि 2009 लोकसभा चुनावों में यूपीए की जीत उनकी जीत थी। वह बताते हैं, 'मैंने प्रधानमंत्री को कभी टांग पर टांग चढ़ाकर बैठे नहीं देखा था। लेकिन उस दिन (2 जून 2009) जब मैं उनसे मिला तो वह अपनी टांगें बांधकर बैठे हुए थे और जीत के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन उन्हें किसी ने उस जीत का श्रेय नहीं दिया। मेरे दोस्त पृथ्वीराज चव्हाण, जिन्हें सिंह ही पीएमओ में लाए थे, उन्होंने भी कहा कि जीत का श्रेय राहुल गांधी को जाता है।'
बारू के मुताबिक उनकी किताब भारतीय राजनीति में एक अनूठे प्रयोग का विश्लेषण है, 'ऐसा प्रयोग जो पहले पांच साल सफल रहा और उसके बाद के पांच साल में विफल हो गया।'
बारू ने एक और घटना का जिक्र किया जो किताब में नहीं है। उन्होंने बताया कि 2007 में जब लक्ष्मी मित्तल फ्रांसीसी कंपनी आर्सेलर मित्तल का अधिग्रहण कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने मित्तल के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति से बात की थी।

Friday, May 2, 2014

1925 से लेकर 1970 तक यातायात में आए बदलाव पर रिसर्च

जर्मनी की गैटिनियन यूनिवर्सिटी का एक छात्र स्टीफन टेट जलाफ भारत में 1925 से लेकर 1970 तक यातायात में आए बदलाव पर रिसर्च करने के लिए इन दिनों भारत में हैं।
देश के कई हिस्सों में शोध करने के बाद स्टीफन आजकल मेरठ और मुजफ्फरनगर में अपने रिसर्च के काम में लगे हुए हैं। मेरठ में रिसर्च करने के बाद गुरुवार को वे मुजफ्फरनगर पहुंचे। उनका कहना है कि जर्मनी की कुल जनसंख्या भारत के कई राज्यों से कम है। इसके बावजूद जर्मनी की सड़कों की चौड़ाई ज्यादा है। टेट को हिंदी का भी अच्छा ज्ञान है।
 
मुजफ्फरनगर के डीएम कार्यालय पहुंचे स्टीफन ने डेप्युटी कलक्टर मुनीष चंद शर्मा से मिलकर अपने रिसर्च के बारे में जानकारी दी और सहयोग की अपील की। स्टीफन ने मुलाकात के दौरान बताया कि उन्होंने जेएनयू से इतिहास का अध्ययन किया है। यूं तो वे जर्मनी की गैटिनियन यूनिवर्सिटी के प्रफेसर रवि आहूजा के अंडर में शोध कर रहे हैं, लेकिन भारत में उनके सेकंड गाइड की भूमिका प्रो. राधिका सिंह निभा रही हैं।
 
उन्होंने बताया कि भारत में शिक्षा का स्तर अच्छा है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं अच्छी नहीं हैं। उनका मानना है कि यहां शिक्षा के प्राइमरी और सेकंडरी लेवल को ऊंचा उठाने की आवश्यकता है। वह भारत में 1925 से लेकर 1970 के बीच मोटर परिवहन के इतिहास में हुए बदलावों पर शोध कर रहे हैं और अब तक दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर, आगरा और मेरठ का भ्रमण कर चुके हैं।
 
उन्होंने बताया कि जब वह सामाजिक कार्य के लिए 2002 में श्रीलंका गए थे, तभी यह शोध करने का विचार उनके मन में आया था। यह अलग तरह का शोध है, जिसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ रही है।
 
उन्होंने बताया कि जर्मनी में जहां सड़कें चौड़ी होती हैं, वहीं भारत में ये काफी संकरी हैं। जर्मनी की जनसंख्या भारत के दिल्ली, कोलकाता, कानपुर की जनसंख्या से भी कम है। भारत में मिल रही मेहमानवाजी से स्टीफन काफी खुश हैं। स्टीफन मुजफ्फरनगर के अपर जिलाधिकारी प्रशासन इंद्रमणि त्रिपाठी से भी मिले। त्रिपाठी ने उन्हें ईआरके के पास पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए भेज दिया। स्टीफन यूं तो इन दिनों मेरठ में रह रहे हैं और वहीं से ही मुजफरनगर आते-जाते रहेंगे।