Tuesday, March 1, 2011

रेलमंत्री ने मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) की मुंबई की लाइफलाइन को सुधारने के लिए तारीफ की

इसे एक कॉपोर्रेट कंपनी की स्टाइल कह लीजिए या फंड मैनेजमेंट के क्राइसिस की दौर से गुजर रहे रेलवे का सबक, अब रेलवे अपने पहियों को और भी सुचारु रूप से दौड़ाने की प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकारों को अपने साथ लेना चाहती है। वह इस अर्थ में कि मेट्रो सिटीज में रेल ट्रांसपोर्ट अब सिर्फ रेलवे का विषय नहीं रह गया। रेलमंत्री ने मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) की मुंबई की लाइफलाइन को सुधारने के लिए तारीफ की और इसी तर्ज पर दूसरे 4 शहरों (चेन्नै, हैदराबाद, अहमदाबाद, कोलकाता) में ऐसे कार्पोरेशन की स्थापना की बात कही। इससे स्पष्ट है कि अब शहरों का रेल नेटवर्क सुधारने का बोझ रेलवे सिर्फ अपने कंधों पर नहीं, बल्कि राज्य सरकारों पर भी डालना चाहती है। बजट के प्रस्तावों के अनुसार, रेल मंत्री चाहती है कि एमआरवीसी की ही तरह केआरवीसी (कोलकाता रेल विकास कार्पोरेशन) का गठन हो और उसके लिए राज्य सरकार के अलावा बैंक और दूसरी फाइनांस कंपनियां, स्थानीय निकाय तथा दूसरे स्टेकहोल्डर अपनी तरफ से फंड दें। आपको मालूम होगा कि एमआरवीसी रेलवे और राज्य सरकार का एक ज्वाइंट वेंचर है जो रेलवे प्रॉजेक्ट का कार्यान्वयन करती है। प्रॉजेक्ट का खर्च रेलवे और महाराष्ट्र सरकार मिलकर वहन करती हैं। इसका गठन 12 जुलाई 1999 को हुआ था। उस समय मुंबई का रेलवे नेटवर्क अच्छी स्थिति में नही था। फिर एमआरवीसी अस्तित्व में आई और इसने लाइफलाइन के दमघोंटू माहौल में राहत की एक सांस सी भर दी। यूं तो आज मुंबई की लाइफलाइन में काफी सहूलियत की गुंजाइश है, मगर 5 साल पहले की तुलना में यह काफी सुकून देता है। राज्य सरकारों या दूसरे एजेंसियों की आर्थिक सहायता लेने की रेलवे की नीयत को इस बात से भी जाना जा सकता है कि इसी बजट में ममता बनर्जी ने देश के 20 महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों को चकाचक करने के लिए टूरिजम बोर्ड की फिफ्टी-फिफ्टी मदद मांगी है। पश्चिम रेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दरअसल अब वक्त ही ऐसा आ गया है कि किसी भी शहर का रेल ट्रांसपोर्ट सिर्फ रेलवे नहीं कर सकती है। उसमें संबंधित सरकारों या दूसरी फाइनांशल एजेंसियों का समूचा योगदान जरूरी हो गया है। जबकि खुद एमआरवीसी के एमडी पी. सी. सहगल बताते हैं कि रेल मंत्री द्वारा हमारी एजेंसी की तारीफ इस बात की परिचायक है कि अब रेल ट्रांसपोर्ट के प्रॉजेक्टों में सरकारों की आर्थिक सहभागिता बहुत जरूरी हो गई है।