रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट देश में सबसे फायदे
वाला सौदा है। नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में तो यह बात और सही है, जहां प्रॉपर्टी
की कीमतों में आग लगी हुई है। अगर लॉन्ग टर्म में ओवरऑल रिटर्न की बात करें,
तो 15 साल में कोई भी प्रॉपर्टी आपको 15
फीसदी सीएजीआर से रिटर्न दे सकती है। इस तरह का रिटर्न किसी भी ऐसेट
से मिलना मुश्किल है। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि दिल्ली
और मुंबई में कीमतें इस लेवल पर पहुंच चुकी हैं कि अब इन शहरों में प्रॉपर्टी में
इन्वेस्टमेंट से बेहतर रिटर्न हासिल करना मुमकिन नहीं है। हालांकि, अगर आप लॉन्ग टर्म रिकॉर्ड्स देखेंगे तो ऊंची कीमतों के बावजूद रिटर्न
बेहतर रहा है।
अभी बैंक इंटरेस्ट रेट घटा रहे हैं। इससे घर खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में पहले से तेज प्रॉपर्टी की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगी। लिहाजा, आप पर्सनल यूज या इन्वेस्टमेंट के लिए घर खरीदना चाहते हैं, तो कीमतें घटने का इंतजार करना आपके लिए ठीक नहीं होगा। अगर आप प्रॉपर्टी में पैसा लगाने चाहते हैं, तो लॉन्ग टर्म प्लान बेहतर रहेगा। एनसीआर में पिछले कुछ सालों में किराए में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अगर आप रेंटल इनकम की बात करें, तो घर खरीदने के लिए आपका इन्वेस्टमेंट काफी कम पड़ता है। मिसाल के तौर पर, अगर आप एक करोड़ का घर खरीदते हैं तो 20 साल के लिए 10 फीसदी इंटरेस्ट के हिसाब से आपकी ईएमआई 96,502 रुपए होगी। इसमें से 83,333 रुपए पहले महीने ब्याज के तौर पर एडजस्ट हो जाएंगे और 13,169 रुपए की भरपाई प्रिंसिपल में होगी।
लिहाजा, अगले महीने प्रिंसिपल घटकर 1 करोड़ के बजाय 99,86,331 रुपए हो जाएगा और अगले महीने ब्याज घटकर 83,224 रुपए। इस तरीके से ब्याज का बोझ घटता जाएगा, जिससे ईएमआई का बड़ा हिस्सा प्रिंसिपल के तौर पर अजस्ट करने में मदद मिलेगी। वहीं, अपार्टमेंट का ऐनुअल रेंटल कैपिटल वैल्यू का 2.5 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी हो जाएगा। इस हिसाब से 1 करोड़ के फ्लैट पर 25,000 रुपए सालाना किराया आपको मिल सकेगा। इससे आपको ब्याज खर्च कम करने में मदद मिलेगी। किराए में आमतौर पर सालाना 10 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। हालांकि, अगर इसे सिर्फ 5 फीसदी भी मान कर चलें, तो इससे इंटरेस्ट का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। 14वें साल के अंत तक फ्लैट का किराया ईएमआई के इंटरेस्ट वाले हिस्से से ज्यादा होगा। कुल मिलाकर अगर आप रेंटल इनकम को शामिल कर प्रॉपर्टी में रिटर्न का अंदाजा लगाते हैं, तो यह कम से कम 15 फीसदी सीएजीआर के दायरे में होगा।
अभी बैंक इंटरेस्ट रेट घटा रहे हैं। इससे घर खरीदने वालों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में पहले से तेज प्रॉपर्टी की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगी। लिहाजा, आप पर्सनल यूज या इन्वेस्टमेंट के लिए घर खरीदना चाहते हैं, तो कीमतें घटने का इंतजार करना आपके लिए ठीक नहीं होगा। अगर आप प्रॉपर्टी में पैसा लगाने चाहते हैं, तो लॉन्ग टर्म प्लान बेहतर रहेगा। एनसीआर में पिछले कुछ सालों में किराए में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अगर आप रेंटल इनकम की बात करें, तो घर खरीदने के लिए आपका इन्वेस्टमेंट काफी कम पड़ता है। मिसाल के तौर पर, अगर आप एक करोड़ का घर खरीदते हैं तो 20 साल के लिए 10 फीसदी इंटरेस्ट के हिसाब से आपकी ईएमआई 96,502 रुपए होगी। इसमें से 83,333 रुपए पहले महीने ब्याज के तौर पर एडजस्ट हो जाएंगे और 13,169 रुपए की भरपाई प्रिंसिपल में होगी।
लिहाजा, अगले महीने प्रिंसिपल घटकर 1 करोड़ के बजाय 99,86,331 रुपए हो जाएगा और अगले महीने ब्याज घटकर 83,224 रुपए। इस तरीके से ब्याज का बोझ घटता जाएगा, जिससे ईएमआई का बड़ा हिस्सा प्रिंसिपल के तौर पर अजस्ट करने में मदद मिलेगी। वहीं, अपार्टमेंट का ऐनुअल रेंटल कैपिटल वैल्यू का 2.5 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी हो जाएगा। इस हिसाब से 1 करोड़ के फ्लैट पर 25,000 रुपए सालाना किराया आपको मिल सकेगा। इससे आपको ब्याज खर्च कम करने में मदद मिलेगी। किराए में आमतौर पर सालाना 10 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। हालांकि, अगर इसे सिर्फ 5 फीसदी भी मान कर चलें, तो इससे इंटरेस्ट का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। 14वें साल के अंत तक फ्लैट का किराया ईएमआई के इंटरेस्ट वाले हिस्से से ज्यादा होगा। कुल मिलाकर अगर आप रेंटल इनकम को शामिल कर प्रॉपर्टी में रिटर्न का अंदाजा लगाते हैं, तो यह कम से कम 15 फीसदी सीएजीआर के दायरे में होगा।